प्रेरणादायी व्यक्तित्व सुभद्रा कुमारी चौहान | Inspirational Personality Subhadra Kumari Chauhan
🇮🇳 प्रेरणादायी व्यक्तित्व सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम आते ही दिमाग में ‘झाँसी की रानी’ कौंध जाती है, क्योंकि उनकी यह रचना काफी प्रसिद्ध है। लेकिन #कवयित्री सुभद्रा केवल यहीं तक सीमित नहीं थीं इससे कहीं आगे थीं। नाग पंचमी को जन्मी कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी विविध रचनाओं से लोगों को अब तक बाँध रखा है। उनका निधन बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा के दिन 15 फरवरी 1948 को हुआ था। आज उनकी पुण्यतिथि है।
🇮🇳 मात्र नौ साल की उम्र में उन्होंने पहली कविता ‘नीम’ की रचना की थी। इस कविता को पत्रिका ‘मर्यादा’ में जगह दी गई। इसके साथ ही वे पूरे स्कूल में मशहूर हो गईं। मजबूरीवश वे केवल नौवीं कक्षा तक की पढ़ाई ही पूरी कर पाई। लेकिन अपनी कविताओं का शौक नहीं छोड़ा और लिखती गई। कवयित्री सुभद्रा की रचनाओं में कहीं यह झलक या अभाव नहीं खलता कि उन्होंने दसवीं तक भी अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की।
🇮🇳 16 अगस्त 1904 में #इलाहाबाद के #निहालपुर में जमींदार परिवार में जन्मी सुभद्रा को बचपन से ही कविताऍं लिखने का शौक था। इसके कारण वे अपने स्कूल में भी बड़ी प्रसिद्ध थीं। बाद में उन्होंने कहानियाँ लिखना भी शुरू कर दिया, यह उन्होंने पारिश्रमिक के लिए किया क्योंकि उस वक्त कविताओं की रचना के लिए पैसे नहीं मिलते थे।
🇮🇳 चार बहनें और दो भाइयों वाली सुभद्रा ने #स्वतंत्रता_आंदोलन में आगे आई और कई बार जेल भी गई। मध्यप्रदेश के #खंडवा निवासी #ठाकुर_लक्ष्मण_सिंह से शादी के बंधन में बँधी और यहाँ भी उनके रुचि का ही काम नजर आया। पति लक्ष्मण सिंह पहले से ही स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल थे। दोनों ही महात्मा गॉंधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। सुभद्रा की कई रचनाओं में आजादी का उन्माद और वीर रस का सान्निध्य मिलता है।
🇮🇳 जन्म #नागपंचमी और मृत्यु #बसंतपंचमी, सोचिए ये तिथियाँ यूँ ही इतनी विशेष नहीं हैं और न ही इसे मात्र संयोग कहा जा सकता है। विशेष इसलिए क्योंकि दोनों ही तारीख पंचमी की थी। इसके पीछे ईश्वर का संकेत स्पष्ट था कि जो धरा पर अनमोल होते हैं उनके लिए ऊपरवाला भी इंतजार करता है, और तभी ऐसे तारीखों का मेल होता है। 15 फरवरी 1948 को सुभद्रा ईश्वर की प्यारी हो गई। उनका जन्म 16 अगस्त 1904 नागपंचमी के दिन #इलाहाबाद के निकट #निहालपुर नामक गाँव में #रामनाथसिंह के जमींदार परिवार में हुआ था।
🇮🇳 सुभद्रा की दो कविता संग्रह और तीन कथा संग्रह प्रकाशित हुए। उनकी कविता संग्रहों के नाम #‘मुकुल’ और #‘त्रिधारा’ हैं और कहानी संग्रह- पंद्रह कहानियों वाली बिखरे मोती-1932 व 1934 में प्रकाशित 9 कहानियों वाली उन्मादिनी 1947 में प्रकाशित 14 कहानियों वाली सीधे साधे चित्र हैं। कुल मिलाकर उन्होंने 46 कहानियाँ लिखीं। उस वक्त लड़कियों के साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता है। नारी के उस मानसिक दर्द को भी #सुभद्रा ने अपनी रचनाओं में उतारा है।
🇮🇳 सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन के तरह ही उनका साहित्य भी सरल और स्पष्ट है। इनकी रचनाओं में राष्ट्रीय आंदोलन, स्त्रियों की स्वाधीनता, जातियों का उत्थान आदि समाहित है। कुल मिलाकर सुभद्रा का राष्ट्रीय काव्य हिंदी में बेजोड़ स्थान रखता है। अपनी रचनाओं के जरिए उन्होंने एक बहन, एक माँ व एक पत्नी समेत सच्ची राष्ट्र भक्त के भाव व्यक्त किए हैं।
🇮🇳 उनकी रचना ‘बिखरे मोती’ के पहले पेज पर किया गया निवेदन दिल को छू लेने वाला है। पढ़ें इसका छोटा सा टुकड़ा-
★ हृदय के टूटने पर आँसू निकलते हैं, जैसे सीप के फूटने पर मोती। हृदय जानता है कि उसने स्वयं पिघलकर उन आँसुओं को ढाला है। अतः वे सच्चे हैं। किंतु उनका मूल्य तो कोई प्रेमी ही बतला सकता है। उसी प्रकार सीप केवल इतना जानती है कि उसका मोती खरा है, वह नहीं जानती कि वह मूल्यहीन है अथवा बहुमूल्य। उसका मूल्य तो रत्नपारखी ही बता सकता है। मैं भूखे को भोजन खिलाना और प्यासे को पानी पिलाना अपना परम धर्म समझती हूँ। ईश्वर के बनाए नियमों को मानती हूँ।
★ साभार: jagran.com
🇮🇳 ‘‘गिरफ़्तार होने वाले हैं, आता है वारंट अभी॥’’ धक-सा हुआ हृदय, मैं सहमी, हुए विकल साशंक सभी॥ किन्तु सामने दीख पड़े मुस्कुरा रहे थे खड़े-खड़े। रुके नहीं, आँखों से आँसू सहसा टपके बड़े-बड़े॥ ‘‘पगली, यों ही दूर करेगी माता का यह रौरव कष्ट?’’ ‘रुका वेग भावों का, दीखा अहा मुझे यह गौरव स्पष्ट॥ तिलक, लाजपत, श्री गाँधीजी, गिरफ़्तारी बहुबार हुए। जेल गये, जनता ने पूजा, संकट में अवतार हुए॥ जेल! हमारे मनमोहन के प्यारे पावन जन्म-स्थान। तुझको सदा तीर्थ मानेगा कृष्ण-भक्त यह हिन्दुस्तान॥
मैं प्रफुल्ल हो उठी कि आहा! आज गिरफ़्तारी होगी। फिर जी धड़का, क्या भैया की सचमुच तैयारी होगी!! आँसू छलके, याद आ गयी, राजपूत की वह बाला। जिसने विदा किया भाई को देकर तिलक और भाला॥ सदियों सोयी हुई वीरता जागी, मैं भी वीर बनी। जाओ भैया, विदा तुम्हें करती हूँ मैं गम्भीर बनी॥ याद भूल जाना मेरी उस आँसू वाली मुद्रा की। कीजे यह स्वीकार बधाई छोटी बहिन ‘सुभद्रा’ की॥
🇮🇳 🇮🇳 #स्वतंत्रता आंदोलन की सिपाही, सच्ची राष्ट्रभक्त और देशभक्ति से ओतप्रोत करने वाली हिन्दी की सुप्रसिद्ध #कवयित्री और #लेखिका #सुभद्रा_कुमारी_चौहान जी को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि !
🇮🇳💐🙏 वन्दे मातरम् 🇮🇳 #प्रेरणादायी_व्यक्तित्व
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