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Congress wants America's law | कांग्रेस अमेरिका का कानून चाहती है तो पहले भारत में अमेरिका की तरह चुनाव भी शुरू करना चाहिए - लेखक : सुभाष चन्द्र




Congress wants America's law So first in India like in America Elections should also be started -

कांग्रेस अमेरिका का कानून चाहती है तो पहले भारत में अमेरिका की तरह चुनाव भी शुरू करना चाहिए -

जातिवादी और मुस्लिमों वोट बैंक पर प्रधानमंत्री के “सीधे चुनाव” से लगाम लगेगी -

भारत के विकास के लिए मेरा दूसरा  “रामबाण” उपाय -

कांग्रेस ने जो सांप्रदायिक एजेंडा छेड़ा है कथिक धनवानों की संपत्ति को गरीबों (मुस्लिमों) में बांटने का और शरीया कानून लागू करने का, वह काम संविधान को ख़त्म किए बिना नहीं किया जा सकता क्योंकि भारत का संविधान विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका को स्वतंत्र अधिकार देता है और कांग्रेस यदि शरीया लागू करती है तो उसका मतलब है न्यायपालिका को तिलांजलि दे दी जाएगी -


जबकि कांग्रेस और उसके विपक्षी साथी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लोकतंत्र और संविधान को नष्ट करने का आरोप लगा रहे हैं और कह रहे है कि मोदी को हराना है लोकतंत्र और संविधान बचाने के लिए जबकि ये खुद चाहते हैं कि संविधान और लोकतंत्र को ध्वस्त कर दिया जाए -


कांग्रेस अमेरिकी system थोप कर भारत में लूट शुरू करना चाहती है जिससे गृह युद्ध छिड़ जाए और वह संपत्ति को बांटने का काम भी बिना संविधान को पलटे नहीं हो सकता - 


अब अगर कांग्रेस अमेरिकी सामाजिक system लाना चाहती है तो पहले वहां का Political System भारत में लागू करना चाहिए जिसके बिना संविधान को कांग्रेस के संपत्ति बंटवारे की योजना अमल में लाने के लिए नहीं बदला जा सकता -


आज भारत के राजनीतिक system में हर चुनाव में caste based voting और मुस्लिमों की वोटिंग पर ही सारा दारोमदार रहता है - जिससे देश में बहुत समय तक राजनीतिक अस्थिरता रही है और देश का वह विकास नहीं हो सका जो होना चाहिए था -


इसलिए देश के समग्र विकास के लिए अमेरिकी Political system अपना लेना चाहिए और राष्ट्रपति पद का Direct Election किया जाना चाहिए अमेरिका की तरह - इस व्यवस्था से कश्मीर से कन्याकुमारी तक मुस्लिमों, ईसाइयों और जातिगत आधारित वोटरों की कीमत एक जैसी होगी और कोई दल कम से कम राष्ट्रपति के चुनाव में ऐसे वोटरों से चुनाव को एकतरफा नहीं मोड़ सकेगा जैसा आज कर लेते हैं - मुस्लिम वोटर 543 में से करीब 100 सीट पर अपना जलवा दिखा कर चुनाव का सारा रुख बदल सकते हैं - 


मुस्लिमों की जनसंख्या इस तरह देश के हिस्सों में फैलाई गई है जो चुनावों को प्रभावित कर सकती है - आप ऐसी सीटों को देख सकते हैं जहां यह होता आया है -


यह देश के सही मायने में विकास के अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है और अब समय आ गया है कि इस पर राष्ट्रव्यापी बहस शुरू की जाए और 2029 में चुनाव “राष्ट्रपति” पद के लिए सीधे कराए जाएं - यह मेरा भारत के विकास के लिए दूसरा “रामबाण उपाय” है - पहले में मैंने कहा था कि कोई भी धार्मिक समूह की यदि आबादी 5% से कम है, तब ही उसे “Minority” का दर्जा मिलना चाहिए, किसी भी “Religious Community” को 5% से ज्यादा जनसंख्या होने पर कोई “Minority Rights” नहीं मिलेंगे -


कांग्रेस यदि संपत्ति बंटवारे के लिए अमेरिकी व्यवस्था चाहती है तो पहले राजनीतिक व्यवस्था भी अमेरिकी लाने के लिए हामी भरे - चुनाव आयोग को कांग्रेस का “सांप्रदायिक घोषणापत्र” असंवैधानिक घोषित कर कांग्रेस के उम्मीदवारों को चुनाव से हटा देना चाहिए - 

"लेखक के निजी विचार हैं "

 लेखक : सुभाष चन्द्र  | मैं हूं मोदी का परिवार | “मैं वंशज श्री राम का” 26/04/2024 

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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

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