🐘 श्री गणेश — बुद्धि, शुभारंभ और विघ्नों के नाशक सनातन धर्म में हर शुभ कार्य की शुरुआत जिनके नाम से होती है, वे हैं भगवान श्री गणेश । उन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और सिद्धि-विनायक कहा जाता है। गणेश जी केवल देवता नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का मार्ग दिखाने वाले गुरु हैं। उनका स्वरूप ही ज्ञान, धैर्य और विवेक का प्रतीक है। 🌸 जन्म कथा शास्त्रों के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी की रचना की और उन्हें द्वार पर पहरा देने को कहा। जब शिव जी ने प्रवेश करना चाहा और गणेश जी ने रोका, तब क्रोध में उनका सिर अलग कर दिया गया। बाद में हाथी का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित किया गया। यह कथा सिखाती है: कर्तव्य के प्रति निष्ठा और माता-पिता का सम्मान सर्वोपरि है। 🐘 गणेश जी के स्वरूप का रहस्य गणेश जी का हर अंग गहरा संदेश देता है: बड़ा मस्तक — बड़ा सोचो छोटी आँखें — एकाग्रता बड़े कान — अधिक सुनो छोटा मुख — कम बोलो बड़ा पेट — सब स्वीकार करो एक दाँत — अच्छाई को ग्रहण करो, बुराई छोड़ो उनका वाहन मूषक दर्शाता है कि इच्छाओं पर नियंत्रण जरूरी है।...
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