🌺 माता पार्वती — शक्ति, प्रेम और समर्पण का दिव्य स्वरूप सनातन धर्म में माता पार्वती को आदि शक्ति माना गया है। वे केवल शिव जी की अर्धांगिनी ही नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की ऊर्जा हैं। उनका जीवन स्त्री शक्ति, धैर्य, प्रेम और तपस्या का सर्वोच्च उदाहरण है। पार्वती जी को उमा, गौरी, दुर्गा, काली, अन्नपूर्णा आदि अनेक रूपों में पूजा जाता है। हर रूप जीवन के अलग-अलग सत्य को दर्शाता है। 🌸 जन्म और तपस्या माता पार्वती का जन्म पर्वतराज हिमालय के यहाँ हुआ, इसलिए उन्हें पार्वती कहा गया। बचपन से ही वे शिव जी को पति रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने वर्षों तक कठोर तप किया। उनकी तपस्या यह सिखाती है कि सच्चा प्रेम और लक्ष्य पाने के लिए धैर्य और समर्पण आवश्यक है। 🕉️ शिव-पार्वती — आदर्श दांपत्य शिव और पार्वती का संबंध केवल विवाह नहीं, बल्कि शक्ति और शिव का मिलन है। शिव बिना शक्ति के “शव” हैं — यह दर्शाता है कि ऊर्जा के बिना चेतना अधूरी है। उनका दांपत्य सिखाता है: ✔ सम्मान ✔ समानता ✔ समझ ✔ आध्यात्मिक जुड़ाव ये भी देखे 👇 भगवान शिव | Mahadev Shiv | संहार नहीं...
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