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संदेश

Rajnarayan Mishra | Freedom Fighter | क्रांतिवीर राजनारायण मिश्र

  🇮🇳 राजनारायण मिश्र - आज़ादी के आंदोलन का सशक्त क्रांतिवीर जिसके नाम हुई ब्रिटिश साम्राज्य की आखिरी फाँसी 🇮🇳 🇮🇳 राजनारायण मिश्र ने कहा था कि हमें दस आदमी ही चाहिए, जो त्यागी हों और देश की ख़ातिर अपनी जान की बाज़ी लगा सकें. कई सौ आदमी नहीं चाहिए जो लंबी-चौड़ी हाँकते हों और अवसरवादी हों। 🇮🇳 🇮🇳 चाहे जितनी तरह से कही जाए, और जितनी बार, भारत की आज़ादी की कहानी से कुछ छूट ही जाता है। हमारे देश की आज़ादी के किस्सों में कितने ही उत्सर्ग ऐसे हैं जिनकी ध्वनि लोगों तक नहीं पहुँची, कितने ही पन्ने अधखुले हैं, कितने बलिदान अकथ रह गये हैं। 9 दिसंबर, 1944 को लखनऊ में ‘इन्कलाब जिंदाबाद’ का उद्घोष करते हुए वीरगति का वरण करने वाले क्रांतिकारी राजनारायण मिश्र को उनकी बलिदान का सिला मिला होता तो आज आप उन्हें जानते होते। ब्रिटिश साम्राज्य में सबसे नौजवान फाँसी थी खुदीराम बोस की और विराम लगा राजनारायण मिश्र जी की फाँसी से। 🇮🇳 आईये जानते हैं राजनारायण मिश्र किन अवधारणाओं और अंग्रेज़ शासन के हाथों किन शोषित परिस्थतियों में बड़े हुए होंगे कि 24 वर्ष की छोटी उम्र में ही उन्हें अपने प्राणों की बलि चढ़ान...

Radhacharan Goswami | राधाचरण गोस्वामी जी | 25 फरवरी 1859-12 दिसंबर 1925

राधाचरण गोस्वामी (Radhacharan Goswami, जन्म- 25 फरवरी, 1859, मृत्यु- 12 दिसंबर, 1925) ब्रज के निवासी एक साहित्यकार, नाटककार और संस्कृत के उच्च कोटि के विद्वान थे। आपने ब्रज भाषा का समर्थन किया। राधाचरण गोस्वामी खड़ी बोली पद्य के विरोधी थे। उनको यह आशंका थी कि खड़ी बोली के बहाने उर्दू का प्रचार हो जाएगा।  🇮🇳 राधाचरण गोस्वामी का जन्म 25 फरवरी 1859 ई० को उत्तर प्रदेश के #वृंदावन (#मथुरा) में हुआ था। राधाचरण गोस्वामी के पिता का नाम #गल्लू_जी_महाराज (गुणमंजरी दास जी) था। गल्लू जी महाराज सन 1827 ईस्वी से 1890 ईसवी तक भक्त कवि रहे थे। आपके पिता धार्मिक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति नहीं थे, आपके पिता के भाव राष्ट्रीयता, सामाजिक चेतना, प्रगतिशीलता तथा सामाजिक क्रांतिवादी की प्रज्वलित चिंगारियां थी। गोस्वामी जी भारतेंदु युग के कवि थे। 🇮🇳 राधाचरण गोस्वामी जी 1885 ई० में वृंदावन (मथुरा) नगर पालिका के सदस्य पहली बार निर्वाचित हुए थे। तथा दूसरी बार भी आप ही निर्वाचित हुए। वर्ष 1897 ई० को गोस्वामी जी तीसरी बार नगर पालिका सदस्य निर्वाचित हुए। अपने कार्यकाल में आपने वृंदावन की सड़कों में छह पक्की सड़...

Modi Govt vs Supreme Court | मोदी से टकराने वाले का बर्बाद होना तय होता है | लेखक : सुभाष चन्द्र

CJI चंद्रचूड़ सत्ता के नशे में मत भूलना, #मोदी से टकराने वाले का  बर्बाद होना तय होता है और आप सब सीधे मोदी से टकरा रहे हो - ये कोई नई बात नहीं है जब #CJI #चंद्रचूड़ के ऐसे बयान और आचरण सामने आते  हैं जिनसे पता चलता है वह प्रधानमंत्री मोदी को सहन ही नहीं कर पा रहे और वक्त वक्त पर जलील करने की कोशिश करते हैं लेकिन ऐसा करते हुए चंद्रचूड़ भूल जाते हैं कि मोदी से टकराने वाले का बर्बाद होना तय होता है क्योंकि मोदी ठंडी करके खाते हैं और आप उबलती खिचड़ी में मुंह मारते हो -  पूर्व सैनिकों के #OROP केस में CJI चंद्रचूड़ ने #प्रधानमंत्री_मोदी को जलील करने की कोशिश की जब सरकार गोपनीय जानकारी #Sealed_Cover में देना चाहती थी लेकिन चंद्रचूड़ ने जलील करते हुए कहा कि सब कुछ खुला होना चाहिए - मणिपुर मामले में तो मोदी को सीधी धमकी दे दी थी कि सरकार कुछ नहीं करेगी तो हम करेंगे जबकि सरकार सब कुछ कर रही थी परंतु लक्ष्य मोदी को नीचा दिखाना था - अब देखिए, 18 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अधिवेशन का समापन करते हुए विस्तार से बताया कि महिला उत्थान के लिए पिछले 10 वर्ष में...

Guru Ravidas Jayanti | संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती | माघ मास की पूर्णिमा

गुरू रविदास जी (रैदास)  का जन्म काशी में माघ पूर्णिमा दिन रविवार को संवत 1377 को हुआ था उनका एक दोहा प्रचलित है। चौदह सौ तैंतीस कि माघ सुदी पन्दरास। दुखियों के कल्याण हित प्रगटे श्री गुरु रविदास जी । उनके पिता संतोख दास तथा माता का नाम कलसांं देवी था। उनकी पत्नी का नाम लोना देवी बताया जाता है।  रविदाजी पंजाब में रविदास कहा। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में उन्हें रैदास के नाम से ही जाना जाता है। गुजरात और महाराष्ट्र के लोग 'रोहिदास' और बंगाल के लोग उन्हें 'रुइदास' कहते हैं। कई पुरानी पांडुलिपियों में उन्हें रायादास, रेदास, रेमदास और रौदास के नाम से भी जाना गया है। कहते हैं कि माघ मास की पूर्णिमा को जब रविदास जी ने जन्म लिया वह रविवार का दिन था जिसके कारण इनका नाम रविदास रखा गया। उनका जन्म माघ माह की पूर्णिमा को हुआ था। संत शिरोमणि कवि रविदास का जन्म माघ पूर्णिमा को 1376 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर गोबर्धनपुर गांव में हुआ था। उनकी माता का नाम कर्मा देवी (कलसा) तथा पिता का नाम संतोख दास (रग्घु) था। उनके दादा का नाम श्री कालूराम जी, दादी का नाम श्रीमती लखप...

Anant Pai | Uncle Pai | Cartoonist | Educationist | अनंत पई | अंकल पई | 17 सितंबर 1929-24 फरवरी 2011

  #Anant Pai  | #Uncle Pai | #Educationist   | #अनंत पई | #अंकल पई  | 17 सितंबर 1929-24 फरवरी 2011 🇮🇳 #संस्कृति_रक्षक इस #कार्टूनिस्ट का नाम था अनंत पई. बच्चों के बीच ऐसे #फेमस हुए कि अंकल पई बन गए. 🇮🇳 🇮🇳 फरवरी का महीना था. साल था 1967. दूरदर्शन पर एक कॉन्टेस्ट चल रहा था. उसमें सवाल आया “रामायण में भगवान की माता का नाम क्या था?” सारे पार्टिसिपेंट गच्चा खा गए. कोई बता नहीं पाया. टाइम्स ऑफ इंडिया के दफ्तर में कॉमिक्स का डिपार्टमेंट देखने वाला एक आदमी ये सब देख रहा था. उकताहट से भर गया. अपने देश के फ्यूचर को ऐसे पंगु होता देखना बर्दाश्त नहीं हो रहा था. उसने फैसला किया कि अपनी क्रिएटिविटी से वो इस पीढ़ी को #सामान्य_ज्ञान और #नैतिक_शिक्षा पढ़ाएगा. वो भी फुल मनोरंजन देकर, बिना बोर किए. नौकरी छोड़ दी और रची #अमर_चित्र_कथा. इस कार्टूनिस्ट का नाम था अनंत पई. बच्चों के बीच ऐसे फेमस हुए कि अंकल पई बन गए. 🇮🇳 अब से 15-20 साल पहले भारत में वो माहौल था जब बच्चों के पास मनोरंजन के लिए कॉमिक्स सबसे ऊपर थीं. क्योंकि उनको टीचर्स और पेरेंट्स से छिपाने की जरूरत नहीं पड़ती थी...

Rukmini Devi Arundale | रुक्मिणी देवी अरुंडेल | प्रसिद्ध भारतीय_नृत्यांगना | 29 February, 1904-24 February, 1986

  🇮🇳 #रुक्मिणी देवी अरुंडेल (जन्म- 29 फ़रवरी, 1904; मृत्यु- 24 फ़रवरी, 1986) प्रसिद्ध #भारतीय_नृत्यांगना थीं।  #Rukmini_Devi_Arundale (born- #29February, 1904; died- #24February, 1986) was a f#amous #Indian_dancer.  उन्होंने #भरतनाट्यम नृत्य में भक्तिभाव को भरा तथा नृत्य की अपनी एक परंपरा आरम्भ की। कला के क्षेत्र में रुक्मिणी देवी को 1956 में 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया था। गौरतलब है कि 1920 के दशक में भरतनाट्यम को अच्छी नृत्य शैली नहीं माना जाता था और तब लोग इसका विरोध करते थे, बावजूद इसके रुक्मिणी देवी ने न केवल इसका समर्थन किया बल्कि इस कला को अपनाया भी। 🇮🇳 #रुक्मिणी_देवी का जन्म 29 फ़रवरी, 1904 को #तमिलनाडु के #मदुरै ज़िले में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच पली-बढ़ी रुक्‍मिणी देवी ने महान् संगीतकारों से भारतीय संगीत की शिक्षा ली। रुक्‍मिणी के पिता संस्कृत के विद्वान् और एक उत्साही #थियोसोफिस्‍ट थे। इनके समय में लड़कियों को मंच पर नृत्य करने की इजाजत नहीं थीं। ऐसे में नृत्य सीखने के साथ-साथ रुक्मिणी देवी ने तमाम विरोधों के बावजूद इ...

Film Actress | Madhubala | मधुबाला | 14 February 1933- 23 February 1969

 Film Actress | Madhubala | मधुबाला | 14 February 1933- 23 February 1969  मधुबाला (जन्म: 14 फ़रवरी 1933, दिल्ली - निधन: 23 फ़रवरी 1969, मुंबई) भारतीय हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री थी उनके अभिनय में एक आदर्श भारतीय नारी को देखा जा सकता है|  मधुबाला का जन्म 14 फ़रवरी 1933 को दिल्ली में एक मुस्लिम पठान परिवार में हुआ था. उनका नाम रखा गया था मुमताज़ बेगम जहाँ देहलवी. मधुबाला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती थीं, और उन्होंने कभी भी भारी मेकअप या कॉस्मेटिक सर्जरी के साथ अपनी विशेषताओं को बदलने की कोशिश नहीं की। उन्होंने अपनी प्राकृतिक सुंदरता को अपनाया और इसने उन्हें उद्योग में अलग पहचान दिलाई। मधुबाला का करियर उनके समकालीनों में सबसे छोटा था, लेकिन जब तक उन्होंने अभिनय छोड़ दिया, तब तक उन्होंने 70 से अधिक फिल्मों में सफलतापूर्वक अभिनय किया था। मधुबाला का जन्म वेंट्रिकुलर सेप्टल दोष के साथ हुआ था, जो एक जन्मजात हृदय विकार था जिसका उस समय कोई इलाज नहीं था। मधुबाला ने अपना अधिकांश बचपन दिल्ली में बिताया और बिना किसी स्वास्थ्य समस्या के बड़ी हुईं। मुगल-ए-आज़म में उनका अभि...

Dr. Mahendralal Sarkar | डॉ. महेन्द्रलाल सरकार | November 2, 1833-February 23, 1904

  🇮🇳 बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, रामकृष्ण परमहंस और त्रिपुरा के महाराजा जैसे दिग्गजों के चिकित्सक रहे डॉ. महेन्द्रलाल सरकार एलोपैथी की शिक्षा लेकर भी होम्योपैथी को अपनाकर और उसी के माध्यम से चिकित्सा करने वाले #चिकित्सक थे। 🇮🇳 🇮🇳 #महेन्द्रलाल सरकार (जन्म- 2 नवंबर, 1833; मृत्यु- 23 फ़रवरी, 1904) भारत में #होम्योपैथी को अहम चिकित्सा विधा के तौर पर स्थापित करने वालों में अग्रणी थे। वह एक #चिकित्सक, #समाज_सुधारक तथा #वैज्ञानिक चेतना के प्रसारक नेता थे। 'इण्डियन एसोसियेशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साईन्स' की स्थापना महेन्द्रलाल सरकार ने ही की थी। वह कलकता मेडिकल कॉलेज के दूसरे स्नातक मेडिकल डॉक्टर थे। यद्यपि उन्होंने एलोपैथी की शिक्षा ली थी, फिर भी होम्योपैथी को अपनाया और उसी के माध्यम से चिकित्सा की। Mahendralal Sarkar (2nd November 1833 - 23rd February 1904) was a medical doctor (MD), the second MD graduated from the #Calcutta #Medical College, social reformer, and propagator of #scientific studies in nineteenth-century India. He was the founder of the #Indian #Association for the #Cu...

Sardar Ajit Singh | क्रांतिकारी सरदार अजीत सिंह (शहीद भगत सिंह के चाचा ) | February 23, 1881- August 15, 1947

  Sardar Ajit Singh (February 23, 1881- August 15, 1947) 🇮🇳 #भारत के #स्वतंत्रता संघर्ष में #अतुलनीय योगदान है #Freedom_Fighter #सरदार_अजीत_सिंह का। 🇮🇳 🇮🇳 देश निकाले का दण्ड के बाद लगभग 40 वर्षों तक विदेश में रहकर 40 भाषाओं पर अधिकार; ईरान के रास्ते तुर्की, जर्मनी, ब्राजील, स्विट्जरलैंड, इटली, जापान आदि देशों में रहकर क्रांति का बीजारोपण करते रहे। 🇮🇳 🇮🇳 14 अगस्त 1947 की शाम भारत की #आजादी की खबर सुनकर हुए खुश और भारत विभाजन की खबर से व्यथित होकर 15 अगस्त 1947 को सुबह 4 बजे त्याग दिया शरीर 🇮🇳 🇮🇳 सरदार अजीत सिंह (जन्म- 23 फ़रवरी, 1881, जालंधर ज़िला, पंजाब; मृत्यु- 15 अगस्त, 1947) भारत के सुप्रसिद्ध राष्ट्रभक्त एवं क्रांतिकारी थे। ये प्रख्यात शहीद सरदार भगत सिंह के चाचा थे। 🇮🇳 सरदार अजीत सिंह का जन्म पंजाब के #जालंधर ज़िले के एक गॉंव #खटकड़_कलां में 23 फ़रवरी, सन 1881 को हुआ था। उन्होंने जालंधर और #लाहौर से शिक्षा ग्रहण की। 40 साल तक एकाकी और तपस्वी जीवन बिताने वाली सरदार अजीत सिंह की पत्नी श्रीमती #हरनाम_कौर भी वैसे ही जीवंत व्यक्तित्व वाली महिला थीं। 🇮🇳 सरदार अजीत स...