भगवान परशुराम: क्रोध, धर्म और न्याय के अद्वितीय अवतार सनातन धर्म में भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वे एक ऐसे योद्धा ऋषि थे जिन्होंने अन्याय और अधर्म के खिलाफ खड़े होकर धर्म की स्थापना की। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि धर्म की रक्षा के लिए कभी-कभी कठोर निर्णय भी आवश्यक होते हैं। भगवान परशुराम का परिचय भगवान परशुराम का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने क्षत्रिय जैसा पराक्रम दिखाया। उनके पिता थे ऋषि जमदग्नि और माता थीं रेणुका । जन्म कथा मान्यता है कि भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (अक्षय तृतीया) को हुआ था। इस कारण यह दिन उनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। नाम का अर्थ “परशुराम” नाम दो शब्दों से मिलकर बना है: परशु = फरसा (एक प्रकार का हथियार) राम = आनंद देने वाला अर्थात “फरसा धारण करने वाला राम” भगवान शिव से शिक्षा भगवान परशुराम ने भगवान शिव से शस्त्र विद्या सीखी और उनसे ही परशु (फरसा) प्राप्त किया। इसलिए उन्हें शिव का परम भक्त माना जाता है। सहस्त्रार्जुन की कथा एक प्रसिद्ध ...
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