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आश्लेषा नक्षत्र Ashlesha Nakshatra — रहस्य, ऊर्जा और कुण्डलिनी शक्ति का नक्षत्र | The Nakshatra of Mystery, Energy, and Kundalini Shakti | Vedic Astrology | Spiritual Insight

आश्लेषा नक्षत्र (Ashlesha Nakshatra)  स्वामी ग्रह: बुध देवता: नाग देवता प्रकृति: तीक्ष्ण प्रतीक: सर्प (ऊर्जा, बुद्धि और रहस्य) 🐍 आश्लेषा नक्षत्र  आश्लेषा नक्षत्र वैदिक ज्योतिष के अनुसार नौवाँ नक्षत्र है, जिसे सर्प की ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। यह नक्षत्र रहस्य, मनोबल, गहन सोच, आकर्षण और परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है। आश्लेषा की ऊर्जा व्यक्ति को ऊँचे बुद्धि स्तर, तीव्र अंतर्दृष्टि और गहरी समझ प्रदान करती है। 🐉 देवता — नाग देवता आश्लेषा नक्षत्र के देवता नाग हैं, जो कुण्डलिनी शक्ति और आंतरिक ऊर्जा के जागरण का संकेत देते हैं। यह नक्षत्र सिखाता है कि  “अगर मन को साध लिया, तो दुनिया को साधना आसान है।” “If you master the mind, it is easy to master the world.” 💠 आश्लेषा नक्षत्र के प्रमुख गुण तीक्ष्ण बुद्धि और विश्लेषण की क्षमता गहन अंतर्दृष्टि और छिपी बातें समझने की शक्ति रहस्यप्रिय एवं आध्यात्मिक झुकाव मंत्र, तंत्र, ज्योतिष में रुचि तेज सीखने की क्षमता और आकर्षक व्यक्तित्व 🌙 आश्लेषा नक्षत्र वाले व्यक्तियों की विशेषताएँ बुद्धिमान, चतुर और रणनीतिक मनोविज्ञान, शोध, गुप्त...

भगवान शालिग्राम का विवाह तुलसी से .... मेरी दुनिया - GMEDIA

भगवान शालिग्राम का विवाह  तुलसी से ... मान्यता है कि भगवान विष्णु और तुलसी का जिस जगह पर होते हैं, वहां कोई दुख और परेशानी नहीं आती। शालिग्राम की पूजा में तुलसी का महत्वत अहम है क्योंाकि बिना तुलसी के शालिग्राम की पूजा करने पर दोष लगता है। पराक्रमी असुर जलंधर का विवाह वृंदा से हुआ था , वृंदा भगवान विष्णु की भक्त थी। उसके पतिव्रत धर्म के कारण जलंधर अजेय हो गया था। उसने एक युद्ध में भगवान शिव को भी पराजित कर दिया। अपनी शक्ति के अभिमान में जलंधर देवताओं, अप्सकराओं को परेशान करने लगा। दु:खी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए और जलंधर के आतंक को समाप्त करने की प्रार्थना करने लगे। तब भगवान विष्णु जलंधर का रूप धारण कर छल से वृंदा का पतिव्रत धर्म नष्ट कर दिया। इससे जलंधर की शक्ति क्षीण हो गई और वह युद्ध में मारा गया। जब वृंदा को इस छल का पता चला, तो उसने विष्णु को पत्थर बन जाने का शाप दे दिया। देवताओं के अनुरोध करने पर वृंदा ने शाप वापस ले लिया। मगर, भगवान विष्णु ने पत्थंर में अपना एक रूप प्रकट किया, जिसे शालिग्राम कहा गया। भगवान विष्णु ने वृंदा को वरदान दिया कि अगले जन्म में तुम तुलसी ...

Republic Day of India | गणतंत्र दिवस | 26 जनवरी 2026

  🇮🇳 गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 Republic Day of India – स्वतंत्रता से संविधान तक की गौरवगाथा भारत का इतिहास केवल तिथियों और घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह त्याग, बलिदान, संघर्ष और आत्मसम्मान की अमर गाथा है। 26 जनवरी का दिन भारत के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ और हमारा देश पूर्ण रूप से गणतंत्र बना। गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह लोकतंत्र, समानता, न्याय और स्वतंत्रता के मूल्यों का उत्सव है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत की असली शक्ति उसके नागरिकों में निहित है। गणतंत्र दिवस का ऐतिहासिक महत्व भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली, लेकिन तब भी देश का शासन अस्थायी कानूनों के आधार पर चल रहा था। स्वतंत्र भारत को एक ऐसे संविधान की आवश्यकता थी जो देश की विविधता, संस्कृति और सामाजिक संरचना को समाहित कर सके। संविधान निर्माण डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने लगभग 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन की कड़ी मेहनत के बाद संविधान का निर्माण किया। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और देश ...