30 मई 2024

हिंदी पत्रकारिता दिवस | 30 मई, 1826 | Hindi Patrakarita Divas

 



🇮🇳✍️ #हिंदी_पत्रकारिता_दिवस  #Hindi_Journalism_Day है. आज से 198 साल पहले 30 मई, 1826 को कलकत्ता(कोलकाता) में #उदंत_मार्तण्ड नामक साप्ताहिक अखबार की शुरुआत हुई. #कानपुर से कलकत्ता में सक्रिय वकील #पंडित_जुगल_किशोर_शुक्ल ने इस अखबार की नींव रखी. वो हिंदुस्तानियों के हित में उनकी भाषा में अखबार निकालना चाहते थे.

🇮🇳✍️ उदंत मार्तण्ड का अर्थ होता है उगता सूरज. हिंदी पत्रकारिता का सूरज पहली बार #कलकत्ता के बड़ा बाजार के करीब 37, अमर तल्ला लेन, #कोलूटोला में उदित हुआ था. यह अखबार पाठकों तक हर मंगलवार पहुँचता था. इसकी शुरुआत 500 प्रतियों के साथ हुई थी.

🇮🇳✍️ उदंत मार्तण्ड खड़ी बोली और ब्रज भाषा के मिले-जुले रूप में छपता था और इसकी लिपि देवनागरी थी. लेकिन इसकी उम्र ज्यादा लंबी नहीं हो सकी. इसके केवल 79 अंक ही प्रकाशित हो सके.

🇮🇳✍️ प्रकाशन की शुरुआत के लगभग एक साल बाद ही हिंदी पत्रकारिता का पहला सूरज आर्थिक तंगी का शिकार होकर ओझल हो गया. 19 दिसंबर 1827 को उदन्त मार्तण्ड का आखिरी अंक प्रकाशित हुआ था.

🇮🇳✍️ अखबार के आखिरी अंक में संपादक और प्रकाशक जुगल किशोर शुक्ल ने अखबार के बंद होने की सूचना पाठकों बेहद मार्मिक अपील के साथ दी थी.

◆ उन्होंने लिखा, 'आज दिवस लौ उग चुक्यों मार्तण्ड उदंत. अस्ताचल को जाता है दिनकर दिन अब अंत.(अर्थात-यह सूर्य आज तक निकल चुका है. अब इसका अंत आ गया है और यह सूर्यास्त की ओर बढ़ चला है.) ◆

🇮🇳✍️ उदन्त मार्तण्ड से पहले भारत में अंग्रेजी, उर्दू, फारसी और बांग्ला आदि भाषाओं के अखबार प्रकाशित होने लगे थे. अखबार के पहले अंक में ही संपादक शुक्ल ने अखबार का उद्देश्य स्पष्ट कर दिया था कि यह हिंदुस्तानियों के लिए उनकी भाषा में उनके हित का अखबार है.

🇮🇳✍️ उन्होंने लिखा, "यह उदन्त मार्तण्ड अब पहले पहल हिंदुस्तानियों के हेत जो, आज तक किसी ने नहीं चलाया पर अंग्रेजी ओ पारसी और बंगाल में जो समाचार का कागज छपता है उनका उन बोलियों को जानने और समझने वालों को ही होता है.

और सब लोग पराए सुख सुखी होती हैं. जैसे पराए धन धनी होना और अपनी रहते पराई ऑंख देखना वैसे ही जिस गुण में उसकी पैठ न हो उसको उसके रस का मिलना कठिन ही है और हिंदुस्तानियों में बहुतेरे ऐसे हैं."

🇮🇳✍️ उदंत मार्तण्ड ने अपने छोटे से प्रकाशन काल में हमेशा ही समाज के विरोधाभाषों पर तीखे हमले किये और गंभीर सवाल उठाये. इसके साथ ही आम जन की आवाज को बुलंद करने का भी काम भी इस अखबार ने बखूबी किया. 19 दिसंबर,1827 को कुछ कानूनी कारणों और ग्राहकों का सहयोग न मिल पाने के कारण इसे बंद करना पड़ा.

🇮🇳✍️ हिंदी भाषी पट्टी से दूर रहने और मौजूदा सरकार द्वारा इसे उत्तर भारत के शहरों में भेजने के लिए डाक टिकट में छूट नहीं देना इसके बंद होने की अहम वजह रहा. बंगाल से प्रकाशित होने के कारण उसके लिए स्थानीय स्तर पर ग्राहक या पाठक मिलना अंग्रेजी, उर्दू, फारसी और बांग्ला अखबारों की तुलना में मुश्किल था. अगर पाठक मिल भी जाता तो उसतक अखबार को पहुंचा पाना बेहद कठिन काम था. सरकार के किसी भी विभाग को उदंत मार्तण्ड की एक भी प्रति खरीदना मंजूर नहीं था.

साभार: zeenews.india.com

🇮🇳 सभी राष्ट्रवादी पत्रकार बंधुओं को #हिंदी_पत्रकारिता_दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ !

🇮🇳🌹🙏

#Hindi_speaking, #governmen, #Hindi_Paper, #Udant_Martand, #publication


साभार: चन्द्र कांत  (Chandra Kant) राष्ट्रीय उपाध्यक्ष - मातृभूमि सेवा संस्था 

सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you. 

27 मई 2024

What right did Israel do by breaking relations with Norway, Spain and Ireland? इजराइल ने नॉर्वे, स्पेन, आयरलैंड से रिश्ता तोड़ कर क्या सही किया ?

 



नॉर्वे, स्पेन, आयरलैंड से  इजराइल ने कूटनीतिक रिश्ता तोड़ कर क्या सही किया ?

और क्या इन तीन देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता देकर क्या गलत किया?

21 मई को #नॉर्वे #स्पेन और #आयरलैंड ने #फिलिस्तीन को मान्यता देने का फैसला किया जिसके विरोध में #इज़रायल ने तीनों देशों से अपने #राजदूत वापस बुलाकर कूटनीतिक रिश्ते समाप्त कर दिए - इन देशों को मान्यता देने के फैसले का हमास और #OIC ने #स्वागत किया, फिलिस्तीन 57 देशों के समूह #OIC सदस्य है जो #UN का सदस्य नहीं है बल्कि उसके पास 2012 से केवल #Non - #Member #Observer का #status है -

मेरे विचार से इज़रायल ने अपने राजदूतों को बुला कर सही कदम नहीं उठाया क्योंकि 50 देशों की यूरोपियन यूनियन के एक तिहाई सदस्य फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके है और विश्व के 193 में से अब इन तीनो को मिला कर 146 देश मान्यता दे चुके हैं - भारत तो मान्यता देने वाला पहला देश था - अब इतने मान्यता देने वाले देशों में बहुत के साथ इज़रायल के कूटनीतिक रिश्ते होंगे, फिर इन तीन से संबंध तोड़ने का क्या औचित्य है - 


अभी #Belgium, #Malta and #Slovenia भी #फिलिस्तीन को मान्यता देने पर विचार कर रहे हैं, इस बीच 11 मई को UN की जनरल असेंबली में प्रस्ताव पारित कर #UNSC से कहा गया था कि फिलिस्तीन को सदस्य देश के रूप में #UN में शामिल किया जाए - इस प्रस्ताव के विरोध में केवल 9 वोट पड़े जबकि बाकी सभी 184 देशों ने समर्थन किया - विरोध करने वाले 9 देश थे,  #US, #Argentina, the #Czech_Republic, #Hungary, #Israel, #Micronesia, #Nauru, #Palau and #Papua_New_Guinea. 


#UNSC को इसलिए अनुमोदन किया गया क्योंकि वह ही किसी राष्ट्र को सदस्य का दर्जा देने के लिए सक्षम है - हालांकि UN ने स्वयं अभी तक फिलिस्तीन को सदस्य नहीं बनाया है और 1974 से केवल #PLO को #Observer का #Status दिया था - 

मुझे आशा नहीं है कि #फिलिस्तीन को #UNSC भी सदस्य बनाएगा क्योंकि वहां #अमेरिका का #VETO हो सकता है -


फिलिस्तीन 2007 में #गाज़ा से अपना कंट्रोल #हमास के हाथों गवां चुका था लेकिन आज भी विश्व भर में फिलिस्तीन और हमास को एक ही माना जाता है - आतंकी संगठन होने की वजह से कोई “हमास” का खुलकर समर्थन नहीं कर सकता और उसकी आड़ में फिलिस्तीन को समर्थन दिया जाता है - 


#नॉर्वे, #स्पेन और #आयरलैंड में #मुस्लिम विरोधी #आंदोलन चरम पर रहते हैं - नॉर्वे में  55 लाख की आबादी में 3.3% मुस्लिम हैं; स्पेन में 4.7 करोड़ में 5.32% हैं और आयरलैंड में 5 करोड़ में 1.62% हैं - मान्यता देने के बाद और बढ़ सकते है - आयरलैंड के करीब ब्रिटेन पहले ही इस्लामोफोबिया से जूझ रहा है - इतना ही नहीं #यूरोप के कई देश #इस्लामिक ताकतों से परेशान है जिनमे #फ्रांस, #जर्मनी, #बुल्गारिया, #स्वीडन, #डेनमार्क, #थाईलैंड के अलावा नॉर्वे और जर्मनी भी शामिल हैं -


जो वातावरण #ईरान, #हमास, #हूती और #हिज़्बुल्लाह के बीच चल रहा है, उसे देख कर लगता है ये युद्ध #इस्लाम और #ईसाई / #यहूदी #गठजोड़ के बीच बड़े स्तर का #युद्ध होकर रहेगा - सभी #इस्लामिक देशों के निशाने पर #इज़रायल रहेगा - 


 लेखक : सुभाष चन्द्र  | मैं हूं मोदी का परिवार | “मैं वंशज श्री राम का” 27/05/2024 

#Europe, #Islamic #forces, #France, #Germany, #Bulgaria, #Sweden, #Denmark, #Thailand,#Norway, #Germany, #Iran, #Hamas, #Houthi, #Hezbollah, #war #Islam,#Christian,#Jewish #alliance,#israel, #target,#Islamic_countries #MODI, #election2024,  #ED,  #cbi #CAA #NRC #India_Vs_West, #US_responds_CAA, #religious, #freedom, #India, #Kejriwal,  #judiciary, #aap,  #Muslims, #implemented_CAA,


सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you. 

05 मई 2024

मोहंती का नाम वापस, पात्रा को फैदा

ओडिशा के पुरी से कांग्रेस उम्मीदवार ने कांग्रेस पार्टी से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलने का हवाला देते हुए खुद को चुनाव से हटा लिया है।

पुरी, ओडिशा के अपने राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण विकास तब सामने आया जब कांग्रेस उम्मीदवार सुचरिता मोहंती ने आगामी चुनाव से उम्मीदवार वापसी का साहसिक निर्णय लिया। देखने में आया कि सुचरिता मोहंती को दौड़ में एक मजबूत दावेदार माना जा रहा था, नाम वापस लेने के लिए कई लोग आश्चर्य की बात कर रहे थे। हालाँकि, दिनांक को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, सुचरिता मोहंती ने अपने फैसले के पीछे ठोस कारण का खुलासा किया- कांग्रेस पार्टी से समर्थन की कमी।

सुचरिता मोहंती ने पार्टी की विफलता पर असंतोषजनक स्थिति में अपना अभियान अभियान जारी रखा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लचीलेपन के लिए यात्रा, प्रचार और जनशक्ति सहित साम्य व्यय की आवश्यकता है, और वित्तीय सहायता की आवश्यकता के बिना, उनके लिए एक प्रभावी अभियान अप्रभावी होगा।

ओडिशा के पुरी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार ओडिशा के पुरी से कांग्रेस उम्मीदवार ने कांग्रेस पार्टी से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलने का हवाला देते हुए खुद को चुनाव से हटा लिया है।

पुरी, ओडिशा के अपने राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण विकास तब सामने आया जब कांग्रेस उम्मीदवार सुचरिता मोहंती ने आगामी चुनाव से उम्मीदवार वापसी का साहसिक निर्णय लिया। देखने में आया कि सुचरिता मोहंती को दौड़ में एक मजबूत दावेदार माना जा रहा था, नाम वापस लेने के लिए कई लोग आश्चर्य की बात कर रहे थे। हालाँकि, दिनांक को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, सुचरिता मोहंती ने अपने फैसले के पीछे ठोस कारण का खुलासा किया- कांग्रेस पार्टी से समर्थन की कमी।

सुचरिता मोहंती ने पार्टी की विफलता पर असंतोषजनक स्थिति में अपना अभियान अभियान जारी रखा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लचीलेपन के लिए यात्रा, प्रचार और जनशक्ति सहित साम्य व्यय की आवश्यकता है, और वित्तीय सहायता की आवश्यकता के बिना, उनके लिए एक प्रभावी अभियान अप्रभावी होगा।

ओडिशा के पुरी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार सुचरिता मोहंती की वापसी ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ी हलचल पैदा कर दी है। इस घटना से ओडिशा में कांग्रेस पार्टी के वित्तीय सलाहकारों और वित्तीय स्तर को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं।

मोहंती का नाम वापस लेने के पहले एक अन्य कांग्रेस उम्मीदवार ने भी नामांकन के बाद अपना नाम वापस ले लिया था। एक के बाद एक ऐसी घटना  ने कांग्रेस पार्टी के कलह और आंतरिक सलाहकार की नाकामयाबी और बेकार नेतृत्व को उजागर किया है. 

कुछ का अनुमान है कि पार्टी के अंदर एकता और दिशा की कमी है। उनका तर्क है कि एक ठोस रणनीति और मजबूत नेतृत्व की कमी के कारण पार्टी  पिछड़ रहा है। कुछ का  दावा है कि पार्टी अब लुप्त होने की कगार पे है ।

कारण जो भी हो, कांग्रेस गठबंधन का नाम वापस लेने से ओडिशा में पार्टी का असर पड़ना तय है। राज्य में पारंपरिक रूप से कांग्रेस पार्टी का स्थान रहा है और हाल की घटनाओं में इसके समर्थन आधार को बनाए रखने की क्षमता पर सवाल उठाए गए हैं।

कांग्रेस  को ओडिशा में कड़ी लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है और पुरी सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई है। यह देखना बाकी है कि पार्टी क्या करेगी और वह इस तरह के हालात को देखते  हुए यह सवाल उठता है क्या वह कभी भी कोई भी चुनाव लड़ भी सकती है, जीतना तो दूर की बात ।

सुचरिता मोहंती के कदम  से राजनीति में उनकी भूमिका पर बहस छूट गई। आलोचकों का तर्क है कि चुनाव में धन के बढ़ते प्रभाव से जनता प्रभावित होती है, जहां मजबूत पैसे वाले को अक्सर अनुचित लाभ मिलता है। वे समान स्तर पर साक्ष्यों का उपयोग करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी को सफलता का अवसर मिले।

यह एक अज्ञात रूप से सामने आने वाली झलक की याद दिलाती है जिसमें वित्तीय सहायता की कमी के लिए प्रभावशाली अभियान चलाया गया है। यह राजनीति में पैसे के व्यापक निहितार्थ और अधिक न्यायसंगत और लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली में सुधार की आवश्यकता के बारे में भी प्रश्न उठाता है।

अब फैदा प्रतिस्पर्धी पात्रा को देखने को मिल रहा है, जो पिछले चुनाव में महज़ पांच हजार के मामूली अंतर से हार गए थे। मोहंती की वापसी, इसी तरह से कांग्रेस उमीदवारो का पीछे हटना, उनका ये मान लेना कि हारना तय है , पैसा, समय और मेहनत न जाया किया जाये, और साथ में भ ज प के बढ़ते कदम को देखते हुए, ४०० पार का उसका नारा आसान दिखने लगा है। 

26 अप्रैल 2024

Congress wants America's law | कांग्रेस अमेरिका का कानून चाहती है तो पहले भारत में अमेरिका की तरह चुनाव भी शुरू करना चाहिए - लेखक : सुभाष चन्द्र




Congress wants America's law So first in India like in America Elections should also be started -

कांग्रेस अमेरिका का कानून चाहती है तो पहले भारत में अमेरिका की तरह चुनाव भी शुरू करना चाहिए -

जातिवादी और मुस्लिमों वोट बैंक पर प्रधानमंत्री के “सीधे चुनाव” से लगाम लगेगी -

भारत के विकास के लिए मेरा दूसरा  “रामबाण” उपाय -

कांग्रेस ने जो सांप्रदायिक एजेंडा छेड़ा है कथिक धनवानों की संपत्ति को गरीबों (मुस्लिमों) में बांटने का और शरीया कानून लागू करने का, वह काम संविधान को ख़त्म किए बिना नहीं किया जा सकता क्योंकि भारत का संविधान विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका को स्वतंत्र अधिकार देता है और कांग्रेस यदि शरीया लागू करती है तो उसका मतलब है न्यायपालिका को तिलांजलि दे दी जाएगी -


जबकि कांग्रेस और उसके विपक्षी साथी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लोकतंत्र और संविधान को नष्ट करने का आरोप लगा रहे हैं और कह रहे है कि मोदी को हराना है लोकतंत्र और संविधान बचाने के लिए जबकि ये खुद चाहते हैं कि संविधान और लोकतंत्र को ध्वस्त कर दिया जाए -


कांग्रेस अमेरिकी system थोप कर भारत में लूट शुरू करना चाहती है जिससे गृह युद्ध छिड़ जाए और वह संपत्ति को बांटने का काम भी बिना संविधान को पलटे नहीं हो सकता - 


अब अगर कांग्रेस अमेरिकी सामाजिक system लाना चाहती है तो पहले वहां का Political System भारत में लागू करना चाहिए जिसके बिना संविधान को कांग्रेस के संपत्ति बंटवारे की योजना अमल में लाने के लिए नहीं बदला जा सकता -


आज भारत के राजनीतिक system में हर चुनाव में caste based voting और मुस्लिमों की वोटिंग पर ही सारा दारोमदार रहता है - जिससे देश में बहुत समय तक राजनीतिक अस्थिरता रही है और देश का वह विकास नहीं हो सका जो होना चाहिए था -


इसलिए देश के समग्र विकास के लिए अमेरिकी Political system अपना लेना चाहिए और राष्ट्रपति पद का Direct Election किया जाना चाहिए अमेरिका की तरह - इस व्यवस्था से कश्मीर से कन्याकुमारी तक मुस्लिमों, ईसाइयों और जातिगत आधारित वोटरों की कीमत एक जैसी होगी और कोई दल कम से कम राष्ट्रपति के चुनाव में ऐसे वोटरों से चुनाव को एकतरफा नहीं मोड़ सकेगा जैसा आज कर लेते हैं - मुस्लिम वोटर 543 में से करीब 100 सीट पर अपना जलवा दिखा कर चुनाव का सारा रुख बदल सकते हैं - 


मुस्लिमों की जनसंख्या इस तरह देश के हिस्सों में फैलाई गई है जो चुनावों को प्रभावित कर सकती है - आप ऐसी सीटों को देख सकते हैं जहां यह होता आया है -


यह देश के सही मायने में विकास के अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है और अब समय आ गया है कि इस पर राष्ट्रव्यापी बहस शुरू की जाए और 2029 में चुनाव “राष्ट्रपति” पद के लिए सीधे कराए जाएं - यह मेरा भारत के विकास के लिए दूसरा “रामबाण उपाय” है - पहले में मैंने कहा था कि कोई भी धार्मिक समूह की यदि आबादी 5% से कम है, तब ही उसे “Minority” का दर्जा मिलना चाहिए, किसी भी “Religious Community” को 5% से ज्यादा जनसंख्या होने पर कोई “Minority Rights” नहीं मिलेंगे -


कांग्रेस यदि संपत्ति बंटवारे के लिए अमेरिकी व्यवस्था चाहती है तो पहले राजनीतिक व्यवस्था भी अमेरिकी लाने के लिए हामी भरे - चुनाव आयोग को कांग्रेस का “सांप्रदायिक घोषणापत्र” असंवैधानिक घोषित कर कांग्रेस के उम्मीदवारों को चुनाव से हटा देना चाहिए - 

"लेखक के निजी विचार हैं "

 लेखक : सुभाष चन्द्र  | मैं हूं मोदी का परिवार | “मैं वंशज श्री राम का” 26/04/2024 

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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

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23 अप्रैल 2024

Modi ji and Amit Shah ji Decide a Minority | मोदी जी और अमित शाह जी कोई कौम कितने प्रतिशत पर Minority है तय कर दो - लेखक : सुभाष चन्द्र




मोदी जी और अमित शाह जी मुस्लिमों के तुष्टिकरण को दूर करने का 

और विकसित भारत के लिए एक रामबाण उपाय -

संविधान से भी छेड़छाड़ नहीं होगी - कोई कौम कितने प्रतिशत पर  Minority है तय कर दो -

देश की आज़ादी के पहले से ही मुस्लिमों के अल्पसंख्यक होने का लाभ उठा कर गैर भाजपा दल उनके ही तुष्टिकरण में लगे रहे हैं - कांग्रेस ने मुस्लिमों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसे ऐसे कानून बना दिए जिनकी वजह से आज मुस्लिम समुदाय हिंदू बहुल समुदाय को रौंदने से परहेज़ नहीं करता और सभी सेकुलर दल 80% हिंदुओं को गाजर मूली की तरह काटने को तैयार रहते हैं 


कांग्रेस ने समय समय पर जो कानून बनाए मुस्लिमों के लिए, वे ये हैं -


Article 25, 28, 30 (1950)

HRCE (1951)

HCB MPL (1956)

Secularism (1975)

Minority Act (1992)

Places of worship Act (1991)

Wolf Act (1992)

Ram Setu affidavit (2007)

Saffron terrorism (2009)


ऐसा इसलिए किया जाता रहा है क्योंकि देश में आज तक यह तय नहीं किया गया है कि कौन सी कौम कितनी प्रतिशत आबादी होने पर Minority मानी जाएगी - आज मुस्लिम समुदाय 100 के करीब लोकसभा सीटों के चुनाव को प्रभावित कर सकता है, भला फिर ऐसा समुदाय Minority कैसे माना जा सकता है -


2011 की जनगणना के अनुसार देश में हिंदू और अन्य समुदायों की आबादी यह थी -


-हिंदू - (80%)

-मुस्लिम - (14.2%)

-ईसाई -(2.3%)

-सिख -(1.72%)

-बौद्ध - (0.7%)

-सरना (0.41%)

-जैन -(0.37%)

-गोंड धर्म - (0.08%)

-पारसी - (0.006%)

-अन्य धर्म - (0.16%)

-किसी को न मानने वाले -(0.24%)


वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिमों की आबादी 17.22 करोड़ थी जो सरकार के अनुसार 2023 में 19.7 करोड़ हो गई -


वर्ष 2020-21 की MoSPI (Ministry of Statistics and Program Implementation, Government Of India.) की रिपोर्ट में बताया गया था कि 94.9% मुस्लिमों के अनुसार उन्हें बेहतर पीने के पानी की सुविधा मिली और 97.2% मुस्लिमों के अनुसार उन्हें बेहतर Toilet Facilities मिली - इसके अलावा 50.2% मुस्लिमों ने 31 मार्च, 2014 के बाद नए घर खरीदे या बनाए - यह तथ्य 2021 तक के हैं और उसके बाद  उनके लिए और भी बेहतर हुआ होगा -


लेकिन फिर भी हर समय एक ही रोना कि हमारा अल्पसंख्यक होने की वजह से शोषण हो रहा है जबकि उपरोक्त सूचना से साबित होता है कि मोदी राज में मुस्लिमों का जीवन स्तर हर तरह से बेहतर हुआ है -


हर देश को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार देश और समाज हित में कानून बनाने का अधिकार होता है - कांग्रेस 2005 से संसाधनों पर मुस्लिमों का पहला हक़ बताती आई है जो बहुसंख्यक और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ अनाचार है -


इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध है कि वे अपने अगले कार्यकाल में यानी Modi 03 में संसद से कानून पास करा कर तय करें कि किसी समुदाय को तब ही अल्पसंख्यक (Minority)  का दर्जा मिलेगा जब उसकी आबादी 5% से कम होगी - 5% से ज्यादा आबादी होने पर Minorities को मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिलेंगी -


इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में जरूर चुनौती दी जाएगी और अगर अदालत इसके खिलाफ फैसला देती है तो संसद से उस फैसले को भी निरस्त कराया जाए - 


यह कानून Minority-ism से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर देगा बिना संविधान में कोई छेड़छाड़ किए हुए - इस पर नई सरकार बनने के तुरंत बाद कार्य शुरू होना चाहिए, जिससे देश के करोड़ों रुपए बचेंगे जो देश के विकास में काम आएंगे -

"लेखक के निजी विचार हैं "

 लेखक : सुभाष चन्द्र  | मैं हूं मोदी का परिवार | “मैं वंशज श्री राम का” 22/04/2024 

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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you. 


Modi's Work Guarantee “Counter Guarantee” of Voters | मोदी की काम की गारंटी पर वोटरों की “Counter Guarantee”- लेखक : सुभाष चन्द्र




मोदी की काम की गारंटी पर वोटरों की “Counter Guarantee”

भी होती है जो मोदी के काम की परवाह न करने की “गारंटी” होती है -

इसमें तो कोई दो राय नहीं हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने जो कहा वह किया और जो देशहित में था वह भी हर हाल में किया चाहे वह संकल्प पत्र में था या नहीं - मोदी ने जो किया 10 साल में वह गिनना कठिन है उसकी सूची बहुत बड़ी है - सबसे बड़ी चीज तो यह हुई है कि भारत आज काफी हद तक आज एक आत्मनिर्भर देश बन चुका है हर व्यक्ति को हर सुविधा मिल रही है और इन सब कामों को पूरा करने की वजह से ही मोदी अपने हर काम की गारंटी देते हैं - 


बहुत से लोग खासकर विपक्ष के यह कहते नहीं थकते कि राम मंदिर तो कोर्ट के फैसले की वजह से बना है, उसमें मोदी का क्या योगदान है लेकिन सत्य यह है कि वह फैसला आने के समय यदि कांग्रेस की सरकार होती तो वह उस फैसले को संसद में प्रस्ताव लेकर पलट देती और राम मंदिर बनने ही नहीं देती -


पहले चरण में जिस तरह कई राज्यों में कम मतदान हुआ है वह कुछ चिंता का भी विषय है - उत्तरप्रदेश में मात्र 60%, पूर्वोत्तर के नागालैंड में केवल 57% और मिजोरम में मात्र 54% ताज्जुब की बात है क्योंकि पूर्वोत्तर के राज्यों में तो अधिकतम विकास हुआ है - बिहार तो सबसे महान रहा जहां केवल 48% जागे थे, लगता है बिहार के लोगों को फिर जंगल राज चाहिए - और तो और लक्षदीप में 59% वोट पड़े जहां 97% मुस्लिम आबादी है, उत्तराखंड ने  54% से गज़ब कर बाबा केदार नाथ को प्रणाम किया और राजस्थान 57% से अव्वल रहा -


दरअसल हिंदू वोटर तो मोदी से हर सुविधा चाहता है, बढ़िया सड़कें चाहिए, बढ़िया ट्रेन में सफर करेगा, साफ़ सुथरे रेलवे स्टेशन देख कर खुश होगा, राम मंदिर भी देख कर खुश होगा, मोबाइल का डाटा फ्री चाहिए, महंगाई कम चाहिए और हर काम उसकी मर्जी से - लेकिन वोट न देने की गारंटी भी बहुत बड़ा तबका देता है मोदी को कि हमें जो मर्जी दे दो, चाहे दंगामुक्त राज्य बना दो या आतंकी हमलों से मुक्त रहे हम लेकिन फिर भी हम वोट देने जाने की “गारंटी” नहीं देंगे -


इन हिंदू वोटरों की “गारंटी” के जवाब में मुस्लिम वोटरों की भी “गारंटी” होती है और उसी “गारंटी” की वजह से कांग्रेस और तमाम विपक्षी दल 85 करोड़ से ज्यादा हिंदू वोटरों को छोड़ कर 10 से 12 करोड़ मुस्लिम वोटरों के लिए पागल रहते हैं - मुस्लिम वोटर का आचरण साफ़ कहता है कि मोदी जी, आपसे  हमें “सबका विश्वास” के नाम पर सब कुछ मिल रहा है लेकिन हम उस “विश्वास” को तोड़ने के लिए मजबूर हैं और हम आपको “वोट न देने की ही गारंटी” दे सकते हैं -


सबसे घटिया रोल मुस्लिम महिला वोटर का है जिन्हे आज रात के अंधेरे में ट्रिपल तलाक की वजह से घर से बेघर होने के भय से मुक्त कर दिया मोदी ने, उन्हें मोदी ने फ्री गैस चूल्हा दिया, नल से जल दिया, फ्री राशन दिया, बच्चे की डिलीवरी के लिए 6000 रुपए दिए, फ्री में पक्के घर दिए और गरीब को (जो 90% हैं) 5 लाख का फ्री इलाज दिया लेकिन ये सब फिर भी लाइन लगा कर वोट देने वालों की लाइन में लगते हैं और मोदी को वोट न देने की और मोदी को हराने की “गारंटी” देते हैं - 


सबसे घृणित कार्य मुस्लिम महिलाएं करती हैं, जिन्हे ट्रिपल तलाक से मुक्ति दिलाने का भी कुछ सुख का अहसास नहीं होता - इतनी अहसानफरामोशी तो  खुदा भी माफ़ नहीं करेगा - एक 7 बच्चों की माँ किसी पत्रकार को कह रही थी कि राहुल गांधी को आना चाहिए, वो कुछ करना चाहता है (जबकि कांग्रेस 3 तलाक फिर शुरू करने का वादा कर रही है) - पत्रकार ने पूछा आपके कितने बच्चे हैं तो उसने कहा 7 हैं - तो गरीबी नहीं महसूस होती - इसका जवाब देती है कि बच्चे तो अल्लाह की देन हैं - फिर गरीबी कैसे आती है तो कहती है, गरीबी मोदी ने दी है, अगर यह हालत है को मोदी की “गारंटी” के क्या मायने रह गए -


"लेखक के निजी विचार हैं "

 लेखक : सुभाष चन्द्र  | मैं हूं मोदी का परिवार | “मैं वंशज श्री राम का” 21/04/2024 

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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you. 


Hanuman Jayanti | जय श्री राम हनुमान जन्मोत्सव

 



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हनुमान जन्मोत्सव एक हिंदू त्योहार है जो हिंदू देवता और रामायण के नायक हनुमान के जन्मोत्सव  को मनाता है। हनुमान जन्मोत्सव का उत्सव भारत के प्रत्येक राज्य में समय और परंपरा के अनुसार अलग-अलग होता है। भारत के अधिकांश उत्तरी राज्यों में, हिंदू पंचांग के अनुसार, हनुमान जन्मोत्सव चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता  है।

जयंती और जन्मोत्सव का अर्थ भले ही जन्मदिन से होता है। लेकिन जयंती का प्रयोग ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है, जो संसार में जीवित नहीं है और किसी विशेष तिथि में उसका जन्मदिन है। लेकिन जब बात हो भगवान हनुमान की तो इन्हें कलयुग संसार का जीवित या जागृत देवता माना गया  हैं।

बजरंगबली को लड्डू, पंचमेवा, जलेबी या इमरती और बूंदी भोग के रूप में अर्पित कर सकते हैं। कहते हैं कि ये चीजें उन्हें अति प्रिय है। वहीं इसके अलावा आप बजरंगबली को गुड़-चने और पान का बीड़ा भी अर्पित कर सकते हैं।

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