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रानी लक्ष्मीबाई – वीरता, स्वतंत्रता और अदम्य साहस की प्रतीक | Rani Lakshmibai | Inspiration | Jhansi Ki Rani | Indian History

⚔️ रानी लक्ष्मीबाई – वीरता, स्वतंत्रता और अदम्य साहस की प्रतीक  Rani Lakshmibai – A Symbol of Valor, Freedom, and Indomitable Courage 🌺 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उसमें रानी लक्ष्मीबाई का नाम स्वर्ण अक्षरों में सदैव चमकेगा। वे केवल झांसी की रानी  ⚔️  नहीं थीं— बल्कि नारी शक्ति, राष्ट्रभक्ति और असीम साहस की जीवित प्रतिमा थीं। उनका जीवन बताता है— “स्वतंत्रता भीख में नहीं, वीरता से जीती जाती है।” "Freedom is not won by begging, but by valor ." 👑  जन्म: 19 नवंबर 1828 स्थान: वाराणसी बचपन का नाम: मणिकर्णिका (मनु) पिता: मोरोपंत तांबे माता: भागीरथी बाई मनु तलवार  ⚔️  , घुड़सवारी और युद्धकला में बचपन से ही निपुण थीं। उन्हें बचपन से ही “बहादुर लड़की” कहा जाता था। 👰 झांसी की रानी  मनु का विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव से हुआ। विवाह के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई पड़ा। दत्ता पुत्र दामोदर राव को गोद लेने के बाद, ब्रिटिश सरकार ने “डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स” लागू कर झांसी हड़पने की कोशिश की। लेकिन रानी ने स्पष्ट कह दिया— “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।...

बिरसा मुंडा | धरती आबा — स्वतंत्रता संग्राम के महानायक | जनजातीय गौरव दिवस | Birsa Munda — The Great Hero of the Tribal Freedom Struggle

  'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती 'जनजातीय गौरव दिवस' 🌟 बिरसा मुंडा — स्वतंत्रता संग्राम के महानायक (Indian History / Tribal Hero / Freedom Fighter) भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी एक आध्यात्मिक सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर, उन्होंने मुंडा जनजातियों को ब्रिटिश भूमि कानूनों और सामंती शोषण के खिलाफ एकजुट किया। धरती आबा ("पृथ्वी के पिता") के रूप में प्रसिद्ध बिरसा मुंडा ने औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त एक नैतिक, स्व-शासित समाज की कल्पना की। 🔱 भारत की स्वतंत्रता का इतिहास केवल दिल्ली, लखनऊ या कोलकाता की लड़ाइयों तक सीमित नहीं है। इस इतिहास के पन्नों में एक ऐसा नाम दर्ज है जिसने जंगलों, पहाड़ों और असमानताओं के बीच सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता और आदिवासी अस्मिता की लौ जगाई — वह नाम है धरती आबा — बिरसा मुंडा। “उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता केवल ज़मीन की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की लड़ाई भी है।” 👑 कौन थे बिरसा मुंडा? बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के ऊलीहातु गाँव में हुआ था। वे मुंडा जनजाति से थे, जो प्रकृति, भूमि और संस्क...

ब्रह्मगुप्त | Brahmagupta | भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री | India's Great Mathematician and Astronomer

🌟 ब्रह्मगुप्त — भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री  | Vedic Mathematics | Ancient Indian Science 🔱 भारत की भूमि ने अनेक महान गणितज्ञ और वैज्ञानिक दिए हैं — उनमें से एक हैं ब्रह्मगुप्त (Brahmagupta), जिन्होंने न केवल गणित को नई ऊँचाइयाँ दीं, बल्कि बीजगणित, अंकगणित और खगोलशास्त्र की नींव को मजबूत किया। “ब्रह्मगुप्त ने गणित को तर्क, सूत्र और खगोलीय ज्ञान से जोड़कर एक विज्ञान का रूप दिया।” 👑 आचार्य ब्रह्मगुप्त का जन्म राजस्थान राज्य के भीनमाल  (प्राचीन भिल्लमाल)   शहर मे  598 ई.  मे हुआ था। इसी कारण उन्हें ' भिल्लमालाआचार्य ' के नाम से भी कई जगह उल्लेखित किया गया है। यह शहर तत्कालीन गुजरात प्रदेश की राजधानी तथा हर्षवर्धन साम्राज्य के राजा व्याघ्रमुख के समकालीन माना जाता है।ब्रह्मगुप्त आबू पर्वत तथा लुणी नदी के बीच स्थित, भीनमाल नामक ग्राम के निवासी थे। इनके पिता का नाम जिष्णु था।   वे भारतीय गणित के स्वर्ण युग के महान प्रतिनिधि थे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें — 📘 “ब्रह्मस्फुटसिद्धांत” (Brahmasphutasiddhanta) 📘 “खण्डखाद्यक” (Khandakhadyaka) आज भी गणित और ...

How our Gurukuls were closed | हमारे गुरुकुल कैसे बन्द हुए | लेखक : नलीन चंद्र

  इंग्लैंड में पहला स्कूल school 1811 में खुला उस समय भारत में 7,32,000 #गुरुकुल #Gurukul  थे, आइए जानते हैं हमारे गुरुकुल #Gurukul कैसे बन्द हुए। हमारे #सनातन #Sanatan #संस्कृति #cultural #परम्परा #tradition   के गुरुकुल में क्या क्या पढाई होती थी, ये जान लेना पहले जरूरी है। 01 अग्नि विद्या (#Metallurgy)  02 वायु विद्या (#Flight)  03 जल विद्या (#Navigation)  04 अंतरिक्ष विद्या (#Space_Science)  05 पृथ्वी विद्या (#Environment)  06 सूर्य विद्या (#Solar_Study)  07 चन्द्र व लोक विद्या (#Lunar_Study)  08 मेघ विद्या (#Weather_Forecast)  09 पदार्थ विद्युत विद्या (#Battery)  10 सौर ऊर्जा विद्या (#Solar_Energy)  11 दिन रात्रि विद्या  12 सृष्टि विद्या (#Space Research)  13 खगोल विद्या (#Astronomy)  14 भूगोल विद्या (#Geography)  15 काल विद्या (#Time)  16 भूगर्भ विद्या (#Geology #Mining)  17 रत्न व धातु विद्या (#Gems & #Metals)  18 आकर्षण विद्या (#Gravity)  19 प्रकाश विद्या (...

| पंडित हरिभाऊ उपाध्याय | साहित्यकार तथा स्वतंत्रता आंदोलन के राष्ट्रसेवी | 24 मार्च, 1892 - 25 अगस्त, 1972

  हरिभाऊ उपाध्याय का जन्म 24 मार्च, 1892 को मध्य प्रदेश में #उज्जैन ज़िले के #भौंरोसा नामक गाँव में हुआ था। विद्यार्थी जीवन से ही उनके मन में साहित्य के प्रति चेतना जाग्रत हो गई थी। संस्कृत के नाटकों तथा अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध उपन्यासों के अध्ययन के बाद वे उपन्यास लेखन की  और अग्रसर हुए। 🇮🇳 हरिभाऊ उपाध्याय ने हिन्दी सेवा से सार्वजनिक जीवन शुरू किया और  सबसे पहले  ‘औदुम्बर’ मासिक पत्र के प्रकाशन द्वारा हिन्दी पत्रकारिता जगत में पर्दापण किया। सबसे पहले  1911 में वे ‘औदुम्बर’ के सम्पादक बने। पढ़ते-पढ़ते ही इन्होंने इसके सम्पादन का कार्य भी आरम्भ किया। ‘औदुम्बर’ में कई विद्वानों के विविध विषयों से सम्बद्ध पहली बार लेखमाला निकली, जिससे हिन्दी भाषा की स्वाभाविक प्रगति हुई। इसका श्रेय हरिभाऊ के उत्साह और लगन को ही जाता है। 1915  में हरिभाऊ उपाध्याय #महावीर_प्रसाद_द्विवेदी के सान्निध्य में आये। हरिभाऊ जी खुद लिखते हैं कि- “औदुम्बर की सेवाओं ने मुझे आचार्य द्विवेदी जी की सेवा में पहुँचाया।” द्विवेदी जी के साथ ‘सरस्वती’ में कार्य करने के बाद हरिभाऊ उपाध्याय ने ‘प्रत...

Radhikaraman Prasad Singh | राधिकारमण प्रसाद सिंह | पद्मभूषण तथा साहित्य वाचस्पति की उपाधि से अलंकृत साहित्यकार |

 जब वक्त्त गुजर जाता है तो याद बनती है. किसी बाग की खुशबू निकल जाए तो फूल खिलने की फरियाद आती है. इसी तरह आज साहित्य नगरी #सूर्यपुरा का स्वर्णिम अतीत सिर्फ यादों में सिमटकर रह गया है. साहित्याकाश के दीप्तिमान नक्षत्र राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह का किला आज भले ही रख रखाव के अभाव में खंडहर में तब्दील होने लगा हो परंतु लाहौरी ईट से बना यह किला आज भी राजा साहब की याद को ताजा करता है. 🇮🇳🔰 राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह का जन्म 10 सितम्बर 1890 को तत्कालीन #शाहाबाद जिला के #बिक्रमगंज के #सूर्यपुरा ग्राम के एक कायस्थ परिवार में हुआ था. बड़े जमींदार होने की वजह से अपने नाम के साथ सिंह लगाते थे. इनके पिता #राज_राजेश्वरी_प्रसाद_सिंह हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, बंग्ला, फ़ारसी तथा पश्तो के विद्वान होने के साथ ब्रज भाषा के एक बड़े कवि भी थे. राधिका रमण प्रसाद के पितामह #दीवान_राम_कुमार_सिंह साहित्यक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और कुमार उपनाम से ब्रज भाषा मे कविताएं लिखा करते थे. ये कहना गलत नही होगा कि राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह को साहित्य विरासत में मिला था. 🇮🇳🔰 उनकी प्राम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई...

Basanti Devi | स्वतंत्रता आंदोलन की अमर सेनानी बसंती देवी | 23 मार्च 1880 - 7 मई 1974

  1925 में अपने पति #देशबंधु_चित्तरंजन_दास के देहांत के बाद भी #बसंती_देवी बराबर राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेती रहीं। 🇮🇳 🇮🇳 बसंती देवी (जन्म: 23 मार्च, 1880, कोलकाता; मृत्यु: 7 मई 1974) भारत की स्वतंत्रता सेनानी और बंगाल के प्रसिद्ध नेता #चित्तरंजन_दास की पत्नी थीं। राष्ट्रपिता #महात्मा_गाँधी द्वारा आरंभ किए गये #असहयोग_आंदोलन में भी ये सम्मिलित हुईं। लोगों में #खादी का प्रचार करने के अभियोग में इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। 🇮🇳 बंगाल के प्रसिद्ध नेता चित्तरंजन दास की पत्नी बसंती देवी का जन्म 23 मार्च, 1880 ई. को #कोलकाता (पूर्व नाम कलकत्ता) में हुआ। बचपन में ये अपने पिता के साथ #असम में रहती थीं तथा आगे की शिक्षा के लिए कोलकाता आ गईं। यहीं 1897 में इनका बैरिस्टर चित्तरंजन दास के साथ विवाह हुआ। 🇮🇳 बसंती देवी भी स्वतंत्रता सेनानी थीं, जब 1917 में चित्तरंजन दास राजनीति में कूद पड़े तो बसंती देवी ने भी पूरी तरह से उनका साथ दिया। गाँधी जी द्वारा आरंभ किए गये 'असहयोग आंदोलन' में ये सम्मिलित हुईं। इनके द्वारा लोगों में खादी का प्रचार करने के अभियोग में इन्हें गिरफ्तार कर लिया...

Dr. Ram Manohar Lohia | डॉ. राम मनोहर लोहिया | 23 March 1910 – 12 October 1967

  किसी देश का उत्थान जनता की चेतना और राजनीतिक जागरूकता पर निर्भर करता है। 🇮🇳  🇮🇳 आज देश के महानायक भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और डॉ. राम मनोहर लोहिया को एक साथ याद करने का दिन है। 23 मार्च को जहाँ भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु के बलिदान का दिन है तो वहीं महान समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती भी है। 🇮🇳 डॉ. लोहिया एक ऐसे चिंतक और नेता थे, जिन्होंने अपने जन्मदिन को बलिदान दिवस (शहीदी दिवस) को समर्पित कर दिया। वे कहते थे कि यह जन्मदिन से अधिक अपने महानायकों को याद करने का दिन है, जो बहुत कम उम्र में बलिदान देकर समाज को एक बड़ा सपना दे गया। ऐसे बलिदान समाज में एक नई सोच और सपने देखने के नजरिए को प्रतिफलित करती हैं, उस सपने को आगे बढ़ाने का दिन है। 🇮🇳 उन्होंने भगत सिंह और उनके साथियों के बलिदानों के बाद खुद का जन्मदिन मनाने से इनकार कर दिया और अपने समाजवादी साथियों से यह अपील की कि वह भी उसे न मनाएं । अगर कोई उनसे जन्मदिन मनाने का आग्रह करता तो वह स्पष्ट रूप से कहते थे कि भगत सिंह और उनके साथियों के बलिदानों को याद करना चाहिए और इस दिन को हमें बलिदान दिवस के रूप में ...

| स्वतंत्रता सेनानी सुहासिनी गांगुली | जन्म- 3 फ़रवरी, 1909; मृत्यु- 23 मार्च, 1965

 #क्रांतिकारी_वीरांगना भारत की लड़ाई में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान दिया। इसमें से कई महिलाओं ने जहाँ #महात्मा_गाँधी के अहिंसा का मार्ग अपनाया तो वहीं कई महिलाओं ने #चंद्रशेखर_आजाद और #भगत_सिंह जैसे क्रांतिकारियों के मार्ग को अपनाया। ऐसे ही महान महिला स्वतंत्रता सेनानियों में #सुहासिनी गांगुली का नाम प्रमुख है जिन्होंने बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियों में अपना सक्रिय योगदान दिया । 🇮🇳 सुहासिनी गांगुली का जन्म 3 फरवरी 1909 को तत्कालीन बंगाल के #खुलना में हुआ था। 🇮🇳 अपनी शिक्षा पूरी करने के उपरांत उन्होंने #कोलकाता में एक मूक बधिर बच्चों के स्कूल में नौकरी करना शुरू किया जहाँ पर वह क्रांतिकारियों के संपर्क में आई। 🇮🇳 उल्लेखनीय है कि उन दिनों बंगाल में ‘छात्री संघा’ नाम का एक महिला क्रांतिकारी संगठन कार्यरत था जिसकी कमान #कमला_दासगुप्ता के हाथों में थी। उल्लेखनीय है कि इसी संगठन से #प्रीति_लता_वादेदार और #बीना_दास जैसी वीरांगनायें जुड़ी हुई थी। 🇮🇳 खुलना के क्रांतिकारी #रसिक_लाल_दास और क्रांतिकारी #हेमंत_तरफदार के संपर्क में आने से सुहासिनी...

Lala Ram Thakur | VICTORIA CROSS WINNER | लांस नायक लाला राम | जन्म- 20 अप्रैल, 1876, हिमाचल प्रदेश; मृत्यु- 23 मार्च, 1927

  #भारतीयता_की_पहचान_को_कायम_रखने_वाले_नायक लांस नायक लाला राम (जन्म- 20 अप्रैल, 1876, हिमाचल प्रदेश; मृत्यु- 23 मार्च, 1927) भारतीय थल सेना के 41वें डोगरा में लांस नाईक थे। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने मेसोपोटामिया (मौजूदा इराक) में हन्ना के युद्ध में 21 जनवरी, 1916 को बहादुरी की मिसाल कायम की, जिसके लिए उनको "विक्टोरिया क्रॉस" से सम्मानित किया गया। 🇮🇳 लांस नायक लाला राम ने एक ब्रिटिश ऑफिसर को दुश्मन के करीब जमीन पर बेसुध पाया। वह ऑफिसर दूसरी रेजिमेंट का था। लाला राम उस ऑफिसर को एक अस्थायी शरण में ले आए, जिसे उन्होंने खुद बनाया था। उसमें वह पहले भी चार लोगों की मरहम-पट्टी कर चुके थे। 🇮🇳 जब उस अधिकारी के जख्म की मरहम-पट्टी कर दी तो उनको अपनी रेजिमेंट के एजुटेंट की आवाज सुनाई दी। एजुटेंट बुरी तरह जख्मी थे और जमीन पर पड़े थे। लाला राम ने एजुटेंट को अकेले नहीं छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने अपने पीठ पर लादकर एजुटेंट को ले जाना चाहा, लेकिन एजुटेंट ने मना कर दिया। 🇮🇳 उसके बाद वह शेल्टर में आ गए और अपने कपड़े उतारकर जख्मी अधिकारी को गर्म र...

Brigadier Rai Singh Yadav | ब्रिगेडियर राय सिंह यादव | टाइगर ऑफ नाथू ला | 17 मार्च 1925 -23 मार्च, 2017

  #नाथू_ला_का_बाघ लेफ्टिनेंट कर्नल राय सिंह यादव को भारतीय सेना में 'टाइगर ऑफ नाथू ला' के नाम से याद किया जाता है। उन्होंने संगीनों और राइफल बटों के साथ आमने-सामने की लड़ाई में आगे रहकर अपने लोगों का नेतृत्व किया। 🇮🇳 🇮🇳 राय सिंह यादव का जन्म 17 मार्च 1925 को पंजाब प्रांत (अब हरियाणा के रेवाड़ी जिले) के #गुड़गाँव जिले के #कोसली गाँव में हुआ था। उनके पिता #रायसाहब_गणपत_सिंह थे जिन्होंने 1920 के दशक में ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा की थी। राय सिंह ने अपनी सीनियर कैम्ब्रिज किंग जॉर्ज मिलिट्री स्कूल, जुलुंदुर से उत्तीर्ण की। वह 1944 में एक सिपाही के रूप में सेना में शामिल हुए। उन्हें 10 दिसंबर 1950 को 2 ग्रेनेडियर्स में नियुक्त किया गया था। उनका दिमाग विश्लेषणात्मक था और सेवा के आरंभ में ही वे सैन्य रणनीति और रणनीति में निपुण हो गए थे। उन्हें यूके के कैम्बरली में प्रतिष्ठित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में भाग लेने के लिए नामांकित किया गया था।    🇮🇳 1962 में झटके के बाद, किसी भी चीनी हमले के खिलाफ भारत की उत्तरी सीमाओं की रक्षा के लिए सात पर्वतीय डिवीजनों को खड़ा किया गया...

Sardar Bhagat Singh | स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रान्तिकारी | सरदार भगत सिंह | जन्म: 28 सितम्बर 1907 , वीरगति: 23 मार्च 1931

#क्रांतिकारी_बलिदानियों_का_देश_के_लिए_स्वप्न_कब_पूरा_होगा ??? भगत सिंह (जन्म: 28 सितम्बर 1907 , वीरगति: 23 मार्च 1931) भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रान्तिकारी थे। 28 सितंबर 1907 को लायलपुर, पश्चिमी पंजाब, भारत (वर्तमान पाकिस्तान) में एक सिख परिवार में जन्मे भगत सिंह, किशन सिंह संधू और विद्या वती के बेटे थे। सात भाई-बहनों में भगत सिंह दूसरे नंबर पर थे उनके दादा अर्जन सिंह, पिता किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थे। भगत सिंह ने अपनी 5वीं तक की पढाई गांव में की और उसके बाद उनके पिता किशन सिंह ने दयानंद एंग्लो वैदिक हाई स्कूल, लाहौर में उनका दाखिला करवाया। बहुत ही छोटी उम्र में भगत सिंह, #महात्मा गांधी जी के असहयोग आन्दोलन से जुड़ गए और बहुत ही बहादुरी से उन्होंने ब्रिटिश सेना को ललकारा। महज़ 24 साल की उम्र में #ब्रिटिश सरकार ने सरदार भगत सिंह को फांसी पर चढ़ा दिया था. उन पर #लाहौर षडयंत्र केस में शामिल होने का आरोप था. #भगत सिंह के साथ #राजगुरु और #सुखदेव #Bhagat_Singh, #Rajguru and #Sukhdev को भी सज़ा-ए-मौत दी गई थी भगत सिंह जिस तस्वी...

Balidan diwas | बलिदान-दिवस | भगतसिंह, सुखदेव व राजगुरू | 23 मार्च, 1931

#बलिदान_दिवस सरदार भगत सिंह 🇮🇳 🇮🇳 अमर हुतात्मा #सरदार_भगतसिंह का जन्म- 27 सितंबर, 1907 को बंगा, लायलपुर, पंजाब (अब पाकिस्तान में) हुआ था व 23 मार्च, 1931 को इन्हें दो अन्य साथियों सुखदेव व राजगुरू के साथ फाँसी दे दी गई। भगतसिंह का नाम भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अविस्मरणीय है। भगतसिंह देश के लिये जीये और देश ही के लिए बलिदान भी हो गए। 🇮🇳 राजगुरु 🇮🇳 🇮🇳 24 अगस्त, 1908 को पुणे ज़िले के खेड़ा गाँव (जिसका नाम अब 'राजगुरु नगर' हो गया है) में पैदा हुए अमर हुतात्मा #राजगुरु का पूरा नाम 'शिवराम हरि राजगुरु' था। आपके पिता का नाम 'श्री हरि नारायण' और माता का नाम 'पार्वती बाई' था। भगत सिंह और सुखदेव के साथ ही राजगुरु को भी 23 मार्च 1931 को फाँसी दी गई थी। राजगुरु 'स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं उसे हासिल करके रहूँगा' का उद्घोष करने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों से अत्यधिक प्रभावित थे। 🇮🇳 सुखदेव 🇮🇳 🇮🇳 अमर हुतात्मा #सुखदेव का जन्म 15 मई, 1907, पंजाब में हुआ था। 23 मार्च, 1931 को सेंट्रल जेल, लाहौर में भगतसिंह व राजगुरू के...