03 नवंबर 2025

गुरु ग्रह बृहस्पति Jupiter — ज्ञान, धर्म और समृद्धि का ग्रह | Jupiter | Spiritual | Astrology




🟡 गुरु ग्रह बृहस्पति क्या है?


गुरु ग्रह (Jupiter), जिसे बृहस्पति भी कहा जाता है, वैदिक ज्योतिष में ज्ञान, धर्म, नैतिकता, आशीर्वाद और समृद्धि का ग्रह माना जाता है।

यह ग्रहों का गुरु है — सबसे बड़ा, सबसे शांत और सबसे दयालु ग्रह।

गुरु वह है जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।

अन्तःकरण की शुद्धता, सच्चा ज्ञान और सद्बुद्धि — यही गुरु देता है।

गुरु, जिसे अंग्रेजी में बृहस्पति (Jupiter) कहते हैं, सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है जो सूर्य से पाँचवाँ है। ज्योतिष में, गुरु एक महत्वपूर्ण देवता माने जाते हैं जो ज्ञान, भाग्य और देवताओं के गुरु हैं। बृहस्पति एक गैसीय ग्रह है जिसकी कोई ठोस सतह नहीं है और यह हीलियम और हाइड्रोजन से बना है।                  


 खगोल विज्ञान में बृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह: यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है, जिसका द्रव्यमान अन्य सभी ग्रहों के संयुक्त द्रव्यमान से भी लगभग (2.5) गुना अधिक है। 


 गैसीय दानव: यह मुख्य रूप से गैसों से बना है और इसकी कोई ठोस सतह नहीं है।  सबसे छोटा दिन: इसका दिन (अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में लगने वाला समय)


सबसे छोटा है, जो लगभग (9.9) घंटे में पूरा होता है।  तेज़ चुंबकीय क्षेत्र: इसका चुंबकीय क्षेत्र सभी ग्रहों में सबसे शक्तिशाली है। 


 "वैक्यूम क्लीनर": इसे सौरमंडल का "वैक्यूम क्लीनर" भी कहा जाता है क्योंकि यह क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं को पृथ्वी की ओर आने से रोकता है।  


ज्योतिष और हिंदू धर्म में गुरु :


 देवताओं के गुरु: बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है और वे शील, धर्म और ज्ञान के देवता हैं।  


नवग्रहों के नायक: इन्हें नवग्रहों के समूह का प्रमुख माना जाता है।  शुभ फल: ज्योतिष के अनुसार, बृहस्पति ग्रह जीवन में धन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सफलता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 


मंदिर: देवगुरु  बृहस्पति के कई मंदिर हैं, जैसे कि तमिलनाडु में अलंगुड़ी में स्थित श्री आपत्सहायेश्वर महादेव मंदिर, जहां लोग गुरु ग्रह के दोषों को दूर करने के लिए परिक्रमा करते हैं। 

🔱 गुरु बृहस्पति का आध्यात्मिक महत्व

गुरु:

धर्म और आस्था को स्थिर करता है

सही मार्ग दिखाता है

अच्छा ज्ञान और विवेक देता है

हम जीवन में जिस भी व्यक्ति के रूप में ज्ञान प्राप्त करते हैं — माता-पिता, शिक्षक, मार्गदर्शक — उसमें गुरु की ऊर्जा होती है।



✨ गुरु के प्रमुख तथ्य

विषय             विवरण

तत्व                   आकाश तत्व

स्वभाव            शुद्ध, दयालु, धार्मिक

धातु                    सोना

रत्न                    पीला पुखराज (Yellow Sapphire)

रंग                   पीला

देवता                   बृहस्पति देव / नारायण

बीज मंत्र             “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः”

वैदिक मंत्र           “ॐ बृं बृहस्पति नमः”


🌟 कुंडली में गुरु का प्रभाव


✅ जब गुरु शुभ होता है:

भाग्य मजबूत होता है

शिक्षा, ज्ञान और विवेक मिलता है

आध्यात्मिक विकास होता है

धन, बड़े अवसर और सम्मान मिलता है

विवाह और पारिवारिक सुख मिलता है


❌ जब गुरु अशुभ या कमजोर होता है:

गलत निर्णय

धोखे या भ्रम में आना

धन संबंधी अस्थिरता

विवाह में देरी या समस्याएँ

गुरु अशुभ नहीं होता — पर कभी-कभी भ्रमित होकर गलत दिशा में जा सकता है।


📚 गुरु किन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है?

शिक्षा, अध्यापन

आध्यात्मिकता, धर्म

बैंकिंग, फाइनेंस, मैनेजमेंट

काउंसलिंग, एडवाइजर, लाइफ कोच

Good Guru = Good Guidance


🟡 किस राशि में कैसा?

स्थिति                         भाव

धनु / मीन (स्व-राशि)         उच्च ज्ञान, अध्यात्म, विवेक

कर्क (उच्च)                         अतुलनीय सफलता, सम्मान

मकर (नीच)                 धीमी प्रगति, भ्रम


🧘 गुरु और स्वास्थ्य

लिवर

मोटापा

पाचन

हार्मोन संतुलन

कमजोर गुरु → Decision Making में कमी, गलत जगह भरोसा करना, Direction Confusion।


🧿 गुरु को मजबूत करने के उपाय (बिना रत्न के भी प्रभावी)

सरल उपाय कैसे करें

गुरुवार का व्रत                               एक समय भोजन, तामसिक भोजन न करें

बृहस्पति मंत्र जप                             रोज़ 108 बार “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः”

हल्दी / चने की दाल दान             गुरुवार को

गुरुदेव / बुजुर्गों का सम्मान            Blessing ही गुरु की ऊर्जा है

पीला रंग पहनें                            सकारात्मकता बढ़ती है


गुरु को खुश करने का सबसे बड़ा तरीका: सत्य और सदाचार।


🟡 गुरु का जीवन संदेश


“धन से बड़ा ज्ञान है, और ज्ञान से बड़ा सद्बुद्धि।”

गुरु हमें सिखाता है कि सफलता अहंकार से नहीं, विनम्रता से आती है।

गुरु ज्ञान, धर्म और समृद्धि का ग्रह है

जब गुरु साथ होता है, भाग्य आपके पक्ष में काम करता है

गुरु का आशीर्वाद → सही दिशा + सही निर्णय + स्थिर सफलता


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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you.

बुध ग्रह Mercury — बुद्धि, वाणी और व्यापार का ग्रह | Mercury | Spiritual | Astrology

 



🟢 बुध ग्रह (Mercury) वैदिक ज्योतिष में बुद्धि, सीखने की क्षमता, वाणी, संचार और व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।

वैदिक ज्योतिष में, बुध ग्रह बुद्धि, संचार, तर्क, हास्य और अनुकूलन क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है। इसे 'राजकुमार' माना जाता है, जो दिमाग, भाषण और लेखन क्षमता को नियंत्रित करता है। बुध का मजबूत होना व्यक्ति को एक अच्छा व्यापारी, वकील और मीडिया पेशेवर बना सकता है, जबकि कमजोर बुध से कमजोर याददाश्त और निर्णय लेने में कठिनाई हो सकती है। 

इसे "वाणी और विवेक का ग्रह" कहा जाता है।

बुध ग्रह व्यक्ति के सोचने, बोलने और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है।

जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध मजबूत होता है, वह:

बुद्धिमान होता है

बात करने में कुशल होता है

व्यापार और सौदेबाज़ी में माहिर होता है









🔍 बुध के प्रमुख तथ्य

विषय                      विवरण

प्रकृति                    सौम्य

तत्व                            पृथ्वी (Earth Element)

रंग                            हरा

धातु                            कांसा

रत्न                            पन्ना (Emerald)

देवता                            श्री विष्णु / गजानन बुद्धि प्रदाता

मंत्र                          “ॐ बुं बुधाय नमः”


💡 बुध का प्रभाव (Astrological Significance)

बुध ग्रह 

बुद्धि और संचार: बुध व्यक्ति की बुद्धि, तर्क शक्ति, बोलने और लिखने की क्षमता को दर्शाता है।


मिथुन और कन्या राशि का स्वामी: यह इन राशियों पर शासन करता है, जिनके लोग आमतौर पर अच्छे वक्ता और बुद्धिमान होते हैं।


द्वैतवादी और बहुमुखी: बुध एक द्वैतवादी ग्रह है जो संबंधित ग्रहों के प्रभाव के अनुसार खुद को ढाल लेता है, जिससे यह बहुमुखी बनता है।


स्वास्थ्य से संबंध: बुध तंत्रिका तंत्र, त्वचा, फेफड़े, जीभ, अस्थमा और दिमागी रोगों से संबंधित है।


व्यवसाय: यह व्यापार, संचार, मीडिया और शिक्षण जैसे व्यवसायों का कारक है।

विवाह और संबंध: बुध बौद्धिक संबंधों को बढ़ावा देता है, जहाँ व्यक्ति ऐसे साथी की तलाश करते हैं जो उनके दिमाग को उत्तेजित करे।


रत्न: बुध से संबंधित रत्न पन्ना है, जिसे ज्योतिषीय परामर्श के बाद पहना जाना चाहिए।

पूजा और उपाय: बुध को प्रसन्न करने के लिए भगवान गणेश की पूजा, बुधवार का व्रत, दान-पुण्य और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप किया जाता है।

दिन: बुधवार को बुध का दिन माना जाता है। 

✅ जब बुध शुभ होता है:

इंस्टेंट निर्णय लेने की क्षमता

तेज दिमाग और विश्लेषण कौशल

स्मरण शक्ति उत्कृष्ट

व्यवसाय में लाभ और अवसर

शिष्ट, आकर्षक और सभ्य संचार शैली


❌ जब बुध 🟢 अशुभ या कमजोर होता है:

निर्णय लेने में भ्रम

बात करते समय गलती या गलतफ़हमी

जल्दबाज़ी में गलत निर्णय

डर या झिझक के कारण अवसर चूक जाना

बुध ग्रह की शक्ति से “बोलने” से लेकर “सोचने” तक सब प्रभावित होता है।


🧠 बुध किन क्षेत्रों का कारक है?


शिक्षा, ज्ञान


मीडिया और संचार


मार्केटिंग, व्यापार


काउंसलिंग, लेखन, वाणी कला


शेयर मार्केट और सेल्स / बिजनेस


जिसकी कुंडली में अच्छा बुध हो, वह अक्सर व्यवसायी, वक्ता, लेखक, शिक्षक, वक्ता, वकील, मार्केटर बनता है।


🔯 किस राशि में कैसा?

स्थिति                             परिणाम

कन्या राशि में (उच्च)          प्रखर बुद्धिमत्ता, विश्लेषण क्षमता

मीन राशि में (नीच)         भ्रम, निर्णय लेने में कठिनाई

मिथुन / कन्या (स्व-राशि) संचार में निपुण, तार्किक सोच


🧠 बुध से संबंधित स्वास्थ्य क्षेत्र

त्वचा

नसें

दिमाग / nervous system

बोलने / वाणी संबंधी समस्या

कमजोर बुध होने पर:

चिंता, भूलने की आदत, हकलाना, Overthinking जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।


🙏 बुध ग्रह 🟢 मजबूत करने के उपाय

उपाय                                              कैसे करें

“ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र               प्रतिदिन 108 बार

हरी वस्तुएँ दान करें                       हरा कपड़ा, पन्ना, मूंग

बुधवार को व्रत                               हरी सब्जियों का सेवन

तांबे या कांसे के बर्तन का उपयोग       पानी या भोजन के लिए


हरी सब्जियों और फलों का सेवन मन को शुद्ध और शांत रखता है


🟢 बुध को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा तरीका:

स्वच्छ वाणी और सत्य बोलना।


🌿 बुध का जीवन संदेश

“कुशल संचार ही हर सफलता की कुंजी है।”

"Efficient communication is the key to every success."


बुध ग्रह हमें सिखाता है कि बुद्धि का उपयोग तब ही सफल है, जब हम उसे सही शब्दों में व्यक्त करें।


बुध ज्ञान, वाणी और व्यापार का ग्रह है


अच्छा बुध 🟢 व्यक्ति को समझदार, सफल और लोकप्रिय बनाता है


बुध की कृपा से न केवल बुद्धि तेज होती है, बल्कि बोलने का तरीका भी श्रेष्ठ होता है


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सूर्य ग्रह - आत्मा, शक्ति और तेज का स्रोत | Surya Grah | Hindi Spiritual | Astrology



🌞 सूर्य ग्रह क्या है?

सूर्य ग्रह (🌞 Sun) वैदिक ज्योतिष में सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। सूर्य को आत्मा, आत्मविश्वास, नेतृत्व, ऊर्जा और पिता का प्रतिनिधित्व करने वाला ग्रह कहा गया है। यह ग्रहों का राजा है और पूरे सौर मंडल को नियंत्रित करता है — ठीक उसी तरह, कुंडली में ऊर्जा और जीवन का केंद्र भी सूर्य ही है।


बिना सूर्य— जीवन संभव नहीं।

वैसे ही, कुंडली में कमजोर सूर्य — आत्मविश्वास और दिशा की कमी।


🌞 सूर्य देव केवल आकाश का तारा नहीं — वे जीवन, प्रकाश, आत्मविश्वास और ऊर्जा के प्रतीक हैं।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ‘आत्मा का कारक’ (Significator of Soul) कहा गया है।


“सूर्य बिना जीवन नहीं, और आत्मा बिना चेतना नहीं।”

सूर्य जहाँ बैठता है, उस भाव को चमक देता है — लेकिन अहंकार को भी नियंत्रित करता है.

🪶 सूर्य ग्रह 🌞 का परिचय

विषय                          विवरण

देवता                           भगवान सूर्य / आदित्य / सविता

तत्व                           अग्नि

दिशा                            पूर्व

रत्न                           माणिक्य (Ruby)

धातु                           तांबा

मंत्र                          “ॐ घृणि सूर्याय नमः”

सप्ताह का दिन           रविवार

रंग                            लाल / नारंगी


सूर्य का प्रकाश न केवल हमारे शरीर बल्कि मन और आत्मा को भी ऊर्जावान बनाता है।


🔅 कुंडली में सूर्य  🌞 का महत्व

सूर्य 🌞 व्यक्ति की आत्मा, अहं, पिता, प्रतिष्ठा, सरकारी पद, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करता है।

सूर्य का प्रत्येक राशि पर अलग प्रभाव पड़ता है, जैसे कि नेतृत्व और आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, धन लाभ या हानि, रिश्ते, और करियर। प्रत्येक राशि के लिए, सूर्य का प्रभाव यह तय करता है कि जातक जीवन में कैसा प्रदर्शन करेगा। उदाहरण के लिए, मेष राशि के लिए सूर्य का राशि परिवर्तन महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, जबकि वृष राशि के लिए स्वास्थ्य और रिश्तों का ध्यान रखना आवश्यक हो सकता है। 


🌞 सूर्य का विभिन्न राशियों पर प्रभाव


मेष राशि: सूर्य 🌞 के राशि परिवर्तन से जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं। सीनियर्स की सलाह से चुनौतियों का सामना करने में सफलता मिलती है। शासन-सत्ता का सहयोग मिलता है और नौकरी-व्यापार में तरक्की होती है।


वृष राशि: स्वास्थ्य का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है। रिश्तों में समस्या आ सकती है, इसलिए धैर्य और समझदारी से काम लें। खान-पान पर विशेष ध्यान दें और तनाव से बचें।


मिथुन राशि: यह गोचर शत्रुओं पर विजय दिलाता है और कार्यक्षेत्र में मजबूती लाता है। आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता बढ़ती है।


कर्क राशि: यह समय रचनात्मक कार्यों और प्रेम जीवन के लिए अच्छा होता है। आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है।


सिंह राशि: सूर्य 🌞 सिंह राशि के स्वामी हैं, इसलिए यह समय पारिवारिक मामलों और संपत्ति से जुड़े निर्णयों का होता है। आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता भरपूर होती है।


कन्या राशि: आत्मविश्वास, साहस और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है।


तुला राशि: यह गोचर धन और वाणी से संबंधित लाभ दे सकता है। खर्च और विदेश संबंधों में वृद्धि हो सकती है।


वृश्चिक राशि: सूर्य का गोचर आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि करता है।


धनु राशि: इस राशि के लिए सूर्य का गोचर शुभ और गुडलक लेकर आता है। ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ती है और घर का माहौल सुखद व आध्यात्मिक रहता है। 


🌞 ज्योतिषीय महत्व

आत्मविश्वास और नेतृत्व: सूर्य आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, और सफलता का प्रतीक है।

स्वास्थ्य और जीवन शक्ति: यह स्वास्थ्य और समग्र जीवन शक्ति को नियंत्रित करता है। जन्म कुंडली में मजबूत सूर्य अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है।

पिता और आधिकारिक व्यक्ति: सूर्य पिता तुल्य व्यक्तियों और अन्य आधिकारिक प्रकारों के साथ संबंधों को प्रभावित करता है।

कमजोर सूर्य के प्रभाव: यदि कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो आत्मविश्वास की कमी हो सकती है, और व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 


✅ सूर्य 🌞 शुभ हो तो:

व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता होती है

आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में चमक आती है

समाज में मान-सम्मान और सरकारी पद की संभावना

पिता से सहयोग और आशीर्वाद


❌ सूर्य 🌞 अशुभ हो तो:


अहंकार, गुस्सा और अस्थिरता

आंख, हृदय या ब्लड प्रेशर संबंधी समस्या

पिता या अधिकारी वर्ग से मतभेद

सूर्य जब तेज देता है, तब जीवन में पहचान देता है;

जब तपन देता है, तब आत्मा को परखता है।


🌞 सूर्य के प्रतीकात्मक अर्थ

तत्व                    अर्थ

प्रकाश          ज्ञान, दिशा और सच्चाई

उषा (भोर)          नई शुरुआत

तप                  आत्मशक्ति और आत्मसंयम

किरणें           आशा और प्राण


सूर्य का अर्थ है — सत्य का प्रकाश।

🌤 किस राशि में कैसा?

राशि सूर्य का प्रभाव

सिंह (स्वामित्व) अत्यंत बलवान, नेतृत्व क्षमता

मेष (उच्च) उत्तम आत्मविश्वास, उन्नति

तुला (नीच) सम्मान में उतार-चढ़ाव, संघर्ष


👨‍👦 सूर्य और पिता / सरकारी क्षेत्र

कुंडली में सूर्य पिता, शासन, सरकारी कार्य और प्रशासन का प्रतिनिधित्व करता है।

जिस व्यक्ति का सूर्य मजबूत हो, वह अक्सर:

नेता बनता है

सरकारी सिस्टम में आगे बढ़ता है

भीड़ में अलग पहचान बनाता है


☀️ सूर्य और सेहत (Health)

सूर्य का संबंध है:

हृदय

आंखों की रोशनी

रक्त संचार

ऊर्जा स्तर

कमजोर सूर्य → थकान, आत्मविश्वास की कमी, विटामिन D की समस्या।


🕉️ सूर्य के लिए उपाय  🔱  सूर्य के उपाय  (सरल और असरदार)

उपाय              विधि

सूर्य मंत्र जप        “ॐ घृणि सूर्याय नमः” – 108 बार प्रतिदिन

जल अर्घ्य                 प्रातःकाल उगते सूर्य को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें

रविवार व्रत                  नमक रहित भोजन, दान-पुण्य

दान                           लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, तांबा

पूजा                           सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ


उगते सूर्य को प्रणाम, हर दिन को नई शुरुआत बनाता है।


🔱 सूर्य और कर्मफल

सूर्य आत्मबल देता है।

यदि व्यक्ति कर्मशील और ईमानदार हो, तो सूर्य उसकी पहचान को उजाला देता है।

यदि व्यक्ति अहंकारी बन जाए, तो वही तेज उसे जलाने लगता है।


सूर्य अनुशासन, समय और सत्य का ग्रह है।


💠 सूर्य का संदेश


“जो खुद को पहचान लेता है, वही संसार को रोशन कर देता है।”


सूर्य हमें यह सिखाते हैं —कि हर अंधकार का अंत केवल प्रकाश से होता है।


📜 सूर्य आत्मा और जीवन का आधार है

यह हमें सत्य, कर्म और आत्मविश्वास का मार्ग दिखाता है

सूर्य को प्रणाम करना आत्मा को जाग्रत करना है

सूर्य शक्ति, नेतृत्व और आत्मा का ग्रह है 

मजबूत सूर्य व्यक्ति को प्रतिष्ठा, सम्मान और सफलता देता है

कमजोर सूर्य केवल एक ही चीज़ से ठीक होता है — कर्म और सत्यनिष्ठा


“सूर्य देव केवल आकाश में नहीं — वे हर उस व्यक्ति के भीतर हैं जो सत्य के मार्ग पर चलता है।”



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शनि ग्रह — कर्म का न्यायाधीश | Shani Grah | Saturn | Spiritual | Astrology

 



🌑 शनि ग्रह  Shani Grah (Saturn) — कर्म का न्यायाधीश |  ( Spiritual / Astrology )

शनि गृह 

🪐 शनि ग्रह क्या है?

शनि ग्रह (Saturn) वैदिक ज्योतिष में सबसे प्रमुख ग्रहों में से एक माना जाता है। शनि को कर्म का देवता, न्याय का प्रतीक और अनुशासन का ग्रह कहा गया है। वे व्यक्ति को उसके कर्मों का सही फल देते हैं — अच्छा या बुरा।

शनि , सूर्य से छठा ग्रह है और सौरमंडल में बृहस्पति के बाद दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। यह एक गैस दानव है, जिसकी औसत त्रिज्या पृथ्वी की लगभग 9 गुना है। इसका घनत्व पृथ्वी के औसत घनत्व का आठवाँ हिस्सा है, लेकिन इसका द्रव्यमान पृथ्वी से 95 गुना अधिक है।

शनि को "मंद गति वाला ग्रह" भी कहा जाता है क्योंकि यह एक राशि में लगभग 2.5 वर्ष तक रहता है।


🖤 शनि का स्वभाव

विषय            विवरण

प्रकृति            न्यायप्रिय, अनुशासन, कठोरता

दिशा                    पश्चिम

धातु                    लोहा, तेल

रंग                    नीला-काला

देवता             भगवान शनि / कालभैरव / हनुमान

मंत्र                    “ॐ शं शनैश्चराय नमः”



शनि का संबंध कर्म, धैर्य, संघर्ष, एकाग्रता, साधना और जिम्मेदारी से है।


🔯 कुंडली में शनि का प्रभाव

✅ शनि शुभ हो तो:


आत्मविश्वास बढ़ता है


सफलता धीरे-धीरे पर स्थायी होती है


व्यक्ति अनुशासित, मेहनती और ईमानदार बनता है


लंबे समय तक जीवन में स्थिरता और सम्मान मिलता है


❌ शनि अशुभ हो तो:

प्रयासों का फल देरी से मिलता है

जीवन में संघर्ष और बाधाएँ महसूस होती हैं

मानसिक दबाव, भय और अस्थिरता आ सकती है

शनि punishment नहीं देता — कर्म का परिणाम देता है।



🌒 शनि की विशेष अवधि — साढ़े साती और ढैय्या


शनि किसी व्यक्ति की चंद्र राशि पर जब 2.5+2.5+2.5 = 7.5 वर्ष तक प्रभाव डालता है, तो उसे साढ़े साती कहा जाता है।

ढैय्या लगभग 2.5 वर्ष की छोटी अवधि है।


इन समयों में व्यक्ति के जीवन में कुछ चुनौतियाँ आती हैं, परंतु अंत में व्यक्ति मजबूत बनकर निकलता है।



💠 शनि से संबंधित रोग और क्षेत्र


हड्डियाँ, जोड़, नसें, स्किन समस्या, पैर, घुटने और रीढ़


व्यावसायिक क्षेत्रों में:


मेटल, आयरन, मशीनरी, सरकारी काम, ऑयल, लॉजिस्टिक्स, न्यायालय


🙏 शनि के उपाय (सरल और असरकारी)

उपाय                                        कैसे करें

शनि मंत्र जप                               “ॐ शं शनैश्चराय नमः” — प्रतिदिन 108 बार

शनिवार का व्रत                               एक समय भोजन, तामसिक भोजन से बचें

काला तिल, सरसों का तेल दान       गरीब या मंदिर में

पीपल वृक्ष जल                               शनिवार को पीपल पर जल अर्पित करें

हनुमान चालीसा                               रोज़ या शनिवार को निश्चित रूप से


शनि को खुश करने के लिए केवल एक चीज़ ज़रूरी है — सत्कर्म और सत्य।

शनि वर्तमान में मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। वे 29 मार्च 2025 को कुंभ राशि से मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं और 3 जून 2027 तक इसी राशि में रहेंगे। इस दौरान शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या कुछ राशियों पर असर डाल रही है, जबकि कुछ को मुक्ति मिल रही है |

वर्तमान में शनि का प्रभाव

साढ़ेसाती:

मेष राशि: शनि साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो गया है। 

कुंभ राशि: शनि साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। 

मीन राशि: शनि साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है। 

ढैय्या:

सिंह और धनु राशि: शनि ढैय्या शुरू हो गई है। 

कर्क और वृश्चिक राशि: शनि ढैय्या समाप्त हो गई है। 


कहा जाता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। अगर किसी की कुंडली में शनि मजबूत स्थिति में हैं तो वह व्यक्ति मेहनती होता है। वह सच का साथ देता है और न्यायप्रिय होता है। इसी तरह वह व्यक्ति अपने जीवन में सफलता और स्थिरता प्राप्त करता है।

☄️ शनि का गहरा संदेश


“अच्छे कर्म करो, परिणाम की चिंता न करो।” _ यही शनि की सीख है।

"Do good deeds, don't worry about the results." _ This is Saturn's teaching.


शनि हमें जीवन में वह सब सिखाते हैं जो हमें महान बनाता है — धैर्य, कर्म, संघर्ष और विनम्रता।

Saturn teaches us all that makes us great in life—patience, action, struggle, and humility.



📜  शनि डरने का विषय नहीं है


शनि अनुशासन और न्याय का ग्रह है


कर्म अच्छे हों, तो शनि आशीर्वाद बनकर जीवन बदल देता है 😊


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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you.

मांगलिक दोष - भय नहीं, सही समझ और समाधान | Manglik Dosh |

 



“मंगल दोष: भय नहीं, सही समझ और समाधान”


ज्योतिष शास्त्र में “मंगल दोष” या मांगलिक दोष को लेकर कई मिथक और भ्रांतियाँ हैं। बहुत से लोग इसे शादी में बाधा, मानसिक तनाव या दांपत्य जीवन की समस्या से जोड़ते हैं। लेकिन सच यह है कि 


मंगल दोष कोई डरने की चीज़ नहीं, बल्कि समझने की चीज़ है।

कुंडली में ग्रह हमें रोकते नहीं, दिशा दिखाते हैं।



✅ मंगल दोष क्या है?


जन्म कुंडली में #मंगल-ग्रह (#Mars) यदि निम्न घरों में स्थित हो:

1st (लग्न)

4th

7th

8th

12th


तो इसे  मंगल दोष  #Mangal_Dosh /  मांगलिक #Manglik_Yog कहा जाता है।


#मंगल = ऊर्जा, शक्ति, आत्मविश्वास, नेतृत्व

मंगल दोष = इस ऊर्जा का गलत दिशा में उपयोग


यदि मंगल संतुलित नहीं हो, तो व्यक्ति क्रोधी, अधीर, या निर्णय में जल्दबाज़ी कर सकता है।


✅ मांगलिक #Manglik लोग कैसे होते हैं? (#Positive_Traits)

गुण                                  विवरण

दृढ़ निश्चयी                          अपने लक्ष्य को पूरे साहस से पूरा करते हैं

नेतृत्व क्षमता                  जन्मजात नेता होते हैं

जुनूनी & #Passionate          जो करते हैं दिल से करते हैं

भावनात्मक रूप से गहरे रिश्ते में 100% समर्पण


मांगलिक व्यक्ति बुरा नहीं होता — वह सिर्फ ऊर्जा से भरा होता है।

A #Manglik_person isn't bad—they're just full of energy.


✅ मंगल दोष और विवाह #Mangal_Dosh and #Marriage


लोग कहते हैं कि मांगलिक का विवाह केवल मांगलिक से होना चाहिए।

लेकिन आधुनिक ज्योतिष के अनुसार:


सभी कुंडली में मंगल दोष समान नहीं होता

कुछ स्थानों पर यह रद्द भी हो जाता है


उदाहरण:

अगर मंगल मेष, वृश्चिक, या अपनी उच्च राशि मकर में हो, तो परिणाम अच्छे भी हो सकते हैं।


शुद्ध विश्लेषण ही सही निर्णय देता है, अंधविश्वास नहीं।

Only pure analysis leads to correct decisions, not #superstition.


🔍 कब मंगल दोष काम नहीं करता? (#Cancellation / शमन)


स्थिति                            परिणाम

मंगल उच्च का हो                   मंगलदोष खत्म

चंद्र-मंगल योग                   धन योग बन जाता है

मंगल + शुभ ग्रह का प्रभाव   दोष शांत कहलाता है


विवाह के बाद प्रभाव कम होता है


✅ मंगल दोष के उपाय (#Simple & #Effective)

उपाय                   क्या करना है?

#मंगलवार व्रत            हर मंगलवार फलाहार

#हनुमान_चालीसा            प्रतिदिन या मंगलवार को 3 बार

मंगल मंत्र                   “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” 108 बार जप

दान                            लाल वस्त्र, मसूर दाल, तांबा दान

रत्न                            #मूंगा (#Coral) — सिर्फ ज्योतिषीय सलाह के बाद


भक्ति + अनुशासन = #ग्रह_शांति



✅ मिथक (#Misconceptions)


❌ मंगल दोष होने से शादी नहीं होती

✔ शादी में देरी का कारण हमेशा ग्रह नहीं, सही समय होता है


❌ मंगल दोष होने से #वैवाहिक जीवन मुश्किल हो जाता है

✔ अधिकांश मामलों में मंगल दोष शांत या रद्द होता है


मंगल दोष डरने की नहीं, दिशा बदलने की चेतावनी है।

Mangal Dosh is not a reason to fear, but a warning to change direction.



ग्रह बाधाएँ नहीं देते, वे केवल हमें बेहतर बनने का संकेत देते हैं।

Planets do not create obstacles, They only prompt us to become better.


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01 नवंबर 2025

भगवान शालिग्राम | Shaligram | “शालिग्राम: पत्थर नहीं, स्वयं विष्णु का स्वरूप”



“शालिग्राम: पत्थर नहीं, स्वयं विष्णु का स्वरूप”


हिंदू धर्म में कई प्रतीक और रूप ऐसे हैं जो दिव्यता की अनुभूति कराते हैं।

इन्हीं में से एक है — शालिग्राम शिला।

यह कोई साधारण पत्थर नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु का जीवंत रूप माना जाता है। शालिग्राम की पूजा से घर में धन, शांति और समृद्धि आती है।


शालिग्राम क्या है?


शालिग्राम एक प्राकृतिक और पवित्र शिला है, जो केवल नेपाल की गंडकी नदी में पाई जाती है। यह शिला वज्राकृति (अमोनाइट जीवाश्म) होती है और इसके अंदर स्वाभाविक रूप से चक्र व शंख के चिन्ह बने होते हैं।




यह किसी मानव द्वारा बनाया हुआ नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा निर्मित दिव्य स्वरूप है।


शालिग्राम शिला का महत्व


यह भगवान विष्णु और उनके अवतारों का प्रतीक है।

जिस घर में शालिग्राम की पूजा होती है, वहाँ लक्ष्मी का निवास माना गया है।

शालिग्राम की पूजा से पितृदोष और ग्रहदोष शांत होते हैं।

“जहाँ शालिग्राम, वहाँ स्वयं लक्ष्मी।”


शालिग्राम की उत्पत्ति

भागवत पुराण के अनुसार, शालिग्राम का संबंध देवी तुलसी से जुड़ा है।

कथा इस प्रकार है:

देवी तुलसी के पतिव्रत से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने कहा—

“तुम नदी के स्वरूप में प्रवाहित होगी, और मैं शालिग्राम बनकर तुम्हारे जल में रहूँगा।”

इसीलिए तुलसी के बिना शालिग्राम की पूजा अधूरी मानी गई है।



शालिग्राम पूजा विधि 

स्नान के बाद शालिग्राम को गंगाजल या स्वच्छ जल से स्नान कराएँ

तुलसी दल, चंदन और अक्षत अर्पित करें

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करें

नैवेद्य में फल, पंचामृत या मौसमी प्रसाद चढ़ाएँ

शालिग्राम को सोने, चाँदी, ताँबे या पीतल की थाली में रखें


शालिग्राम की पूजा में केवल तुलसी का उपयोग होता है, फूल का नहीं।


शालिग्राम रखने के नियम


✅ घर में एक या तीन शालिग्राम रखना शुभ माना जाता है

✅ शालिग्राम को कभी बेचा नहीं जाता — दान में ही दिया जाता है


❌ शालिग्राम को बिना पूजा रखकर नहीं छोड़ना चाहिए

❌ चमड़े, शराब, माँस आदि के पास नहीं रखना चाहिए


शालिग्राम से होने वाले लाभ


घर में लक्ष्मी का स्थायी निवास

मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा

व्यवसाय और धन वृद्धि

ग्रहदोष शांति


“शालिग्राम जहाँ होता है, वहाँ कर्म फल तुरंत मिलता है।”


शालिग्राम की पूजा केवल प्रथा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव है।

यह हमें याद दिलाता है कि भगवान हर रूप में उपस्थित हैं —

चाहे वह मूरत हो, ज्योति हो या एक साधारण सा पत्थर।


शालिग्राम के प्रकार  Types of Shaligram 


विष्णु शालिग्राम Vishnu Shaligram

लक्ष्मी नारायण शालिग्राम Lakshmi Narayan Shaligram

लक्ष्मी नरसिम्हा शालिग्राम Lakshmi Narasimha Shaligram

दामोदर शालिग्राम Damodar Shaligram

कृष्ण शालिग्राम  Krishna Shaligram Stone

हिरण्यगर्भ शालिग्राम Hiranyagarbha Shaligram

शालिग्राम शिवलिंग Shaligram Shivling

शिव शालिग्राम Shiva Shaligram

वासुदेव शालिग्राम Vasudev Shaligram

नारायण शालिग्राम Narayana Shaligram

माधव शालिग्राम Madhava Shaligram

हृषिकेश शालिग्राम Hrishikesh Shaligram

लक्ष्मी नारायण सुदर्शन शालिग्राम Laxmi Narayan Sudarshan Shaligram

दामोदर शालिग्राम Damodara Shaligram

पुरूषोत्तम शालिग्राम Purushottama Shaligram

अच्युत शालिग्राम Achyuta Shaligram

हरि शालिग्राम Hari Shaligram

संकर्षण शालिग्राम Sankarshana Shaligram

प्रद्युम्न शालिग्राम Pradyumna Shaligram

गोविंद शालिग्राम Govinda Shaligram

श्रीधर शालिग्राम Shridhara Shaligram

केशव शालिग्राम Keshava Shaligram

शेषनाग शालिग्राम Shesha Naag Shaligram

जनार्दन शालिग्राम Janardana Shaligram

पद्मनाभ शालिग्राम Padmanabha Shaligram

अनिरुद्ध शालिग्राम Aniruddha Shaligram

मदुसूधन शालिग्राम Madusudhana Shaligram

जनेऊधारी शालिग्राम Janeudhari Shaligram

सूर्य शालिग्राम Suriya Shaligram

त्रिविक्रम शालिग्राम Trivikrama Shaligram

उपेन्द्र शालिग्राम Upendra Shaligram 

अदोक्षज शालिग्राम Adokshaja Shaligram

हयग्रीव शालिग्राम Hayagriva Shaligram

परेमेष्ठिन् शालिग्राम Paremeshthin Shaligram

हिरण्यगर्भ शालिग्राम Hiranyagarbha Shaligram

चतुर्भुज शालिग्राम Chaturbhuja Shaligram

गदाधर शालिग्राम Gadadhara Shaligram

रूपिनारायण शालिग्राम Rupinarayana Shaligram

त्रिविक्रम शालिग्राम Trivikrama Shaligram

श्रीधर शालिग्राम Shridhar Shaligram

पद्मनाभ शालिग्राम Padmanabha Shaligram

“शालिग्राम स्वयं विष्णु हैं, उनकी पूजा ही आत्मिक आराधना है।”


✅  #Shaligram, #ShaligramShila , #VishnuBhakti, #TulsiShaligram, #SanatanDharma, #HinduSpirituality, #DivineEnergy, #Bhakti,


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वास्तु शास्त्र | Vastu Shastra | “वास्तु: घर ही नहीं, जीवन की ऊर्जा का विज्ञान”

 



वास्तु शास्त्र Vastu Shastra 


“वास्तु: घर ही नहीं, जीवन की ऊर्जा का विज्ञान”


वास्तु शास्त्र सिर्फ ईंट–पत्थर का विज्ञान नहीं, बल्कि ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने का प्राचीन भारतीय ज्ञान है। यह बताता है कि हमारा घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि विचारों, व्यवहार और सफलता को प्रभावित करने वाला ऊर्जा–केन्द्र है।

जहाँ वास्तु होता है, वहाँ सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति बसती है।



वास्तु क्या है?

वास्तु शास्त्र = वास्तु (स्थान) + शास्त्र (विज्ञान)

यह पाँच तत्वों पर आधारित है:

✅ पृथ्वी (Earth)

✅ जल (Water)

✅ अग्नि (Fire)

✅ वायु (Air)

✅ आकाश (Space)


इन तत्वों के सही संयोजन से घर में ऊर्जा प्रवाह संतुलित होता है।



घर के प्रमुख स्थान और वास्तु

स्थान दिशा (Vastu Direction) सलाह

मुख्य द्वार (Main Door) उत्तर / पूर्व घर की ऊर्जा का प्रवेश द्वार, साफ–सुथरा रखें

पूजा कक्ष उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र

शयनकक्ष (Bedroom) दक्षिण-पश्चिम स्थिरता, सुरक्षा व स्थायित्व

रसोईघर (Kitchen) दक्षिण-पूर्व यह अग्नि तत्व की दिशा है

बैठक कक्ष / Living Room उत्तर या पूर्व सुख, सौहार्द व अतिथि–सत्कार

जल व्यवस्था (Tank, Underground Water) उत्तर-पूर्व / उत्तर प्रगति और ज्ञान की ऊर्जा


वास्तु के सरल और प्रभावी उपाय

ये उपाय बिना तोड़–फोड़ और बिना खर्च के ऊर्जा सुधारने में मदद करते हैं:



⭐ मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, ॐ या दीपक लगाएँ

⭐ घर में पर्याप्त रोशनी और हवा रखें

⭐ टूटी चीजें, पुरानी घड़ी, बंद घड़ी न रखें

⭐ रसोई में गैस–चूल्हा और पानी का स्रोत (सिंक) एक-दूसरे से दूर रखें

⭐ उत्तर दिशा में हरे पौधे शुभ माने जाते हैं


याद रखें: क्लटर (कचरा) = नकारात्मक ऊर्जा


वास्तु और ऊर्जा का प्रभाव

बहुत से लोग बताते हैं कि घर में वास्तु संतुलन होने से:


मानसिक शांति बढ़ती है

रिश्तों में सौहार्द आता है

काम में प्रगति होती है

नींद और स्वास्थ्य बेहतर होता है


वास्तु का उद्देश्य भवन सजाना नहीं, जीवन को संतुलित करना है।


वास्तु मंत्र

✅ “Positive space creates a positive life.”


वास्तु शास्त्र जीवन में संतुलन, सरलता और सकारात्मक ऊर्जा का विज्ञान है।

यदि घर अच्छा है, तो विचार अच्छे बनते हैं… और विचार–ही भाग्य बनाते हैं।


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