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हर कोई अपने को भगत सिंह समझने लगा है | Everyone himself Bhagat Singh's have started understanding - लेखक : सुभाष चन्द्र




हर कोई अपने को  भगत सिंह की औलाद समझने लगा है -

2 दिवंगत आत्माओं की फोटो के बीच जिसकी फोटो लग जाए क्या उसे भी 

मृत समझ लिया जाए -एक दिन में ‘शुगर” लुढ़क गई केजरीवाल,

जरा सोच सावरकर के बारे में जो 11 साल रहे “काला पानी” जेल में -


शहीद भगत सिंह और बाबा साहेब अंबेडकर जैसे देश भक्त दिवंगत नेताओं की फोटो के बीच में केजरीवाल की फोटो लगाने का मतलब यही निकाला जा सकता है कि जैसे उसकी पार्टी और परिवार ने उसे भी “दिवंगत” समझ लिया - फिर ऐसे महान लोगों के बीच में केजरीवाल की फोटो लगाने का यह भी मतलब निकलता है कि यह व्यक्ति खुद को भगत सिंह और अंबेडकर जैसा समझ रहा है - 


यानी आज कोई भी चोर उचक्का अपने को भगत सिंह की औलाद समझ लेता है - और यह बात खुलकर केजरीवाल ने कहते हुए वीर सावरकर का घोर अपमान किया था जब 22 जुलाई, 2022 को उपराज्यपाल ने शराब नीति की जांच CBI से कराने के आदेश दिए थे -


केजरीवाल ने उस दिन कहा था “आजकल केंद्र सरकार का नया रूल चल रहा है, पहले वो फैसला करते हैं किसको जेल में डालना है फिर उसके खिलाफ केस बनाया जाता है, मैंने सिसोदिया के खिलाफ आरोप देखे हैं और पाया है कि सब “fake” हैं -


केजरीवाल ने आगे कहा कि “उन्हें (केंद्र) जेल जाने से डर लगता होगा, हम नहीं डरते, हम भगत सिंह के “पुत्र” हैं जिसने देश के लिए जीवन कुर्बान कर दिया, हम वीर सावरकर के मार्ग पर नहीं चलते जिसने अंग्रेज़ो से माफ़ी मांगी” -


केजरीवाल, तुम और सारे आपिये मिलकर भी वीर सावरकर के चरणों की धूल के एक कण के एक करोड़वें अंश के बराबर भी नहीं हो - ऐ मूर्ख जिस सावरकर का तुम अपमान कर रहे हो वो अपने जीवन के 27 साल जेल में रहे और 11 साल तो “काला पानी” की सेलुलर जेल में रहे जहां अंग्रेजों ने उन्हें कोल्हू में बैल की जगह उपयोग कर तेल निकलवाया - तुम क्या मुकाबला करोगे सावरकर जैसी महान आत्मा से जब तुम्हारा 2 दिन के अंदर “शुगर लेवल” डगमगा गया वह भी घर का खाना खाते हुए - शर्म करो और डूब मरो सावरकर के लिए जहर उगलने से पहले -


तुम्हे यह भी आभास नहीं है कि शहीद भगत सिंह और वीर सावरकर एक दूसरे का पूरा सम्मान करते थे और सावरकर के जिस कथित माफीनामे का तुम ढोल पीटते फिरते हो, उसके विरुद्ध शहीदे आज़म ने एक शब्द भी नहीं कहा - वीर सावरकर के रत्नागिरी आवास पर हमेशा “भगवा” लहराता था परंतु 24 मार्च, 1931 को वहां “भगवा” की जगह “काला” ध्वज था 23 मार्च को भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी दिए जाने पर श्रद्धांजलि स्वरुप -


तुम भगत सिंह से भी क्या मुकाबला करोगे - वो देश के लिए शहीद हो गए जबकि तुमने तो सत्ता के 10 साल में देश को लूटने की सभी सीमाएं पार कर दी - तुम तो रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के दीवाने हो लेकिन भगत सिंह 1926 में एक लेख में लिखा था “Muslims lack a great deal of Indianness so they do not understand the importance of Indianness in all India and prefer the Arabic script and the Persian language. The importance of being one language of all India and that too Hindi they never understand”


शहीदे आज़म के पोते ने केजरीवाल की फोटो भगत सिंह के साथ लगाने पर ऐतराज किया है, उन्हें इसे शहीदे आज़म का अपमान कह कर भगत सिंह जी की मानहानि का केस दर्ज करना चाहिए और इसके लिए केजरीवाल को दंडित करने की मांग करनी चाहिए -

"लेखक के निजी विचार हैं "

 लेखक : सुभाष चन्द्र  | मैं हूं मोदी का परिवार | “मैं वंशज श्री राम का” 06/04/2024 

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