ॐ (ओम्): सृष्टि का मूल ध्वनि और ब्रह्म का प्रतीक सनातन धर्म में ॐ को सबसे पवित्र और शक्तिशाली ध्वनि माना जाता है। यह केवल एक अक्षर नहीं, बल्कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड का सार है। ऋषि-मुनियों के अनुसार, सृष्टि की उत्पत्ति भी इसी ध्वनि से हुई थी। इसलिए इसे प्रणव मंत्र भी कहा जाता है। ॐ का अर्थ क्या है? ॐ तीन ध्वनियों से मिलकर बना है: अ (A) उ (U) म (M) इन तीनों ध्वनियों का गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। ॐ और त्रिदेव का संबंध ॐ की तीन ध्वनियाँ सृष्टि के तीन प्रमुख देवताओं से जुड़ी हैं: अ → ब्रह्मा (सृष्टि का निर्माण) उ → विष्णु (पालन) म → शिव (संहार) इस प्रकार ॐ सम्पूर्ण सृष्टि के चक्र का प्रतीक है। ये भी देखे 👇 पुनर्जन्म | Punarjanm | क्या मृत्यु के बाद जीवन फिर से शुरू होता है? ॐ का उल्लेख वेदों में ॐ का वर्णन प्राचीन वेदों और उपनिषदों में मिलता है, विशेष रूप से माण्डूक्य उपनिषद में। इस उपनिषद में बताया गया है कि ॐ ही ब्रह्म है और यही आत्मा का स्वरूप है। ॐ और ब्रह्मांड ऋषियों के अनुसार, ब्रह्मांड में जो कंपन (Vibration) है, वह ॐ की ध्वनि के समान है...
पुनर्जन्म: क्या मृत्यु के बाद जीवन फिर से शुरू होता है? मानव जीवन का सबसे गहरा और रहस्यमय प्रश्न है — क्या मृत्यु के बाद जीवन समाप्त हो जाता है, या आत्मा फिर से जन्म लेती है? सनातन धर्म में इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर मिलता है, जिसे पुनर्जन्म कहा जाता है। यह सिद्धांत बताता है कि आत्मा अमर है और वह एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश करती रहती है। पुनर्जन्म का अर्थ क्या है? पुनर्जन्म का अर्थ है — बार-बार जन्म लेना । जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसकी आत्मा शरीर को त्याग देती है और अपने कर्मों के अनुसार नया शरीर धारण करती है। गीता में पुनर्जन्म का सिद्धांत महान ग्रंथ भगवद गीता में पुनर्जन्म के बारे में विस्तार से बताया गया है। भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं: 👉 “जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्याग कर नए वस्त्र धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है।” आत्मा अमर है सनातन धर्म के अनुसार: आत्मा न जन्म लेती है न मरती है न जलती है न कटती है यह केवल शरीर बदलती है। कर्म और पुनर्जन्म का संबंध पुनर्जन्म का सबसे महत्वपूर्ण आधार ह...