11 जनवरी 2026

National Voters Day 25 January | राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी

 


🗳️ राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी

National Voters’ Day: लोकतंत्र की शक्ति और नागरिक कर्तव्य

लोकतंत्र की आत्मा मतदान में बसती है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में प्रत्येक नागरिक का मत केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का कर्तव्य है।

हर वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है—इस उद्देश्य से कि नागरिकों में मतदान के प्रति जागरूकता बढ़े, युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ा जाए और स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनावों के महत्व को रेखांकित किया जाए।


राष्ट्रीय मतदाता दिवस का इतिहास

भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। इसी ऐतिहासिक दिन को स्मरण करते हुए वर्ष 2011 से 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
इस दिवस का मूल उद्देश्य है—

  • मतदाता पंजीकरण को प्रोत्साहित करना

  • लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान बढ़ाना

  • युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित करना


मतदान: अधिकार भी, कर्तव्य भी

संविधान ने हमें मतदान का अधिकार दिया है, पर लोकतंत्र इसे एक नैतिक कर्तव्य भी मानता है।
मतदान के माध्यम से नागरिक—

  • सरकार चुनते हैं

  • नीतियों की दिशा तय करते हैं

  • देश के भविष्य पर प्रभाव डालते हैं

मतदान से दूरी लोकतंत्र को कमजोर करती है, जबकि सक्रिय भागीदारी इसे मजबूत बनाती है।


युवा मतदाता: लोकतंत्र की नई ऊर्जा

भारत की जनसंख्या में युवाओं की संख्या सर्वाधिक है। यही कारण है कि युवा मतदाता लोकतंत्र की रीढ़ हैं।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस युवाओं को यह संदेश देता है कि—

  • आपका मत महत्वपूर्ण है

  • आपकी आवाज मायने रखती है

  • लोकतंत्र आपकी भागीदारी से ही जीवंत है


स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का महत्व

स्वतंत्र चुनाव लोकतंत्र की पहचान हैं।
भारत निर्वाचन आयोग निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास करता है—

  • EVM और VVPAT

  • मतदाता पहचान

  • आचार संहिता

  • डिजिटल जागरूकता अभियान

ये सभी लोकतंत्र को मजबूत बनाने के स्तंभ हैं।

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राष्ट्रीय मतदाता दिवस के उद्देश्य

इस दिवस के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • नए मतदाताओं का पंजीकरण

  • मतदान प्रतिशत में वृद्धि

  • लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रचार

  • जिम्मेदार नागरिकता का निर्माण


मतदान और राष्ट्र निर्माण

मतदान केवल सरकार चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि—

  • सामाजिक न्याय

  • समान अवसर

  • सुशासन

का आधार भी है।
जब हम मतदान करते हैं, तो हम भारत के भविष्य में भागीदार बनते हैं।


डिजिटल युग और मतदाता जागरूकता

आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से—

  • मतदाता सूची

  • पंजीकरण प्रक्रिया

  • मतदान तिथियाँ

आसान हो गई हैं।
डिजिटल जागरूकता ने लोकतंत्र को और सशक्त बनाया है।


शत-प्रतिशत मतदान: एक संकल्प

राष्ट्रीय मतदाता दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि—

  • हम स्वयं मतदान करेंगे

  • दूसरों को भी मतदान के लिए प्रेरित करेंगे

  • लोकतंत्र को मजबूत बनाएँगे



25 जनवरी – राष्ट्रीय मतदाता दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना का उत्सव है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत की असली शक्ति उसके जागरूक, सक्रिय और जिम्मेदार नागरिक हैं।

🗳️ आइए, मतदान को अपना धर्म बनाएँ और लोकतंत्र को सशक्त करें। 🇮🇳

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🗳️ राष्ट्रीय मतदाता दिवस – 25 जनवरी 🗳️

मतदान केवल अधिकार नहीं,
यह राष्ट्र के प्रति हमारा कर्तव्य है।
एक मत—देश का भविष्य बदल सकता है।

आइए संकल्प लें—
मतदान करेंगे, लोकतंत्र मजबूत करेंगे। 🇮🇳

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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you.

30 जनवरी | महात्मा गांधी | शहीद दिवस | सत्य, अहिंसा और बलिदान का अमर संदेश | Mahatma Gandhi

 


30 जनवरी: महात्मा गांधी – सत्य, अहिंसा और बलिदान का अमर संदेश

Martyrs’ Day | Mahatma Gandhi’s Legacy for Humanity


भारत का इतिहास अनेक महान व्यक्तित्वों से सुसज्जित है, परंतु महात्मा गांधी का स्थान सबसे ऊपर है। वे केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि विचार, जीवन-शैली और नैतिकता की जीवंत प्रतिमूर्ति थे।
30 जनवरी का दिन भारत के लिए अत्यंत भावुक और चिंतन का अवसर है। यह दिन शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि 30 जनवरी 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।


महात्मा गांधी: एक संक्षिप्त परिचय

मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर (गुजरात) में हुआ।
उन्होंने साधारण जीवन, उच्च विचार और आत्मबल के माध्यम से यह सिद्ध किया कि नैतिक शक्ति, शारीरिक शक्ति से कहीं अधिक प्रभावशाली होती है।

गांधी जी का जीवन सत्य, अहिंसा, सेवा और आत्मसंयम पर आधारित था।


30 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व

30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिरला भवन में प्रार्थना सभा के समय गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
यह केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं थी, बल्कि मानवता के लिए एक गहरा आघात था।

भारत सरकार ने इस दिन को शहीद दिवस घोषित किया, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ बलिदान का मूल्य समझ सकें।


सत्य और अहिंसा: गांधी दर्शन की आत्मा

गांधी जी का मानना था कि:

  • सत्य जीवन का आधार है

  • अहिंसा आत्मा की शक्ति है

उन्होंने सिद्ध किया कि बिना हथियार उठाए भी अन्याय के विरुद्ध लड़ा जा सकता है।
आज जब दुनिया हिंसा, युद्ध और असहिष्णुता से जूझ रही है, गांधी जी का दर्शन पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है।


स्वतंत्रता संग्राम में गांधी जी की भूमिका

गांधी जी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को जन-आंदोलन बना दिया।

प्रमुख आंदोलन:

  • चंपारण सत्याग्रह

  • असहयोग आंदोलन

  • दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह)

  • भारत छोड़ो आंदोलन

इन आंदोलनों ने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी।


गांधी जी और सामाजिक सुधार

गांधी जी केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं थे। उन्होंने:

  • छुआछूत का विरोध किया

  • स्वच्छता पर बल दिया

  • ग्राम स्वराज की कल्पना की

  • आत्मनिर्भरता (खादी, स्वदेशी) को बढ़ावा दिया

उनका सपना था — नैतिक, आत्मनिर्भर और समरस भारत

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आज के युग में गांधी जी की प्रासंगिकता

आज का समाज:

  • तनाव

  • हिंसा

  • स्वार्थ

  • नैतिक पतन

से जूझ रहा है। ऐसे समय में गांधी जी का जीवन हमें सिखाता है:

  • धैर्य

  • संयम

  • संवाद

  • करुणा

गांधी जी आज भी समाधान हैं।


शहीद दिवस से हमें क्या सीख मिलती है

30 जनवरी हमें याद दिलाता है कि:

  • स्वतंत्रता सस्ते में नहीं मिली

  • राष्ट्र निर्माण केवल अधिकारों से नहीं, कर्तव्यों से होता है

  • सत्य और नैतिकता ही स्थायी शक्ति हैं


युवाओं के लिए गांधी जी का संदेश

आज के युवाओं के लिए गांधी जी कहते हैं:

“खुद वह बदलाव बनो, जो तुम दुनिया में देखना चाहते हो।”

युवा यदि ईमानदारी, सेवा और नैतिकता को अपनाएँ, तो भारत को कोई नहीं रोक सकता।



30 जनवरी केवल शोक का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आज भी हमारे विचारों, आचरण और निर्णयों में जीवित हैं।

🙏 सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि हम गांधी जी के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें। 🙏

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🙏 30 जनवरी – शहीद दिवस 🙏

महात्मा गांधी का जीवन हमें सिखाता है
कि सत्य और अहिंसा की शक्ति
किसी भी हथियार से अधिक मजबूत होती है।

आइए आज संकल्प लें —
ईमानदारी, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने का।

🌼 राष्ट्रपिता को कोटि-कोटि नमन 🌼

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Republic Day of India | गणतंत्र दिवस | 26 जनवरी 2026

 


🇮🇳 गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026

Republic Day of India – स्वतंत्रता से संविधान तक की गौरवगाथा

भारत का इतिहास केवल तिथियों और घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह त्याग, बलिदान, संघर्ष और आत्मसम्मान की अमर गाथा है। 26 जनवरी का दिन भारत के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ और हमारा देश पूर्ण रूप से गणतंत्र बना।

गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह लोकतंत्र, समानता, न्याय और स्वतंत्रता के मूल्यों का उत्सव है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत की असली शक्ति उसके नागरिकों में निहित है।



गणतंत्र दिवस का ऐतिहासिक महत्व

भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली, लेकिन तब भी देश का शासन अस्थायी कानूनों के आधार पर चल रहा था। स्वतंत्र भारत को एक ऐसे संविधान की आवश्यकता थी जो देश की विविधता, संस्कृति और सामाजिक संरचना को समाहित कर सके।

संविधान निर्माण

डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने लगभग 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन की कड़ी मेहनत के बाद संविधान का निर्माण किया।
26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और देश ने स्वयं को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया।


26 जनवरी क्यों चुनी गई?

26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी।
इस ऐतिहासिक स्मृति को सम्मान देने के लिए संविधान लागू करने की तिथि भी 26 जनवरी रखी गई।

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भारतीय संविधान: लोकतंत्र की आत्मा

भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत लिखित संविधान है।
यह प्रत्येक नागरिक को:

  • समानता का अधिकार

  • स्वतंत्रता का अधिकार

  • धर्म की स्वतंत्रता

  • शोषण के विरुद्ध अधिकार

  • संवैधानिक उपचार का अधिकार

प्रदान करता है।

संविधान हमें केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्यों की भी याद दिलाता है।


गणतंत्र दिवस समारोह

राजपथ (कर्तव्य पथ) पर परेड

नई दिल्ली में होने वाली गणतंत्र दिवस परेड भारत की सांस्कृतिक, सैन्य और सामाजिक शक्ति का भव्य प्रदर्शन होती है।

  • तीनों सेनाओं की झांकी

  • राज्यों की सांस्कृतिक झांकियाँ

  • वीरता पुरस्कार

  • राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण

यह परेड हर भारतीय के हृदय में गर्व भर देती है।


राष्ट्रभक्ति का भाव

गणतंत्र दिवस केवल झंडा फहराने या परेड देखने का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन का अवसर है:

  • क्या हम एक जिम्मेदार नागरिक हैं?

  • क्या हम संविधान का सम्मान करते हैं?

  • क्या हम देश की एकता और अखंडता की रक्षा कर रहे हैं?

सच्ची देशभक्ति कर्तव्यों के पालन से प्रकट होती है।


युवाओं की भूमिका

भारत का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में है।
गणतंत्र दिवस युवाओं को यह संदेश देता है कि:

  • शिक्षा को प्राथमिकता दें

  • सामाजिक एकता बनाए रखें

  • भ्रष्टाचार और अन्याय के विरुद्ध खड़े हों

  • राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ


26 जनवरी 2026 का संदेश

गणतंत्र दिवस 2026 हमें यह संकल्प दिलाए कि:

  • हम संविधान के मूल्यों को जीवन में अपनाएँ

  • जाति, धर्म, भाषा से ऊपर उठकर राष्ट्र को प्राथमिकता दें

  • भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाएँ



गणतंत्र दिवस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का पर्व है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारत की आत्मा उसके संविधान में बसती है और उसकी शक्ति उसके नागरिकों में।

🇮🇳 आइए, इस 26 जनवरी 2026 को संकल्प लें —
संविधान का सम्मान करेंगे,
देश का मान बढ़ाएँगे,
और भारत को विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान देंगे।
🇮🇳


📌 

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🇮🇳 गणतंत्र दिवस 2026 🇮🇳

26 जनवरी केवल एक तारीख नहीं,
यह हमारे संविधान, अधिकारों और कर्तव्यों का उत्सव है।
यह दिन याद दिलाता है कि हम एक स्वतंत्र, संप्रभु और लोकतांत्रिक भारत के नागरिक हैं।

आइए संकल्प लें —
✨ संविधान का सम्मान करें
✨ देश की एकता और अखंडता बनाए रखें
✨ राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🇮🇳🙏

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मकर संक्रांति | Makar Sankranti | Festival of Sun, Transition and Positivity

 


मकर संक्रांति: सूर्य उपासना, परिवर्तन और उत्सव का महापर्व

Makar Sankranti – Festival of Sun, Transition and Positivity

मकर संक्रांति भारत के उन गिने-चुने पर्वों में से है, जो खगोलीय घटना पर आधारित है। यह केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि, विज्ञान और आध्यात्म का सुंदर संगम है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है—जिसे शुभता, ऊर्जा और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक माना गया है।

भारत के अलग-अलग राज्यों में यह पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है—उत्तर भारत में मकर संक्रांति, तमिलनाडु में पोंगल, असम में भोगाली बिहू, पंजाब में लोहड़ी और गुजरात में उत्तरायण। नाम भले बदल जाएँ, पर भाव एक ही रहता है—कृतज्ञता, उल्लास और नव आरंभ


मकर संक्रांति क्या है? (What is Makar Sankranti)

मकर संक्रांति वह तिथि है जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। यह आमतौर पर 14 या 15 जनवरी को पड़ती है। इसी के साथ सूर्य की गति उत्तरायण हो जाती है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत पवित्र माना गया है।

उत्तरायण का अर्थ है—ऊपर की ओर जाना, प्रकाश की ओर बढ़ना। यह अंधकार से प्रकाश, जड़ता से जागरण और नकारात्मकता से सकारात्मकता की यात्रा का प्रतीक है।


मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व (Mythological Significance)

सूर्य उपासना

वेदों और पुराणों में सूर्य देव को जीवनदाता, ऊर्जा का स्रोत और साक्षात देवता माना गया है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य की पूजा करने से—

  • स्वास्थ्य में सुधार

  • आत्मबल में वृद्धि

  • मानसिक स्पष्टता

मिलती है।

भीष्म पितामह और उत्तरायण

महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने उत्तरायण के प्रारंभ की प्रतीक्षा कर शरीर त्याग किया था। इस कारण उत्तरायण काल को मोक्षदायी माना गया है।


मकर संक्रांति का वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Perspective)

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक आधार अत्यंत सशक्त है—

  • इस समय सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक सीधी पड़ती हैं

  • ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है

  • दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं

  • शरीर में विटामिन-D का निर्माण बढ़ता है

👉 यही कारण है कि इस पर्व को स्वास्थ्य और ऊर्जा का पर्व भी कहा जाता है।


तिल-गुड़ का महत्व (Significance of Til & Jaggery)

मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ खाने की परंपरा है। इसके पीछे गहरा संदेश छिपा है—

  • तिल: दृढ़ता, सहनशीलता

  • गुड़: मिठास, सौहार्द

लोकप्रिय कहावत है—
“तिल गुड़ खा और मीठा-मीठा बोल”
अर्थात जीवन में कटुता छोड़कर मधुरता अपनाएँ।


दान-पुण्य का विशेष महत्व (Charity & Virtue)

मकर संक्रांति पर किया गया दान अत्यंत फलदायी माना गया है—

  • तिल

  • गुड़

  • कंबल

  • अन्न

  • वस्त्र

इस दिन गरीबों, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

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गंगा स्नान का आध्यात्मिक रहस्य | Spiritual Power of Ganga


गंगा स्नान और पवित्र नदियों में स्नान

मकर संक्रांति पर गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है।
विशेषकर प्रयागराज, हरिद्वार और वाराणसी में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है।

गंगा स्नान—

  • पापों के क्षय का प्रतीक

  • आत्मशुद्धि का माध्यम

  • आध्यात्मिक जागरण का अवसर


भारत में मकर संक्रांति के विविध रूप

उत्तर भारत

  • गंगा स्नान

  • दान-पुण्य

  • खिचड़ी का प्रसाद

गुजरात

  • पतंग उत्सव (उत्तरायण)

  • आकाश में रंग-बिरंगी पतंगें

  • आनंद और उत्साह

तमिलनाडु

  • पोंगल

  • नई फसल का उत्सव

  • सूर्य देव को अर्पण

पंजाब

  • लोहड़ी

  • अग्नि पूजन

  • लोकगीत और नृत्य

👉 यह दर्शाता है कि मकर संक्रांति एकता में विविधता का पर्व है।


आध्यात्मिक संदेश (Spiritual Message)

मकर संक्रांति हमें सिखाती है—

  • पुराने दुःख और नकारात्मकता छोड़ें

  • नए संकल्प लें

  • जीवन में प्रकाश और ऊर्जा को अपनाएँ

यह पर्व आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन का अवसर देता है।


आधुनिक जीवन में मकर संक्रांति (Relevance Today)

आज के तनावपूर्ण जीवन में मकर संक्रांति—

  • आशा का संचार करती है

  • जीवन में संतुलन सिखाती है

  • प्रकृति के प्रति कृतज्ञ बनाती है

यह पर्व हमें प्रकृति, समाज और स्वयं से जोड़ता है।



मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाला पर्व है। यह सूर्य की तरह हमें भी अंधकार से प्रकाश की ओर, निराशा से आशा की ओर और जड़ता से जागरण की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।

मकर संक्रांति सभी के जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि लाए।


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🌞 मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌾🪁

सूर्य के उत्तरायण होने का यह पावन पर्व
अंधकार से प्रकाश की ओर,
नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर
आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

तिल-गुड़ की मिठास, पतंगों की उड़ान
और सूर्यदेव की कृपा
आपके जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि लाए।

शुभ मकर संक्रांति

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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you.

08 जनवरी 2026

Spiritual Power of Ganga | गंगा स्नान का आध्यात्मिक रहस्य | | Spiritual Insight


गंगा स्नान का आध्यात्मिक रहस्य

Spiritual Power of Ganga

भारत की पावन धरती पर बहने वाली माँ गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि जीवंत आध्यात्मिक चेतना हैं। शास्त्रों में गंगा को मोक्षदायिनी, पापनाशिनी और जीवनदायिनी कहा गया है। युगों-युगों से श्रद्धालु गंगा स्नान को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम मानते आए हैं।

गंगा स्नान का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य भी छिपा है।


गंगा का पौराणिक महत्व

पुराणों के अनुसार, माँ गंगा का अवतरण राजा भगीरथ के कठोर तप से हुआ था। गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने का उद्देश्य था—
👉 पूर्वजों का उद्धार
👉 पृथ्वी को पवित्र करना
👉 मानव जीवन को धर्म के मार्ग से जोड़ना

भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण कर उनके वेग को शांत किया। इसी कारण गंगा को शिवस्वरूपा भी कहा जाता है।


गंगा स्नान का आध्यात्मिक अर्थ

गंगा स्नान केवल शरीर की शुद्धि नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा की शुद्धि का साधन है।

1. पापों का क्षय

शास्त्रों में कहा गया है कि श्रद्धा और नियम से किया गया गंगा स्नान—

  • पापों का नाश करता है

  • नकारात्मक संस्कारों को दूर करता है

2. आत्मिक शांति

गंगा के पवित्र जल में स्नान करने से—

  • मन शांत होता है

  • ध्यान और साधना में स्थिरता आती है

3. मोक्ष की भावना

इसी कारण गंगा तट को तीर्थराज कहा गया है।
कुंभ, माघ मेला और पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है।

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गंगा स्नान का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

आधुनिक विज्ञान भी गंगा की विशेषताओं को स्वीकार करता है।

  • गंगा जल में बैक्टीरियोफेज पाए जाते हैं, जो हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करते हैं

  • गंगा जल लंबे समय तक खराब नहीं होता

  • इसका सकारात्मक प्रभाव मन और शरीर पर पड़ता है

👉 यही कारण है कि गंगा स्नान के बाद व्यक्ति स्वयं को हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है।


गंगा स्नान कब और कैसे करें?

शुभ अवसर

  • माघ पूर्णिमा

  • अमावस्या

  • एकादशी

  • कुंभ एवं अर्धकुंभ

  • गंगा दशहरा

विधि

  • स्नान से पूर्व मन में शुद्ध संकल्प लें

  • “ॐ नमः शिवाय” या “गंगे च यमुने…” मंत्र का जाप करें

  • स्नान के बाद दान-पुण्य अवश्य करें


गंगा स्नान का जीवन पर प्रभाव

गंगा स्नान व्यक्ति को—

  • अहंकार से मुक्त करता है

  • करुणा और भक्ति की ओर ले जाता है

  • जीवन के उद्देश्य की याद दिलाता है

गंगा स्नान = बाहरी शुद्धि + आंतरिक परिवर्तन



गंगा स्नान कोई साधारण कर्म नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा है।
जब श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ गंगा में डुबकी लगाई जाती है,
तो वह केवल शरीर को नहीं, जीवन को पवित्र कर देती है।

🙏 माँ गंगा सभी को शांति, पवित्रता और मोक्ष प्रदान करें। 🙏


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07 जनवरी 2026

पंच महायज्ञ क्या है? | What are Pancha Mahayagya | Spiritual Insight

 



सनातन धर्म में पंचमहायज्ञ

Five Great Yajnas Explained in Hinduism


सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पूर्ण और वैज्ञानिक पद्धति है। इसमें व्यक्ति, समाज, प्रकृति और ब्रह्मांड—सभी के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए ऋषियों ने पंचमहायज्ञ (Pancha Maha Yajna) की अवधारणा दी।

पंचमहायज्ञ मानव को यह सिखाते हैं कि जीवन केवल “मैं” तक सीमित नहीं है, बल्कि “हम” से जुड़ा हुआ है। ये यज्ञ आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने वैदिक काल में थे।


पंचमहायज्ञ क्या हैं? (What are Pancha Maha Yajnas?)

पंचमहायज्ञ का अर्थ है – पाँच महान यज्ञ या पाँच पवित्र कर्तव्य।
हर गृहस्थ को प्रतिदिन इन यज्ञों का पालन करना चाहिए।

ये पाँच महायज्ञ हैं:

  1. ब्रह्म यज्ञ (Brahma Yajna)

  2. देव यज्ञ (Deva Yajna)

  3. पितृ यज्ञ (Pitru Yajna)

  4. भूत यज्ञ (Bhuta Yajna)

  5. मनुष्य यज्ञ (Manushya Yajna)


1. ब्रह्म यज्ञ – ज्ञान का यज्ञ

Brahma Yajna – Yajna of Knowledge

ब्रह्म यज्ञ का संबंध वेदों, उपनिषदों, गीता और शास्त्रों के अध्ययन से है।

अर्थ

  • स्वयं अध्ययन करना

  • ज्ञान को दूसरों तक पहुँचाना

  • गुरु और विद्या के प्रति कृतज्ञता

आधुनिक संदर्भ

आज के समय में ब्रह्म यज्ञ का अर्थ है:

  • अच्छी पुस्तकें पढ़ना

  • बच्चों को संस्कार देना

  • आध्यात्मिक ज्ञान को डिजिटल माध्यम से फैलाना

👉 ज्ञान का दान सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है।

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एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है?


2. देव यज्ञ – प्रकृति और देवताओं के प्रति कृतज्ञता

Deva Yajna – Gratitude to Gods & Nature

देव यज्ञ केवल हवन-पूजन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण का प्रतीक है।

अर्थ

  • अग्नि, सूर्य, जल, वायु का सम्मान

  • यज्ञ, दीप, मंत्र और प्रार्थना

आधुनिक अर्थ

  • पेड़ लगाना

  • जल संरक्षण

  • प्रदूषण कम करना

🌿 आज का पर्यावरण संकट देव यज्ञ की उपेक्षा का परिणाम है।


3. पितृ यज्ञ – पूर्वजों का स्मरण

Pitru Yajna – Respect for Ancestors

पितृ यज्ञ हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है।

अर्थ

  • पूर्वजों का सम्मान

  • श्राद्ध, तर्पण

  • पारिवारिक मूल्यों को आगे बढ़ाना

भावनात्मक पक्ष

हम जो कुछ भी हैं, वह हमारे पूर्वजों के संस्कारों का परिणाम है।
उनका स्मरण हमें विनम्र बनाता है।


4. भूत यज्ञ – सभी जीवों के प्रति करुणा

Bhuta Yajna – Compassion for All Living Beings

यह यज्ञ मानव को करुणा और सह-अस्तित्व सिखाता है।

अर्थ

  • पशु-पक्षियों को अन्न देना

  • चींटी, गाय, कुत्ते, पक्षियों का ध्यान रखना

आधुनिक दृष्टि

  • Animal welfare

  • अहिंसा

  • जैव विविधता का संरक्षण

🐄 “वसुधैव कुटुम्बकम्” का वास्तविक रूप भूत यज्ञ है।


5. मनुष्य यज्ञ – सेवा और सहयोग

Manushya Yajna – Service to Humanity

मनुष्य यज्ञ सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है।

अर्थ

  • अतिथि सत्कार

  • भूखे को भोजन

  • जरूरतमंद की सहायता

आज के समय में

  • शिक्षा में सहयोग

  • गरीबों की मदद

  • सेवा भाव से किया गया कार्य

❤️ सेवा ही सच्चा धर्म है।


पंचमहायज्ञ और आधुनिक जीवन

Pancha Maha Yajna in Modern Life

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पंचमहायज्ञ:

  • मानसिक शांति देते हैं

  • सामाजिक संतुलन बनाते हैं

  • पर्यावरण की रक्षा करते हैं

ये यज्ञ हमें स्वार्थ से परमार्थ की ओर ले जाते हैं।


पंचमहायज्ञ का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

Scientific Perspective of Pancha Maha Yajna

  • ब्रह्म यज्ञ → मानसिक विकास

  • देव यज्ञ → पर्यावरण संतुलन

  • पितृ यज्ञ → भावनात्मक स्थिरता

  • भूत यज्ञ → जैव संतुलन

  • मनुष्य यज्ञ → सामाजिक समरसता

👉 यह एक होलिस्टिक लाइफ सिस्टम है।



पंचमहायज्ञ केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि जीवन को सुंदर, संतुलित और सार्थक बनाने का मार्ग हैं।
यदि हर व्यक्ति इन पाँच यज्ञों को अपने जीवन में उतार ले, तो समाज स्वतः ही सुखी और समृद्ध बन सकता है।

🙏 सनातन धर्म का यही शाश्वत संदेश है।



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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you.


06 जनवरी 2026

Ekadashi Vrat Benefits | एकादशी व्रत का महत्व, विधि और लाभ


एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है?

Ekadashi Vrat Benefits | एकादशी व्रत का महत्व, विधि और लाभ

भारतीय सनातन परंपरा में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह केवल एक धार्मिक उपवास नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक साधन है। हर महीने आने वाली एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इसे मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना गया है।

  • एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है

  • एकादशी का धार्मिक महत्व

  • एकादशी व्रत के आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक लाभ

  • एकादशी व्रत की विधि

  • एकादशी से जुड़े शास्त्रीय संदर्भ

  • एकादशी व्रत से जीवन में आने वाले सकारात्मक परिवर्तन


एकादशी क्या है?

हिंदू पंचांग के अनुसार पूर्णिमा और अमावस्या के बाद ग्यारहवें दिन को एकादशी कहा जाता है।
एक महीने में दो एकादशी होती हैं—

  1. शुक्ल पक्ष की एकादशी

  2. कृष्ण पक्ष की एकादशी

इस प्रकार वर्ष भर में कुल 24 एकादशी (अधिक मास में 26) आती हैं।


एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व

📜 शास्त्रों में वर्णन

पद्म पुराण, विष्णु पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और गरुड़ पुराण में एकादशी व्रत का विस्तार से वर्णन मिलता है।

शास्त्रों के अनुसार—

“एकादशी व्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ है।”

भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अर्जुन को गीता में बताया कि एकादशी व्रत मनुष्य को पापों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाता है।


एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है?

1️⃣ भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति हेतु

एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

2️⃣ पापों से मुक्ति के लिए

मान्यता है कि एकादशी व्रत से—

  • जन्म-जन्मांतर के पाप कटते हैं

  • पूर्व कर्मों के दोष शांत होते हैं

3️⃣ मोक्ष प्राप्ति का मार्ग

एकादशी को मोक्षदायिनी तिथि कहा गया है। नियमित एकादशी व्रत आत्मा को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त करने में सहायक माना गया है।


एकादशी व्रत का आध्यात्मिक महत्व

🕉️ मन और आत्मा की शुद्धि

उपवास और जप-ध्यान से—

  • इंद्रियों पर नियंत्रण होता है

  • मन शांत और स्थिर होता है

  • आत्मचिंतन की क्षमता बढ़ती है

🕉️ भक्ति और वैराग्य का विकास

एकादशी व्रत व्यक्ति को भोग से योग की ओर ले जाता है।
इस दिन—

  • भगवान विष्णु का स्मरण

  • नाम जप

  • विष्णु सहस्रनाम पाठ

  • भागवत कथा श्रवण
    विशेष फलदायी माना गया है।


एकादशी व्रत के शारीरिक लाभ (Scientific Benefits)

🔬 आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार—

  • उपवास पाचन तंत्र को विश्राम देता है

  • शरीर से विषैले तत्व (toxins) बाहर निकलते हैं

💪 स्वास्थ्य लाभ

  • पाचन शक्ति मजबूत होती है

  • वजन संतुलन में रहता है

  • इम्यून सिस्टम बेहतर होता है

  • रक्त शुद्ध होता है

आधुनिक विज्ञान भी Intermittent Fasting को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानता है, जो एकादशी व्रत से मेल खाता है।


एकादशी व्रत के मानसिक लाभ

🧠

  • तनाव में कमी

  • सकारात्मक सोच का विकास

  • मानसिक अनुशासन

  • एकाग्रता में वृद्धि

नियमित उपवास मन को संयम और आत्मनियंत्रण सिखाता है।

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एकादशी व्रत की विधि (Ekadashi Vrat Vidhi)

🌅 व्रत से एक दिन पहले (दशमी)

  • सात्त्विक भोजन करें

  • चावल, मांस, मदिरा का त्याग करें

  • मन को शांत रखें

🌄 एकादशी के दिन

  • ब्रह्ममुहूर्त में स्नान

  • भगवान विष्णु की पूजा

  • तुलसी दल अर्पण

  • विष्णु मंत्र जप

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

🌙 द्वादशी पारण

  • द्वादशी तिथि में व्रत खोलें

  • ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करें


एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं?

✔️ क्या खाएं

  • फल

  • दूध

  • साबूदाना

  • कुट्टू का आटा

  • सिंघाड़े का आटा

❌ क्या न खाएं

  • चावल

  • गेहूं

  • दाल

  • मांसाहार

  • तामसिक भोजन


एकादशी और चावल का निषेध क्यों?

पौराणिक मान्यता के अनुसार—
एकादशी तिथि में चावल में पाप का वास होता है।
इसलिए एकादशी व्रत में चावल का सेवन वर्जित माना गया है।


प्रमुख एकादशी व्रत और उनका महत्व

  • निर्जला एकादशी – सबसे कठिन और फलदायी

  • देवशयनी एकादशी – चातुर्मास आरंभ

  • देवउठनी एकादशी – शुभ कार्यों की शुरुआत

  • मोक्षदा एकादशी – गीता जयंती


एकादशी व्रत और कर्म सिद्धांत

एकादशी व्रत हमें सिखाता है—

  • संयम

  • त्याग

  • सेवा

  • आत्मानुशासन

यह कर्मों की शुद्धि और जीवन सुधार का माध्यम है।


एकादशी व्रत से जीवन में आने वाले परिवर्तन

  • मानसिक शांति

  • पारिवारिक सुख

  • आध्यात्मिक जागृति

  • सकारात्मक ऊर्जा

  • ईश्वर से निकटता



एकादशी व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन दर्शन है।
यह शरीर को स्वस्थ, मन को शांत और आत्मा को पवित्र बनाता है।

जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत करता है, उसके जीवन में ईश्वरीय कृपा, संतुलन और शांति अवश्य आती है।

🌿 “एकादशी व्रत – भोग से योग की ओर जाने का सेतु है।”


🔖 

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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

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