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Illegal Construction | Good Order from the Supreme Court | अच्छा आदेश है सुप्रीम कोर्ट का | हर जगह लागू होना चाहिए | लेखक : सुभाष चन्द्र

 



Illegal construction Good Order from the Supreme Court | अच्छा आदेश है सुप्रीम कोर्ट का  |  हर जगह लागू होना चाहिए,


अच्छा आदेश है सुप्रीम कोर्ट का, 

लेकिन यह हर जगह लागू होना चाहिए,

सुप्रीम कोर्ट हर राज्य सरकार से 

समयबद्ध सीमा में अवैध निर्माण 

गिराने के आदेश दे -


सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने चेन्नई में बनाई गई मस्जिद और मदरसे को गिराने के मद्रास हाई कोर्ट के देश को बरक़रार रखते हुए 26 फरवरी को कहा कि वह निर्माण पूरी तरह अवैध था - मस्जिद व दरगाह समिति की अपील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्ज़ा कर बनाए गए धार्मिक स्थलों को हटाना ही उचित है जैसा हम पूर्व आदेशों में भी कह चुके हैं -


मस्जिद और दरगाह समिति ने कहा था कि वह जमीन लंबे समय से खाली पड़ी थी जिसका मतलब है कि सरकार को जनहित में उसकी जरूरत नहीं थी - पीठ ने इस पर कहा कि क्या इसका मतलब है कि आप जमीन पर कब्ज़ा कर लेंगे, जमीन सरकार की है, वह उसे प्रयोग करे या न करे, लेकिन आपको उस पर कब्ज़ा करने का कोई अधिकार नहीं है - अदालत ने बिल्डिंग हटाने के लिए 31 मई तक का समय दिया है -


कहने को यह आदेश बहुत अच्छा है लेकिन इसका पालन हर जगह होना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के हर आदेश में होना चाहिए - जमीन सरकार की खाली पड़ी भी तो भी उस पर किसी को कब्ज़ा कर उपयोग करने का अधिकार नहीं है, यह सुप्रीम कोर्ट स्वयं कह रहा है -


यह बात भी याद रखनी चाहिए कि रेलवे और सेना की लाखों एकड़ भूमि पर लोग अवैध कब्ज़ा कर बैठे हैं, झुग्गियां बसा लेते हैं लेकिन जब प्रशासन उस अवैध कब्जे से जमीन को मुक्त कराने की कोशिश करता है तो सुप्रीम कोर्ट ही विगत में ऐसे प्रयासों पर रोक लगाता रहा - यहां तक वहां बसे लोगों के पुनर्वास की पहले व्यवस्था करने के आदेश देता रहा है और इस तरह अदालत स्वयं ऐसे कब्जे को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश करता है -


आपको याद होगा हल्द्वानी की रेलवे की भूमि को खाली कराने से सुप्रीम कोर्ट ने ही रोका था और यहां तक मुस्लिम होने का भी वास्ता देकर पहले उनके पुनर्वास की बात की थी जिससे उन्हें इतना बल मिला कि ठीक एक साल बाद उन लोगों ने पुलिस पर हमला कर करोड़ो की संपत्ति बर्बाद कर दी - ऐसा #secularism आड़े नहीं आना चाहिए -


मज़ार का मतलब होता है - “समाधि स्थल, दरगाह, किसी सूफ़ी बुज़ुर्ग की क़ब्र · कोई दर्शनीय स्थल, श्राइन, बड़ों का तीर्थ, दरगाह, आस्ताना, तीर्थ”

लेकिन यह देखा जा सकता है कि हर खाली जमीन पर मज़ारें बना दी जाती है जिनमे कोई सूफी या कोई व्यक्ति नहीं  होता - दिल्ली भर में अनेक सड़कें है जिनके बनते ही “मज़ारें” बन जाती हैं, भला सड़कें बनने के बाद कोई वहीँ कैसे मरता है जिसकी मज़ार बन जाती है - जबकि जाकिर नाइक के अनुसार इस्लाम में मज़ार बनाना वर्जित है और इसलिए ऐसे सब निर्माण अवैध हैं जिन्हे हटाने के लिए हर राज सरकार को समयबद्ध सीमा में कार्रवाई के आदेश देने चाहिए -


इलाहाबाद हाई कोर्ट परिसर में खड़ी अवैध मस्जिद को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 5 साल लगा दिए और तब मार्च, 2023 में हटाने के आदेश दिए - पता चला है वह मस्जिद अंततः अप्रैल/मई 2023 में हटा दी गई -


पटना हाई कोर्ट के नजदीक बनाए गए “वक्फ भवन” को हटाने के आदेश हाई कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने  4 -1 से  19 अगस्त, 2021 को देते हुए कहा था कि “The Structure has been constructed in utter and brazen violation of provisions of law –and it must be held to be illegal and non - est from the word go “


लेकिन इस फैसले में जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह का इस्लाम बीच में आ गया और उन्होंने 4 जजों के विरोध में मत दिया -

इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर, 2021 को रोक लगा दी और मामला बरफ में जम गया जिस पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई है - 


इसलिए मेरा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के अवैध निर्माण को हटाने के लिए आदेश सब जगह लागू किए जाएं, ये आदेश specific नहीं होने चाहिए -

"लेखक के निजी विचार हैं "

 लेखक : सुभाष चन्द्र | “मैं वंशज श्री राम का” 29/02/2024 

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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

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