09 मार्च 2024

Harishankar Sharma | हरिशंकर शर्मा (साहित्यकार)

 




#साहित्यकार

#हरिशंकर शर्मा #Harishankar Sharmaका जन्म 19 अगस्त 1891 ई. को उत्तर प्रदेश में #अलीगढ़ जनपद के #हरदुआगंज कस्बे में हुआ था। उनके पिता का नाम #पंडित_नाथूराम_शंकर_शर्मा था जोकि हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे। बचपन से ही उन्हें घर में साहित्यिक वातारण मिला था, जिसका पंडित जी पर विशेष रूप से प्रभाव पड़ा। एक दिन वह भी आया कि वे राष्ट्र के मूर्धन्य साहित्यकारों में गिने जाने लगे थे।

🇮🇳 हिंदी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार, कवि, लेखक, व्यंग्यकार और पत्रकार स्व. हरिशंकर शर्मा। उन्हें उर्दू, फ़ारसी, गुजराती तथा मराठी आदि भाषाओं का अच्छा ज्ञान था। पंडित हरिशंकर शर्मा हिन्दी के कुछ गिने चुने हास्य लेखकों में से एक थे। इनकी गिनती अपने समय के उच्च कोटि के पत्रकारों में होती थी। उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं का सफल सम्पादन किया था।

🇮🇳 अपनी रचनाओं के माध्यम से हरिशंकर शर्मा #समाज में फैली रूढ़ियों, कुरीतियों तथा अन्य बुराइयों पर करारी चोट करते थे। ‘आर्यमित्र’ तथा ‘भाग्योदय’ के अतिरिक्त आपने, ‘आर्य संदेश’, ‘निराला’, ‘साधना’, ‘प्रभाकर’, ‘सैनिक’, ‘कर्मयोग’, ‘ज्ञानगंगा’ तथा ‘दैनिक दिग्विजय’ आदि कई पत्र-पत्रिकाओं का कुशलता एवं स्वाभिमान के साथ #सम्पादन किया था। वे उनमें विविध विषयों से संबंधित साम्रगी के साथ-साथ सुरुचिपूर्ण हास्य-व्यंग्य की रचनाएँ भी प्रकाशित करते थे। इन रचनाओं के माध्यम से वे समाज में व्याप्त कुरीतियों, रूढियों तथा विभीषिकाओं पर कारारी चोट करते थे। ‘आर्यमित्र’ के सम्पादन के दिनों में सर्वश्री #बनारसीदास_चतुर्वेदी, #डाॅ_सत्येन्द्र तथा #रामचन्द्र_श्रीवास्तव जैसे सुयोग्य व्यक्तियों का सहयोंग उन्हें प्राप्त हुआ था। ‘आर्यमित्र’ का सम्पादन पंडित जी से पूर्व #पंडित_रूद्रदत्त_शर्मा सम्पादकाचार्य तथा #लक्ष्मीधर_वाजपेयी ‘सर्वानन्द’ के नाम से कर चुके थे।

🇮🇳 पंडित हरिशंकर शर्मा जहाँ गंभीर रचनाएँ लिखने के लिए प्रसिद्ध थे, वहीं उनकी #हास्य-व्यंग्य पूर्ण रचनाएँ भी सोद्देश्य होती थीं। वे विशिष्ट भाषा-शैली तथा भाव-भंगिमा लिए होती थीं। जहाँ अधिकतर हास्य-व्यंग्य की रचनाएँ केवल मंनोरंजन के उद्देश्य से फूहड़पन, अश्लीलता तथा निम्न कोटि की होती थीं, वहीं पंडित जी की रचनाओं में स्वस्थ मनोरंजन तो होता ही था, उनमें समाज की कुरीतियों पर भी करारी चोट होती थी। उनमें भाषा तथा विचारों का फूहड़पन नहीं होता था।

🇮🇳 हरिशंकर शर्मा की मृत्यु 9 मार्च 1968 को हुई ।

साभार: sahityakalp.com

🇮🇳 #पद्मश्री से सम्मानित; भारत के प्रसिद्ध #स्वतंत्रतासेनानी, #साहित्यकार, #कवि, #लेखक, #व्यंग्यकार और #पत्रकार #हरिशंकर_शर्मा जी को उनकी पुण्यतिथि पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से शत्-शत् नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि !

🇮🇳💐🙏

#प्रेरणादायी_व्यक्तित्व

#आजादी_का_अमृतकाल


साभार: चन्द्र कांत  (Chandra Kant) राष्ट्रीय उपाध्यक्ष - मातृभूमि सेवा संस्था 



सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you. 

Phulo and Jhano Murmu | फूलो और झानो मुर्मू | संथाल क्रांति की महिला वीरांगना




🇮🇳 #संथाल_क्रांति #santhal_revolution की महिला वीरांगना #फूलो और #झानो मुर्मू  #Phulo and #Jhano #Murmu! 

🇮🇳 फूलो और झानो दुश्मनों के शिविर में भागी, अँधेरे की आड़ में और अपनी कुल्हाड़ी चलाते हुए, उन्होंने 21 ब्रिटिश सैनिकों को खत्म कर दिया। 🇮🇳

🇮🇳 फूलो मुर्मू और झानो मुर्मू को अपने संथाल आदिवासी भाइयों के बीच भी वीर #क्रांतिकारी सेनानियों #revolutionary fighters के रूप में जाना जाता है। उनके बारे में क्रांतिकारी क्या है? उनके बारे में वीर क्या है? फूलो और झानो पूर्वी भारत, आज के #झारखंड में संथाल जनजाति के #मुर्मू कबीले की थी। वे अपने पुरुष समकक्षों से कम क्रांतिकारी नहीं थी।

🇮🇳 उनके भाई, #सिदो, #कान्हू, #चंद और #भैरव के बारे में कहा जाता था कि उन्होंने 1855 में संथाल विद्रोह को जन्म दिया था। यह उनके जीवन में ब्रिटिश विद्रोहियों के खिलाफ एक विद्रोह था, विशेष रूप से स्वतंत्र व्यापारियों को प्रोत्साहित करने और साहूकारों का शोषण करने से।

🇮🇳 संथाल एक प्रवासी जनजाति थे। 1780 के दशक के बाद से, उन्होंने राजमहल पहाड़ी श्रृंखला में प्रवेश किया, जो पहले से ही माल्टो (पहाड़िया) जनजाति के कब्ज़े में था। उन्हें शुरू में अंग्रेज़ों द्वारा वनों को खाली करने और किसानों और पशु चराने वालों के रूप में बसने के लिए प्रोत्साहित किया गया था लेकिन अंग्रेज़ों ने क्षेत्र में नि:शुल्क प्रवेश के साथ जबरन धन उधार देने वाले और छोटे व्यापारियों को भी प्रोत्साहित किया।

🇮🇳 विवादास्पद मुद्दा था अंग्रेज़ों को भू-राजस्व के रूप में अपने खज़ाने में डालने के लिए धन की आवश्यकता, इसलिए उन्हें लगा कि मनी लेंडर्स आदिवासियों की वित्तीय व्यवहार्यता को बढ़ाएंगे। यहीं से आदिवासियों को चुटकी का एहसास होने लगा।

🇮🇳 साहूकारों और ब्रिटिश अभावों ने आदिवासियों के कृषि विस्तार को हथियाना शुरू कर दिया।

🇮🇳 कर बकाएदारों की भूमि को नीलाम कर दिया गया और इस तरह भूस्वामी पनप गया।

🇮🇳 दूर भागलपुर में काम कर रही अदालत प्रणाली ने कोई राहत नहीं दी।

🇮🇳 पुलिस और प्रशासन के निचले ग्रेड के कर्मचारियों के बीच भ्रष्टाचार बड़ी तेज़ी से बढ़ा।

🇮🇳 ऐसा तब था, जब झारखंड के #बरहेट के पास #बोगनाडीह में मुर्मू परिवार में सबसे बड़े सिदो ने अपने ईश्वर से एक दर्शन का दावा किया था, जिसने कथित तौर पर उसे बताया था कि बड़े पैमाने पर विद्रोह से ही शोषण की आज़ादी संभव है। जल्द ही मुर्मू भाइयों ने संचार के साधन के रूप में साल (श्योरा रोबस्टा) शाखाओं के साथ दूत भेजे।

🇮🇳 संदेश आग की तरह फैल गया। पंचकटिया में इकट्ठा होने के लिए एक दिन तय किया गया था। मैमथ भीड़ को सिदो के दूरदर्शी पते से प्रभावित किया गया था। डिग्गी पुलिस चौकी के प्रभारी अधिकारी घटनास्थल पर दिखाई दिए और तितर-बितर होने का आदेश दिया। जल्द ही उसे मौके पर पहुँचकर भुगतान करना पड़ा। उनके रक्त ने भीड़ को और अधिक प्रोत्साहन दिया जो चिल्लाया, ‘डेलबोन’ (हमें जाने दो।)

🇮🇳 बाहर वे उन्माद में भाग गए पर वे रोष में चले गए। धनुष और तीर, भाले और कुल्हाड़ी और अन्य शिकार के औजार उनकी पसंद के हथियार थे। भीड़ की भीड़ ज़मींदारों, साहूकारों और क्षुद्र व्यापारियों से बदला लेना चाहती थी। भंडार गृहों और अन्न भंडार को लूट लिया गया या आग की लपटों में समा गया। आंदोलन छिटपुट और आक्षेपपूर्ण चला गया। कुछ महीने हुए। समूह #कलकत्ता में ब्रिटिश मुख्यालय में पहुँचना चाहता था लेकिन #महेतपुर से परे, #बरहेट से 70 किलोमीटर दूर, वे आगे नहीं बढ़ सके।

🇮🇳 रिंग लीडर, सिदो और कान्हू को गिरफ्तार किया गया और उन्हें मार दिया गया। यह अनुमान लगाया जाता है कि दस हज़ार से अधिक संथालों ने #स्वतंत्रता और #पहचान के लिए अपना जीवन लगा दिया।

🇮🇳 इन सबमें फूलो और झानो कहाँ हैं? कुछ शोध विद्वानों के अनुसार, फूलो और झानो दुश्मनों के शिविर में भागी, अंधेरे की आड़ में और अपनी कुल्हाड़ी चलाते हुए, उन्होंने 21 सैनिकों को खत्म कर दिया। इसने उनके साथियों की भावना को प्रभावित किया। वे आदिवासी नायिकाओं का समूह बनाती हैं, जिन्होंने अपने पुरुष लोक के साथ संघर्ष किया और अपने जीवन को संवार दिया।

🇮🇳 आदिवासी स्वतंत्रता आंदोलनों में आदिवासी महिलाओं की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। झारखंड का इतिहास और उसकी पहचान अखाड़े में महिलाओं की क्रांतिकारी भूमिका के बिना पूरी नहीं हो सकती। अक्सर ऐसा नहीं होता कि इन महिलाओं को सम्मानित किया जाता है या उन्हें याद भी किया जाता है।

🇮🇳 भारत के झारखंड के छोटानागपुर की शोधकर्ता #वासवी_कीरो ने अपनी बुकलेट उलगुलान की ओरथेन (क्रांति की महिला) में उन नायिकाओं को दर्ज किया है, जो स्वतंत्रता और आदिवासी पहचान के कारण शहीद हो गई थीं। 1855-56 के संथाल विद्रोह में फूलो और झानो मुर्मू, बिरसा मुंडा उलगुलान 1890-1900 में #बंकी_मुंडा, #मंझिया_मुंडा और #दुन्दंगा_मुंडा की पत्नियां #माकी, #थीगी, #नेगी, #लिंबू, #साली और #चंपी और पत्नियां, ताना अंधोलन (1914) में #देवमणि उर्फ ​​बंदानी और रोहतासगढ़ प्रतिरोध में #सिंगी_दाई और #कैली_दाई (उरोन महिलाओं ने पुरुषों के रूप में कपड़े पहने और दुश्मन के हमले का सामना किया) के नाम चर्चित हैं।

🇮🇳 इतिहास ने कई अन्य लोगों को दर्ज नहीं किया होगा, जिनकी आदिवासी आंदोलनों में भूमिका ने चमक और जीवन शक्ति को जोड़ा। यह आशा की जाती है कि युवा जनजातीय पीढ़ी ऐतिहासिक तथ्यों पर शोध करेगी और कई और जनजातीय नायिकाओं का पता लगाएगी।

साभार: youthkiawaaz.com

🇮🇳 #मातृभूमि को समर्पित #संथाल_क्रांति से जुड़ी अमर क्रांतिकारी #आदिवासी वीरांगनाओं को कोटि-कोटि नमन !

🇮🇳💐🙏

वन्दे मातरम् 🇮🇳

#प्रेरणादायी_व्यक्तित्व

#आजादी_का_अमृतकाल


साभार: चन्द्र कांत  (Chandra Kant) राष्ट्रीय उपाध्यक्ष - मातृभूमि सेवा संस्था 



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Mewar ki Rani Karnavati | मेवाड़ की रानी वीरांगना कर्णावती

 



रानी कर्णावती  ने  8 मार्च 1535 को जौहर कर लिया था।  यह मेवाड़ का दूसरा जौहर माना जाता है। 

#रानी_कर्णावती #Mewar ki #Rani_Karnavati  को रानी #कर्मावती के नाम से भी जाना जाता है (मृत्यु 8 मार्च 1534), #भारत के #बूंदी की एक राजकुमारी और अस्थायी शासक थीं । उनका विवाह #मेवाड़ के #राणा_सांगा (लगभग 1508-1528) से हुआ था । वह अगले दो राणाओं, राणा विक्रमादित्य और राणा उदय सिंह की माँ और महाराणा प्रताप की दादी थीं । उन्होंने 1527 से 1533 तक अपने बेटे के अल्पवयस्क होने के दौरान संरक्षिका के रूप में कार्य किया। वह अपने पति की तरह ही उग्र थीं और उन्होंने सैनिकों की एक छोटी सी टुकड़ी के साथ चित्तौड़ की रक्षा की जब तक कि वह गुजरात  की सेना जिसका नेतृत्व गुजरात के बहादुर शाह ने किया था के हाथों नहीं घिर गई, रानी कर्णावती ने  भागने से इनकार कर दिया और अपने सम्मान की रक्षा के लिए जौहर कर लिया।

🇮🇳 #रानी कर्णावती #Rani Karnavati अपने बलिदान के लिए जानी जाने वाली उन बहादुर रानियों में से एक है। जो अपनी जान तो दे दी लेकिन दुश्मन के सामने अपने घुटने नहीं टेके। कर्णावती चित्तौड़ के राजा राणा सांगा की पत्नी थी। आपको बता दें कि 1526 में मुगल बादशाह बाबर ने दिल्ली पर अपना कब्जा कर लिया था। जिसके चलते मेवाड़ के राजा राणा सांगा ने बाबर के खिलाफ राजपूत शासकों का एक दल चलाया था। जिसके बाद खानुआ की लड़ाई में राणा सांगा की पराजय हो गई थी इस युद्ध में इन्हें काफी गहरे घाव लगे थे जिसकी वजह से इनकी कुछ दिनों में मृत्यु हो गई थी।

🇮🇳 रानी कर्णावती के दो बेटे थे जिनका नाम राणा उदय सिंह और राणा विक्रमादित्य था। राजा राणा सांगा की मृत्यु के बाद रानी ने अपने बड़े विक्रमादित्य को राज गद्दी पर बैठाया लेकिन पूरा राज्यभार संभालने के लिए इस राजा की उम्र काफी छोटी थी। इसी बीच गुजरात के बहादुरशाह ने दूसरी बार मेवाड़ पर हमला कर दिया। इस युद्ध में राजा विक्रमादित्य की हार देखने को मिली। जिसके बाद रानी कर्णावती ने राज्य के सम्मान की रक्षा करने के लिए अन्य राजपूत राजाओं से अपील की।

🇮🇳 रानी कर्णावती से राजपूत शासकों ने एक शर्त रखी। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य और उदय सिंह को युद्ध के दौरान बूंदी जाने की अपील की। रानी ने इस शर्त को स्वीकार कर लिया। जिसके बाद उन्होंने अपनी भरोसेमंद दासी पन्ना के साथ अपने दोनों बेटों को बूंदी भेज दिया। आपको बता दें कि पन्ना ने इस जवाबदेही को ईमानदारी से स्वीकार भी किया।

🇮🇳 हर #रक्षाबंधन पर रानी कर्णावती को याद किया जाता है। इस रानी ने अपने राज्य की सुरक्षा के लिए 1534 में हुमायूं को राखी भेजी थी। बताया जाता है कि रानी कर्णावती की राखी को स्वीकार कर हुमायूं ने इस राखी की लाज बचाई थी। #हुमायूं ने रानी कर्णावती को अपनी बहन का दर्जा दिया था उम्रभर रक्षा करने का वचन दिया था। इस भाई - बहन के प्यार को आज भी याद किया जाता है। कहा जाता है कि राखी मिलते ही राजा ने ढेरों उपहार भेजे और मेवाड़ की सुरक्षा के लिए आगे आए।

🇮🇳 हुमायूं राखी मिलने के बाद चित्तौड़ के लिए रवाना हुआ लेकिन वह समय से पहुंचने पर नाकाम साबित हुआ। जिसके चलते बहादुरशाह ने चितौड़ पर प्रवेश कर लिया। यह देखते हुए रानी कर्णावती को अपनी हार दिखने लगी जिसके बाद 8 मार्च के दिन अन्य महिलाओं के साथ रानी कर्णावती ने जौहर कर लिया। कहा जाता है यह #मेवाड़ का दूसरा दिल दहलाने वाला जौहर माना जाता है। हुमायूं ने #बहादुरशाह को युद्ध में पराजित किया। #कर्णावती के बड़े बेटे को राजगद्दी से बहाल कर दिया था।

साभार: newstrack.com

🇮🇳 अपने राज्य की मान मर्यादा के लिए आजीवन संघर्ष करने वाली, अपनी अस्मत की रक्षा के लिए जौहर करने वाली, मेवाड़ की #वीरांगना #रानी_कर्णावती जी को उनके #आत्मबलिदान_दिवस पर कोटि-कोटि नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि !

🇮🇳💐🙏

#प्रेरणादायी_व्यक्तित्व 

#आजादी_का_अमृतकाल


साभार: चन्द्र कांत  (Chandra Kant) राष्ट्रीय उपाध्यक्ष - मातृभूमि सेवा संस्था 

#Karnavati, #queen, #kingdom, #Jauhar,  #Mewar, #history,  #Rani_Karnavati,


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Nripendra Mishra | नृपेंद्र मिश्रा | अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर निर्माण समिति अध्यक्ष



 प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव का पद छोड़ने के अपने फैसले के बाद नृपेंद्र मिश्र ने एक बयान में कहा था कि अब उनके लिए आगे बढ़ने तथा सार्वजनिक ध्येय और राष्ट्रीय हित के लिए समर्पित रहने का समय है. 🇮🇳

🇮🇳  #नृपेंद्र मिश्रा  #Nripendra Mishra(जन्म- 8 मार्च, 1945, #देवरिया, उत्तर प्रदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव रहे हैं। उनके चुनाव का एक कारण यह रहा कि वह यूपी कैडर के ही रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर हैं और प्रशासनिक कार्य का काफ़ी लम्बा अनुभव उनके पास है। नृपेंद्र मिश्रा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निजी सचिव और पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव के भी प्रधान सचिव रह चुके हैं। #अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नृपेंद्र मिश्रा को मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष # Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust Temple Construction Committee Chairman in Ayodhya नियुक्त किया है। उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिये उन्हें 'पद्म भूषण' (2021) से सम्मानित किया गया है।

🇮🇳 उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में #कसिली गाँव निवासी #सिवेशचंद्र_मिश्रा के बड़े बेटे नृपेंद्र मिश्रा 8 मार्च, 1945 को जन्मे। वह तीन-तीन विषयों से मास्टर्स हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उन्होंने रसायन विज्ञान, राजनीतिक विज्ञान और लोक प्रशासन विषय से पोस्ट ग्रेजुएट किया। उन्होंने विदेश में भी पढ़ाई की। पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (लोक प्रशासन) विषय से उन्होंने जॉन एफ केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर्स डिग्री ली। फिर 1967 में यूपी काडर के आईएएस बने।

🇮🇳 देश के शीर्ष स्तर के नौकरशाह के रूप में नृपेंद्र मिश्रा का लंबा और असाधारण कॅरियर रहा है। देश के नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उनको एक सक्षम और व्यवसाय समर्थक प्रशासक होने का श्रेय जाता है। 

🇮🇳 उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह सरकार में नृपेंद्र मिश्रा प्रमुख सचिव रह चुके हैं। इस बड़े राज्य में काम करते हुए उन्होंने तेज तर्रार और ईमानदार अफसर की पहचान बनाई। जिसके इनाम के तौर पर उन्हें प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में काम करने का मौका मिला। केंद्र में कई अहम पदों पर उन्होंने काम किया। दयानिधि मारन के मंत्री के कार्यकाल के दौरान दूरसंचार सचिव रह चुके हैं और उनको ब्राडबैंड नीति का श्रेय जाता है। डिपार्टमेंट ऑफ फर्टिलाइजर्स में भी 2002 से 2004 के बीच सचिव रहे। रिटायर होने के बाद मनमोहन सिंह की सरकार में नृपेंद्र मिश्रा 2006 से 2009 के बीच टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के भी चेयरमैन रहे।

🇮🇳 साल 2014 में बीजेपी की अगुवाई वाली 'राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन' (राजग) सरकार के सत्ता में आने के बाद नृपेंद्र मिश्रा को मोदी टीम में शामिल किया गया था। वह राजग के 2019 में और भी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटने के बाद भी मोदी की प्रमुख टीम में बने रहे। उसके बाद उन्हें नए बनाए गए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर या दिल्ली के उप-राज्यपाल बनाने की अटकलें भी सामने आई थी।

🇮🇳 नृपेंद्र मिश्रा मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान भी पीएम मोदी के प्रमुख सचिव बनाए गए थे। हालांकि उस समय उनकी नियुक्ति को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया था। विपक्ष का तर्क था कि ट्राई के नियमों के मुताबिक़ इसका अध्यक्ष रिटायर होने के बाद सरकार से जुड़े किसी पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता, चाहे वह केंद्र की सरकार हो या राज्य की। हालांकि मोदी सरकार ने इस नियम को अध्यादेश लाकर संशोधित कर दिया था, जिसके बाद नृपेंद्र मिश्रा की नियुक्ति की राह आसान हो गई थी।

🇮🇳 ट्राई के चेयरमैन पद से रिटायर होने के बाद नृपेंद्र मिश्रा पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन से जुड़े। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित दफ्तर में वह कुछ रिसर्च स्कॉलर्स के साथ काम करते थे। यह फाउंडेशन समाज में हाशिए पर पहुँचे लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक थिंकटैंक के रूप में काम करने के लिए जाना जाता है। कुछ समय तक वह मशहूर थिंक टैंक विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में भी प्रमुख पद पर रहे थे।

🇮🇳 नृपेंद्र मिश्रा ने विदेश में भी काम करने का अनुभव हासिल किया है। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में स्पेशल सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हुए देश से जुड़े मामलों में मजबूती से पक्ष रखा। इसके अलावा वह मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स में ज्वाइंट सेक्रेटरी रहे। इसके अलावा वर्ल्ड बैंक, एशियन डिवेलपमेंट बैंक, नेपाल सरकार में सलाहकार के रूप में भी उन्होंने काम किया हुआ है।

साभार:-bharatdiscovery.org

🇮🇳 #पद्मभूषण से सम्मानित; प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव रहे, अयोध्या में निर्माणाधीन प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर के लिए बने 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के अध्यक्ष #नृपेंद्र_मिश्रा जी को जन्मदिवस की वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर ढेरों बधाई एवं अनंत शुभकामनाऍं !

#Shri_Ram_Janmabhoomi_Teerth_Kshetra_Trust, #Temple, #Construction, #Committee,  #Chairman,#Ayodhya, #Ram_Janmabhoomi,

🚩 जय श्री राम 🚩

🇮🇳🕉️🚩🔱🌹🙏

#प्रेरणादायी_व्यक्तित्व

#आजादी_का_अमृतकाल

साभार: चन्द्र कांत  (Chandra Kant) राष्ट्रीय उपाध्यक्ष - मातृभूमि सेवा संस्था 



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08 मार्च 2024

Election Commission Warning to Rahul Gandhi | चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को चेतावनी जारी करने में साढ़े 3 महीने क्यों लगा दिए - लेखक : सुभाष चन्द्र




Election Commission  Warning to Rahul Gandhi

राहुल जैसे मूढ़मति पर कोई चेतावनी असर कर सकती है क्या ?

चुनाव आयोग ने चेतावनी जारी करने में साढ़े 3 महीने क्यों लगा दिए -

चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को 23 नवंबर, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “पनौती और जेबकतरा” कहने पर नोटिस जारी करके 25 नवंबर तक जवाब मांगा था और जब भाजपा इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट ले गई तब कोर्ट ने 21 दिसंबर, 2023 को आयोग से जारी किए गए नोटिस पर कार्रवाई करने को कहा था - इसके अलावा राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया था कि 9 साल में 14 लाख करोड़ के लोन माफ़ किए गए जो बिलकुल निराधार था और चुनाव आयोग ने इसे Representation of People’s Act and 499 of IPC and provisions of the Model Code of Conduct का उल्लंघन बताया था -


अब कोर्ट के निर्देश के अनुसार चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से चुनाव अभियान के दौरान स्टार प्रचारकों और राजनीतिक नेताओं के लिए जारी एडवाइजरी का गंभीरता से अनुपालन करने के लिए भी कहा है और इसका उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है 


पहली बात तो यह है कि आखिर चुनाव आयोग ने साढ़े 3 महीने का इतना लंबा समय चेतावनी जारी करने में क्यों लिया जबकि इस दौरान 5 राज्यों की विधान सभाओं के चुनाव चल रहे थे  और राहुल ही नहीं कांग्रेस के अन्य नेता भी प्रधानमंत्री मोदी के अपशब्दों की बौछार लगाते रहे, क्या इसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की नहीं बनती -


राहुल “कालनेमि” आदत से लाचार है जो प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा, भगवान राम और देश के खिलाफ बोलना अपना “धर्म” समझता है - अपने ही सहयोगियों DMK और राजद एवं अन्य दलों के सनातन धर्म, रामचरितमानस और भगवान राम के लिए दिए अपमानजनक बयानों पर खामोश रह कर उन्हें परोक्ष समर्थन देता है - 


 आयोग दरअसल एक दंतविहीन संस्था की तरह काम कर रहा है अन्यथा DMK के सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया, HIV और कोढ़ कह कर समाप्त करने की बात कहने पर पार्टी को De - Register कर देना चाहिए लेकिन चुनाव आयोग के पास किसी पार्टी को मान्यता देने की शक्ति तो है लेकिन मान्यता रद्द करने की शक्ति नहीं है चाहे कोई पार्टी कितना भी गलत आचरण करती रहे -


राहुल “कालनेमि” जनता में अडानी अंबानी को लेकर रोज जहर उगलता है - कोई समझ सकता है उसकी बात का क्या मतलब है कहने का कि “आप घर में बिजली का switch on करते हो तो उसके बिल का पैसा सीधा अडानी की जेब में जाता है” - एक बयान और सुनें, राहुल कहता है लोगों से - “आप प्राइवेट अस्पताल में गए जब आपका पैर टूटा, आपने प्राइवेट कॉलेज में पढाई की तो जो पैसा आपने अस्पताल में दिया या कॉलेज में उसमें कितना दलित को दिया, कितना आदिवासी को दिया, कितना पिछड़े को दिया और कितना जनरल कास्ट के गरीब को दिया” - 


अब कोई बताए क्या कहीं भी फीस दी जाती है तो क्या इस तरह दी जाती है - इसकी अगली बात सुनें कि ये जो सोने की चिड़िया है भारत, इसमें से कितना सोना मुझे मिला - और तो और महाशय कहते हैं कि भारत माता की जय और जय श्रीराम का नारा लगाने वाले भूखे मर जाएंगे -


यह माना कि चुनाव में प्रोपेगेंडा होता है लेकिन ऐसा भी क्या कि सब कुछ बकवास ही की जाए, जयराम रमेश की बात और मजेदार थी, वो कह रहा था कि “ 5 मार्च को राहुल जी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन देंगे” - मतलब ये भगवान हो गए दर्शन देने के लिए -


मुझे नहीं लगता राहुल गांधी पर किसी Advisory का कोई असर होगा - वो इसका उल्टा प्रचार करेगा कि हमारी आवाज़ दबाई जा रही है जो आरोप सब कुछ बोलते हुए भी लगा रहे हैं पिछले 10 साल से -


"लेखक के निजी विचार हैं "

 लेखक : सुभाष चन्द्र  | मैं हूं मोदी का परिवार | “मैं वंशज श्री राम का” 08/03/2024 

#Political, #sabotage,   #Congress,  #Kejriwal  #judiciary  #delhi #sharadpanwar, #laluyadav, #spa #uddavthakre, #aap  #FarmerProtest2024  #KisanAndolan2024  #SupremeCourtofIndia #Congress_Party  #political_party #India #movement #indi #gathbandhan #Farmers_Protest  #kishan #Prime Minister  #Rahulgandhi  #PM_MODI #Narendra _Modi #BJP #NDA #Samantha_Pawar #George_Soros #Modi_Govt_vs_Supreme_Court #Arvind_Kejriwal, #DMK  #A_Raja #Defamation_Case #top_stories#supreme_court #arvind_kejriwal #apologises #sharing #fake_video #against #bjp 


सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

Notice: There is no guarantee of authenticity or reliability of the information/content/calculations given here. This information has been compiled from various mediums for information and has been sent to you along with the personal views of the author. Our aim is only to provide information, readers should take it as information only. Apart from this, the responsibility of any kind will be of the reader himself who takes the decision. We or our associates are not responsible for this in any way. Thank you. ,


Hindustan Urvarak & Rasayan Ltd (HURL) Sindri Fertiliser Plant | राष्ट्र को समर्पित | लेखक : सुभाष चन्द्र


 

देश की बदहाली का दाग नेहरू को लगाए जयराम रमेश,.... मोदी को नहीं 

Hindustan Urvarak & Rasayan Ltd (HURL) Sindri Fertiliser Plant |  राष्ट्र को समर्पित |

जितना नेहरू का गुणगान करोगे, उतने नेहरू “बेपर्दा” होते जाएंगे -

पिछले 10 वर्ष में जो भी कुछ काम हुआ उसके लिए कांग्रेस के नेता घुमा फिरा कर नेहरू को श्रेय दे देते हैं और साबित करते हैं कि इसमें मोदी की उपलब्धि नहीं है - यहां तक चंद्रयान - 3 की सफलता के लिए भी नेहरू को हार पहना दिया और कह दिया मोदी का कोई योगदान नहीं है लेकिन कांग्रेस फिर देश की बदहाली के लिए नेहरू को जिम्मेदार क्यों नहीं मानती - एक तिहाई कश्मीर पाकिस्तान को देना और हज़ारों एकड़ भूमि पर चीन के कब्जे के लिए नेहरू को तमगा क्यों नहीं पहनाते  

अभी एक हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 plants को पुनर्जीवित करके झारखंड का Hindustan Urvarak & Rasayan Ltd (HURL) Sindri Fertiliser Plant राष्ट्र को समर्पित किया - इस पर कांग्रेस ने बड़बोले नेता जयराम रमेश ने 2 फोटो शेयर करते हुए बताया कि सिंदरी प्लांट तो 1952 में नेहरू जी शुरू किया था और मोदी पर तंज कसते हुए कहा - 

"Today of course, the Prime Minister is in Sindri claiming credit -Prime Minister Narendra Modi on Friday dedicated to the nation ₹8,900-crore fertiliser plan in Sindri and said it was 'Modi ki guarantee' which he fulfilled in six years.

सिंदरी कारखाने में आमोनियम नाइट्रेट का प्रोडक्शन सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर 1951 को शुरू हो चुका था लेकिन इसका उद्घाटन 1952 में नेहरू के हाथों कराया गया था -

प्रधानमंत्री मोदी के हर काम से जलने वाले कांग्रेसी नेहरू को रोते फिरते हैं और किसी भी हद तक झूठ बोलते हैं - सिंदरी कारखाना 1991 में घाटे की वजह से BIFR (Board of Industrial and Financial Reconstruction) में चला गया था -

गोरखपुर, रामगुंडम, तलचर और कोरबा समेत सिंदरी कारखाना BIFR को रेफर हो गए थे और उन्हें 1992 में Sick घोषित कर दिया गया था -

यदि आज सिंदरी कारखाना मोदी द्वारा फिर से शुरू करने पर भी नेहरू को श्रेय देना चाहते हो तो 1991 - 1992 उसके Sick होने के लिए भी नेहरू को जिम्मेदार कहने की हिम्मत करो 

5 सितंबर, 2002 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने सिंदरी समेत गोरखपुर, तालचर और रामागुंडम के खाद कारखाने को बंद करने का निर्णय लिया और 31 दिसंबर, 2002 को ये सभी प्लांट बंद हो गए -

मोदी सरकार ने 21 मई 2015 को बंद पड़े सिंदरी खाद कारखाने को पुनर्जिवित करने के लिए 10,500 करोड़ रुपए की कैबिनेट से मंजूरी ली थी। जिसका शिलान्यास 25 मई 2018 को किया गया और अब 6 साल से भी कम समय में काम पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसका उद्घाटन किया तो नेहरू जी याद आ गए जयराम रमेश को - 

मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए हिंदुस्तान उर्वरक & रसायन लिमिटेड (HURL) Sindri Fertiliser Plant को पुनर्जीवित करने में 8939.25 crores रुपए से ज्यादा खर्च आया है - यानी नेहरू के पैदा किए गए मृत कारखाने में जान डालने में जनता का करीब 9 हजार करोड़ रुपया लग गया मगर  कारखाना फिर से शुरू करने का श्रेय नेहरू को देंगे बेशर्म कांग्रेसी -

इतना खर्च करने के बाद कर्मचारियों को एक और सुविधा दी जाएगी - वर्ष 2002 के 31 दिसंबर को फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की सिंदरी यूनिट, गोरखपुर, रामागुंडम, तलचर यूनिट को बंद कर लगभग सभी कर्मचारियों को वीआरएस के तहत सेवानिवृत्त कर दिया गया था। उस वक्त कर्मचारियों का 1992,1997 एवं 2002 का वेतन पुनरीक्षण बाकी था - उन VRS ले चुके कर्मचारियों को सभी Pay Revision के arrear भी दिए जाएंगे जो कभी कांग्रेस सरकार में उम्मीद नहीं की जा सकती -

कांग्रेस के लोग बेहतर है मोदी के प्रति ईर्ष्या की वजह से हुई नेत्रहीनता को त्याग दें तो अच्छा है - लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष होना चाहिए मगर जो विपक्ष कांग्रेस देना चाहती है वह किसी काम का नहीं है क्योंकि अब कांग्रेस मोदी का विरोध करते करते देश विरोध पर आ गई है -

"लेखक के निजी विचार हैं "

 लेखक : सुभाष चन्द्र  | मैं हूं मोदी का परिवार | “मैं वंशज श्री राम का” 08/03/2024 

#Political, #sabotage,   #Congress,  #Kejriwal  #judiciary  #delhi #sharadpanwar, #laluyadav, #spa #uddavthakre, #aap  #FarmerProtest2024  #KisanAndolan2024  #SupremeCourtofIndia #Congress_Party  #political_party #India #movement #indi #gathbandhan #Farmers_Protest  #kishan #Prime Minister  #Rahulgandhi  #PM_MODI #Narendra _Modi #BJP #NDA #Samantha_Pawar #George_Soros #Modi_Govt_vs_Supreme_Court #Arvind_Kejriwal, #DMK  #A_Raja #Defamation_Case #top_stories#supreme_court #arvind_kejriwal #apologises #sharing #fake_video #against #bjp 


सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

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Kashmir is Changing and Developing | कश्मीर बदल रहा है और विकसित हो रहा है। लेखक : नलीन चंद्र


 


कई कवियों ने सर्वश्रेष्ठ वर्णमालाओं के साथ कश्मीर की सुंदरता का वर्णन किया है। लेकिन यहां कुछ साल पहले तक खून बह रहा था। अब समय के साथ यह बदल गया है। 

कश्मीर बदल रहा है और विकसित हो रहा है। 


आज जो तस्वीरें देखने को मिल रही हैं, वे खास हैं। हम सभी उस दिन के भी गवाह हैं जब प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कश्मीर की एक अलग तस्वीर देखी गई थी। देश का सबसे खूबसूरत हिस्सा अलगाववाद की आग में जल रहा था। मुठभेड़ों, बम विस्फोटों, पथराव, नारों की बौछार और कर्फ्यू की खबरें सुर्खियों में रहती थीं, लेकिन आज की तस्वीरें अलग हैं। 


2019 के बाद से, कश्मीर के इर्द-गिर्द की कहानी, विशेष रूप से पश्चिमी प्रेस में, कश्मीर की सुरक्षा और सैनिकों की तैनाती के साथ-साथ संचार में व्यवधान के इर्द-गिर्द रही है। 

लेकिन कश्मीर आगे बढ़ गया है, और प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा पिछले पांच वर्षों में कश्मीर की प्रगति को उजागर करने के लिए बातचीत को बदलने का एक प्रयास है। 


भारतीय प्रधानमंत्री ने 2019 के बाद घाटी की अपनी पहली यात्रा पर कश्मीर का दौरा किया, जब अनुच्छेद 370, जम्मू और कश्मीर को इसका विशेष दर्जा देने वाले प्रावधान को निरस्त कर दिया गया था। प्रधानमंत्री जम्मू की यात्रा कर रहे हैं। वास्तव में, वह पिछले सप्ताह वहां थे, लेकिन हाल ही में उनकी श्रीनगर की यात्रा पांच वर्षों में पहली है। इस यात्रा ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि यह इरादे का एक बयान है।


अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी निवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से विकास परियोजनाओं और पहलों पर चर्चा करने के लिए स्थानीय नेताओं और समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने 


इस क्षेत्र में कई नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और निवेशों की भी घोषणा की, जो आर्थिक विकास और समृद्धि पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का संकेत है। इस यात्रा को संबंधों को सामान्य बनाने और लंबे समय से राजनीतिक अशांति और संघर्ष से त्रस्त क्षेत्र में एकता और प्रगति की भावना को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा गया। कश्मीर की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हजरतबल तीर्थ परियोजना और सोनमर्ग स्की ड्रैग लिफ्ट के एकीकृत विकास का उद्घाटन करेंगे।


इस वर्तमान शासन के दौरान, कश्मीर ने विद्युतीकृत रेलवे लाइनों का आगमन देखा है, जिसकी पिछली सरकारों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। इन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन ने कश्मीर के लोगों के लिए आशा और आशावाद की भावना लाई है, जो लंबे समय से अविकसित और बुनियादी सुविधाओं की कमी से पीड़ित हैं। विद्युतीकृत रेलवे लाइनों ने न केवल क्षेत्र के भीतर संपर्क में सुधार किया है, बल्कि व्यापार और पर्यटन के अवसर भी खोले हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है। 


विकास और प्रगति पर इस नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने से कश्मीरी निवासियों में गर्व और लचीलापन की भावना पैदा हुई है, जो अब एक उज्जवल भविष्य की ओर देख रहे हैं। इसके अलावा, बाकी दुनिया हिमालय के दुर्गम इलाकों में रेलवे लाइन बनाने जैसी भारत की अद्भुत क्षमताओं से चकित है। सुरंगें और पुल न केवल इंजीनियरिंग के चमत्कार हैं, बल्कि विकास और समृद्धि के लिए सबसे दूरदराज के क्षेत्रों को भी जोड़ने की भारत की प्रतिबद्धता के प्रतीक हैं। कश्मीर में विद्युतीकृत रेलवे लाइन को ले जाने वाला चिनाब नदी पर बना पुल समुदायों को बदलने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में बुनियादी ढांचे के विकास की शक्ति का प्रमाण है।


इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना और बुनियादी ढांचे में सुधार करना है। प्रधानमंत्री की यात्रा कश्मीर के विकास और प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत है। यह घाटी के लोगों के लिए एक आशाजनक संकेत है, जो लंबे समय से संघर्ष और अस्थिरता से पीड़ित हैं। ये परियोजनाएं न केवल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगी बल्कि कश्मीर की सुंदरता और क्षमता को बाकी दुनिया के सामने भी प्रदर्शित करेंगी। यह क्षेत्र धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से एक उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ रहा है और लोगों को आने वाले वर्षों में शांति और समृद्धि की उम्मीद है।


कश्मीर में बुनियादी ढांचा अब कितना अच्छा हो गया है, इसका अंदाजा पड़ोसी पीओके के निवासियों की प्रतिक्रिया से लगाया जा सकता है। वे सीमा के भारतीय हिस्से में, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे के मामले में जो प्रगति और विकास देख रहे हैं, उससे वे चकित हैं। रेलवे लाइन ने न केवल शेष भारत के साथ संपर्क में सुधार करने का वादा किया है, बल्कि व्यापार के लिए कश्मीर में किसानों और कारीगरों का मनोबल भी बढ़ाया है। इस क्षेत्र में पर्यटन पहले से ही बढ़ रहा है, अधिक आगंतुक आश्चर्यजनक दृश्यों और अनुभव को देखने के लिए आ रहे हैं।


इसके विपरीत, पीओके के लोगों के लिए चिनाब पुल जैसी संरचना को देखना, महसूस करना या अनुभव करना एक दूर का सपना है। भारतीय पक्ष की प्रगति की तुलना में पीओके में बुनियादी ढांचे और विकास की कमी स्पष्ट है। पीओके के लोग एक बेहतर नागरिक जीवन और कश्मीर में अपने समकक्षों की तरह एक सामान्य मानव जाति की तरह विकसित होने के अवसरों के लिए तरसते हैं। 


इस भावना ने भारत को युद्ध छेड़ने के बिना पीओके पर फिर से कब्जा करने की अनुमति दी है। सीमा के दोनों किनारों के बीच रहने की स्थिति में भारी अंतर ने पीओके में लोगों के बीच बदलाव और सुधार की इच्छा को बढ़ावा दिया है। बेहतर भविष्य और समान अवसरों की आशा एकीकरण के लिए एक प्रेरक शक्ति बन गई है और इसने पीओके में लोगों के बीच बदलाव और प्रगति की इच्छा को बढ़ावा दिया है।  


चिनाब नदी पर बना पुल भारतीय शक्ति, प्रौद्योगिकी और निश्चित रूप से धन में भारत की विशेषज्ञता के प्रतीक के रूप में खड़ा है। 


पीओके के लोगों ने एक ऐसे भविष्य की कल्पना करना शुरू कर दिया है जहां वे पीछे न रह जाएं, जहां उनकी सीमा पार अपने साथी नागरिकों के समान अवसरों और संसाधनों तक पहुंच हो। 


प्रधानमंत्री की यात्रा को कश्मीरी लोगों की जरूरतों और चिंताओं को दूर करने और क्षेत्र के लिए अधिक शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य की दिशा में काम करने की सरकार की प्रतिबद्धता के सकारात्मक संकेत के रूप में देखा गया।


प्रधानमंत्री ने इस अवसर का उपयोग घाटी में विकास परियोजनाओं पर बात करने के लिए किया। अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने 70 करोड़ डॉलर से अधिक की 53 अन्य परियोजनाओं की घोषणा की।


यह यात्रा भारत के आगामी आम चुनाव से पहले भी हो रही है।


इससे बेहतर समय नहीं हो सकता था। भारत में आम चुनाव नजदीक हैं, तारीखों की घोषणा कुछ ही हफ्तों में की जा सकती थी, इसलिए प्रधानमंत्री की कश्मीर यात्रा इससे अधिक उपयुक्त समय पर नहीं हो सकती थी।


राजनीति से परे, पीएम मोदी की यात्रा का गहरा महत्व था। इससे पहले, जम्मू और कश्मीर एक पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से एक राज्य था। इसे एक केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया था, और परिवर्तनों पर भारतीय संसद की मंजूरी की मुहर लगी थी। इसने दिसंबर में कानूनी परीक्षा भी पास की।


पिछले साल, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निरस्तीकरण को बरकरार रखा।


भारतीय प्रधान मंत्री की यात्रा उस आदेश के दो महीने बाद आती है, और वह यहां एक विशेष मिशन पर थे-दिल जीतने के लिए।


उनके संबोधन से पहले पहुंच दिखाई दे रही थी; प्रधानमंत्री ने स्थानीय लोगों से मुलाकात की, जिनमें से कई घाटी की अर्थव्यवस्था के उत्थान के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं के लाभार्थी थे। 


यह प्रधानमंत्री की मुख्य बात थी। 


2019 से प्रधानमंत्री के लिए कश्मीर का विकास एक प्रमुख फोकस क्षेत्र रहा है। उनकी सरकार ने सैकड़ों विकास परियोजनाओं पर जोर दिया है।


इस यात्रा के साथ प्रधानमंत्री ने इस एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने लाखों डॉलर की 53 और परियोजनाओं की घोषणा की। इन सभी पहलों में से एक सबसे अलग हैः प्रसिद्ध डल झील के पास हजरतबल तीर्थ में एकीकृत विकास परियोजना। हाल ही में पीएम मोदी ने इसका उद्घाटन किया था। यह परियोजना स्थानीय समुदाय तक एक बड़ी पहुंच का हिस्सा है।


मुसलमानों के लिए इसका गहरा महत्व है। वर्षों से, इस मंदिर ने पैगंबर मुहम्मद की दाढ़ी के पवित्र बालों को संरक्षित किया है।


शुक्रवार को रमजान जैसे विशेष अवसरों पर सामूहिक प्रार्थना के लिए स्थानीय लोग अक्सर यहां आते हैं। मंदिर में बड़ी संख्या में आगंतुक आते हैं; पूरे स्थल को बदल दिया गया है। नए और आधुनिक सुविधाओं को जोड़ने के साथ प्रवेश प्रांगण में सुधार किया गया है।


प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि श्रीनगर अब भारत के पर्यटन उद्योग का केंद्र बन गया है और ये परियोजनाएं अब घाटी के पुनर्विकास में योगदान दे रही हैं।

"लेखक के निजी विचार हैं "

 







लेखक : नलीन चंद्र  (Naleen Chandra)  08/03/2024 

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सूचना:  यंहा दी गई  जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की  कोई गारंटी नहीं है। सूचना के  लिए विभिन्न माध्यमों से संकलित करके लेखक के निजी विचारो  के साथ यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह  की जिम्मेदारी स्वयं निर्णय लेने वाले पाठक की ही होगी।' हम या हमारे सहयोगी  किसी भी तरह से इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | धन्यवाद। ... 

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