🔱 कलियुग: पतन का युग या जागरण का अवसर? हिंदू धर्म में समय को चक्र के रूप में देखा गया है। यह चक्र चार युगों में विभाजित है — सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग । वर्तमान समय को शास्त्रों में कलियुग कहा गया है। सामान्य धारणा है कि यह अंधकार, पाप, भ्रम और अधर्म का युग है। लेकिन क्या कलियुग केवल पतन का समय है, या यह आत्मजागरण का भी सबसे बड़ा अवसर है? आइए समझते हैं कलियुग का वास्तविक अर्थ, लक्षण, कारण और इससे मिलने वाली सीख। ⏳ कलियुग क्या है? “कलि” शब्द का अर्थ है — कलह, अशांति, अधर्म और अज्ञान । श्रीमद्भागवत महापुराण, विष्णु पुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णन है कि जब धर्म का प्रभाव कम और अधर्म का प्रभाव अधिक हो जाता है, तब कलियुग का आरंभ होता है। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के बाद कलियुग का प्रारंभ हुआ। 📜 शास्त्रों में वर्णित कलियुग के लक्षण पुराणों में कलियुग के कई संकेत बताए गए हैं, जिनमें से अनेक आज के समय में स्पष्ट दिखाई देते हैं: 1️⃣ धर्म का क्षय धर्म केवल दिखावे तक सीमित रह जाएगा। लोग धार्मिक होंगे, पर आचरण में धर्म नहीं होगा। 2...
“धर्म | संस्कृति | आध्यात्म”