कलश: शुभता, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक सनातन धर्म में कलश को अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। किसी भी पूजा, यज्ञ, विवाह या धार्मिक अनुष्ठान में कलश की स्थापना विशेष महत्व रखती है। यह केवल एक पात्र नहीं, बल्कि सृष्टि, जीवन और ऊर्जा का प्रतीक है। कलश क्या है? कलश एक धातु (तांबा, पीतल या चांदी) का पात्र होता है, जिसमें जल भरा जाता है और उसके ऊपर आम के पत्ते तथा नारियल रखा जाता है। इसे पूजा के दौरान देवताओं के प्रतीक रूप में स्थापित किया जाता है। ये भी देखे 👇 भगवान शिव | Mahadev Shiv | संहार नहीं, परिवर्तन के देवता कलश का धार्मिक महत्व कलश को देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। मान्यता है कि इसमें: ब्रह्मा का वास मुख में विष्णु का मध्य भाग में शिव का आधार में इसलिए इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। कलश और माता लक्ष्मी कलश का संबंध माता लक्ष्मी से भी जुड़ा है। यह धन, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है, इसलिए दीपावली और अन्य त्योहारों में इसकी स्थापना की जाती है। कलश की संरचना का महत्व कलश के हर भाग का विशेष अर्थ होता है: जल → जीवन और ऊर्जा ...
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